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नितिन जैन , BARWANI
बड़वानी जिले के कोतवाली थाने में नर्मदा बचाओं अभियान की मुखिया मेधा पाटकर पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया है। पाटकर के साथ 11 और लोगों को धोखाधड़ी का सह आरोपी बनाया गया है। मेधा पाटकर और उनके सहयोगियों पर नर्मदा नवजीवन अभियान को मिले 13.5 करोड़ का गबन करने का आरोप लगा है।
किस की शिकायत पर की गई एफआईआर, क्या क्या बोली पुलिस
गबन की शिकायत करने वाले बड़वानी जिले के राजपुर ब्लॉक के गांव टेमला के प्रीतमराज बड़ौले है जिन्होने मेधा पाटकर सहित परवीन रूमी ,जहांगीर, बसावे, संजय जोशी, श्याम पाटिल ,सुनिति एसआर विजया चौहान, कैलाश अवास्या, मोहन पाटिदार, आशीष मंडलोई, केवलसिंह ,नुरजी पदवी और केसव वासवे पर प्रकरण दर्ज किया है। प्रीतमराज का आरोप है कि एनजीओ में 14 साल में 13.5 करोड़ रूपए जमा हुए थे लेकिन अदिवासी बच्चों की पढाई के नाम पर दान में मिली राशी का उपयोग देश विरोधी गतिविधी मेें किया गया है। प्रीतमराज के मुताबिक दान की राशी के स्त्रोत और व्यय का खुलासा नही है और इतना ही नही डेढ करोड़ की राशी तो नकद निकाली गई है, जिनका आडिट खाता विवरण ,स्थिती साफ नही है। प्रीतमराज कहते है कि 4 खाते एसे है जिनमें 4 करोड़ से अधिक राशी की लगातार व अज्ञात निकासी हुई हैै। प्रीतम राज का आरोप यह भी है कि मेधा पाटकर ने कोर्ट में अपनी आय 6 हजार रुपए प्रतिवर्ष बताई है लेकिन उनके सेविंग खाते में 19 लाख की रकम जमा हुई है ।
मृतक के नाम पर एफआईआर, एफआईआर पर क्या बोली पुलिस
नर्मदा बचाओ अभियान के वॉलिंटियर महेंद्र तोमर का कहना है कि पुलिस ने जल्दबाजी में मृतक आशीष मंडलोई का नाम भी एफआईआर में लिख दिया। जबकि मंडलोई की मौत 2010 में ही हो चुकी है। एसपी दीपक कुमार शुक्ला ने कहा है कि वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत पर एफआईआर की गई है , वहीं रही बात मृतक पर एफआईआर की तो शिकायत के आधार पर एफआईआर की जाती है यदि जांच में किसी की मौत की पुष्टि होती है तो उसका नाम हटा दिया जाएगा।
एफआईआर पर मेधा पाटकर
मेधा पाटकर के मुताबिक उनके खिलाफ जो शिकायत दर्ज कराई गई वो झूठी है उनके द्वारा सभी खातों का ऑडिट किया जाता रहा है। फिलहाल पुलिस की ओर से कोई नोटिस नहीं मिला है । हमने पहले भी कई बार ऐसे आरोपों के जवाब दिए है शिकायतकर्ता लोगों को भ्रमित कर रहे है।