विधानसभा में MLA vs मंत्री: बाढ़े से बाजरे की क्वालिटी खराब, फिर भी सरकार के कड़े पैमाने

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विधानसभा में MLA vs मंत्री: बाढ़े से बाजरे की क्वालिटी खराब, फिर भी सरकार के कड़े पैमाने

भोपाल. मध्यप्रदेश विधानसभा (Madhya Pradesh Legislative Assembly) के शीतकालीन सत्र (Winter Session) के दूसरे दिन 21 दिसंबर को सदन की कार्यवाही शुरू से ही हंगामेदार रही। दोनों ही दल ओबीसी आरक्षण (OBC Reservation) को लेकर कोई कोताही नहीं बरतना चाहते। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही प्रश्नकाल के दौरान स्पीकर (Speaker) ने नियम 138(1) के आधीन मंत्री के ध्यान आकर्षण की सूचना का निर्देश दिया गया। वैसे ही मुरैना (Morena) जिला के तीन विधायक सतीश सिकरवार, संजीव सिंह और राकेश मावई ने मिलकर बाजरे की खरीदी (purchase of millet) नहीं होंने का सवाल किया। इस पर विभाग द्वारा और मंत्री जी ने गोल-मोल जवाब दिया। इस पर सदन में काभी नौक-झौक हुई। इस मुद्दे पर विधायकों ने वॉकआउट (Walkout) भी किया।

ये सवाल पूछा था, तीन विधायकों ने

दिसम्बर, 2021 तक ग्वालियर एवं चम्बल संभाग के जिलों के साथ अन्य जिलों में अभी तक शासन द्वारा निर्धारित दर पर बाजरे की खरीदी नहीं होने से किसानों द्वारा जगह-जगह आन्दोलन किए जा रहे है। शासन द्वारा खरीदी करने का जो नमूना (एफ.ए.क्यू.) बताया जा रहा है। उस तरह की बाजरे की फसल मध्यप्रदेश में कहीं पर भी नहीं हुई है। खरीफ फसल के समय समूचे प्रदेश में वर्षा बाढ़ की भयावह स्थिति बनी होने से फसल के रंग में मामूली अन्तर आया है। बाजरा की फसल को तीन महीने हो चुका है। शासन द्वारा खरीदी नहीं होने व आर्थिक रूप से परेशानी के कारण शादी, विवाह का समय होने से किसानों द्वारा व्यवसायियों को बहुत कम कीमत में बाजरा बेचा जा रहा है। फसलों का मुआवजा मिलना तो दूर उनकी बाजरे की फसल की खरीदी शासन द्वारा नहीं होने से किसानों में आक्रोश व्याप्त है। कई स्थानों पर किसान आन्दोलन कर रहे हैं। 

विभाग ने यह जवाब दिया

प्रदेश में खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 में समर्थन मूल्य पर बाजरा विक्रय करने हेतु ई-उपार्जन पोर्टल पर 51,671 किसानों ने पंजीयन कराया है। पंजीकृत किसानों से बाजरा उपार्जन हेतु कुल 172 उपार्जन केन्द्र स्थापित किए गए हैं, जो कि विगत वर्ष से 38 अधिक हैं। बाजरा उपार्जन हेतु बारदाना, परिवहन, भंडारण आदि की समुचित व्यवस्था की गई है। बाजरा का उपार्जन दिनांक 21 नवंबर 2021 से प्रारंभ किया गया है।

दिनांक 19 दिसंबर 2021 तक मोटा अनाज उपार्जन हेतु 60 हजार 620 किसानों को एसएमएस प्रेषित किए जाकर 2 हजार 299 किसानों से 10 हजार 524 मेगा टन बाजरा का उपार्जन किया जा चुका है। कलेक्टर मुरैना, भिण्ड एवं ग्वालियर द्वारा प्रेषित प्रतिवेदन अनुसार बाजरा की फसल असामयिक वर्षा एवं ओलावृष्टि के कारण लगभग 15 से 20 प्रतिशत प्रभावित हुई है। जिसके कारण भिण्ड जिले में उपार्जन हेतु आ रहे बाजारे में क्षतिग्रस्त दाने 8.2 प्रतिशत, आंशिक क्षतिग्रस्त एवं बदरंग दाने 10.6 प्रतिशत एवं सिकुड़े एवं अधपके दाने 12 प्रतिशत आ रहे हैं।

उपार्जन मात्रा में कमी आई

इसी प्रकार जिला मुरैना में क्षतिग्रस्त दाने 15.7 प्रतिशत, आंशिक क्षतिग्रस्त एवं बदरंग दाने 12.5 प्रतिशत एवं सिकुड़े एवं अधपके दाने 8 प्रतिशत तथा ग्वालियर जिले में क्षतिग्रस्त दाने 8 से 10 प्रतिशत, आशिक क्षतिग्रस्त एवं बदरंग दाने 12 से 15 प्रतिशत एवं सिकुडे एवं अधपके दाने 10 से 12 प्रतिशत तक आ रहे हैं। जबकि भारत सरकार द्वारा एफ.ए.क्यू के निर्धारित मापदण्ड अनुसार बाजरा उपार्जन में क्षतिग्रस्त दाने 1.5 प्रतिशत, आंशिक क्षतिग्रस्त एवं बदरग दाने 4.5 प्रतिशत एवं सिकुड़े एवं अधपके दाने 4 प्रतिशत तक ही मान्य है। उपार्जन केन्द्रों पर निर्धारित गुणवत्ता का बाजरा न आने के कारण उपार्जन मात्रा में कमी आई है।

अवधि बढ़ाने के लिए भारत सरकार से अनुरोध किया

बाजरा उत्पादक किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ उपलब्ध कराने हेतु राज्य सरकार द्वारा वर्षा से प्रभावित बाजरा के उपार्जन करने के लिए निर्धारित एफ.ए.क्यू. के मापदण्ड में शिथिलता प्रदान करने हेतु दिनांक 03 दिसंबर 2021 एवं दिनांक 10 दिसंबर 2021 को भारत सरकार से अनुरोध किया गया है जिसके आधार पर भारत सरकार द्वारा बाजरा की गुणवत्ता की जांच हेतु दिनांक 16 दिसंबर 2021 को दो सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। समिति की बाजरा गुणवत्ता जांच रिपोर्ट के आधार पर भारत सरकार से एफ.ए.क्यू, मापदण्ड में शिथिलता प्राप्त होते ही तदानुसार बाजरा की खरीदी की जा सकेगी, साथ ही बाजरे की खरीदी की अवधि बढ़ाने हेतु भी भारत सरकार से अनुरोध किया गया है। उल्लेखनीय है कि समर्थन मूल्य पर उपार्जित बाजरा का वितरण प्रदेश में ही लक्ष्यित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत पात्र परिवारों को कराने का प्रावधान है।

इस प्रकार असामयिक वर्षा से प्रभावित बाजरा की गुणवत्ता प्रभावित होने के कारण एफ.ए.क्यू. मापदण्ड में शिथिलता प्रदान करने की कार्यवाही प्रचलित है। समर्थन मूल्य पर बाजरा उपार्जन की पूर्ण व्यवस्था राज्य सरकार (राज्य सरकार) द्वारा की गई है एवं राज्य सरकार एफ.ए.क्यू. मापदण्ड का बाजरा खरीदी करने के लिए कटिबद्ध है।

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