संस्कृत के जरिए घर-घर में पैठ बनाने की कवायद में जुटा संघ

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संस्कृत के जरिए घर-घर में पैठ बनाने की कवायद में जुटा संघ

Bhopal. अरुण तिवारी.  नव युवाओं और महिलाओं को जोड़ने के लिए संघ ने बड़ा प्लान तैयार किया है। सबसे बड़ा फोकस आदिवासी परिवारों पर हैं। संस्कृत के जरिए संघ घर-घर में पैठ बनाने की कोशिश कर रहा है। संघ के अनुषांगिक संगठन संस्कृत भारती ने दस दिन का पाठ्यक्रम तैयार किया है जिसमें बच्चों और महिलाओं को संस्कृत बोलना सिखाया जा रहा है। इसकी शुरुवात आदिवासी जिले बालाघाट से शुरु की गई है। इस क्लास में अनूपपुर,डिंडौरी,मंडला और उमरिया तक के बच्चों को शामिल किया गया है। ये सिर्फ शुरुआत है।  इस कार्यक्रम को पूरे मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ तक ले जाया जाएगा। इसके लिए जबलपुर में 16 मई को शिक्षकों को संस्कृत का प्रशिक्षण देकर अलग-अलग जिलों में शिविर लगाने के लिए भेजा जाएगा। पतंजलि संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष भरत बैरागी कहते हैं कि संस्कृत देवभाषा है और इसके जरिए ही भारत विश्वगुरु बनेगा।





आदिवासियों में पैठ बढ़ाने की कोशिश





दरअसल मौजूदा दौर में संघ की चिंता उससे आदिवासियों के छिटकने को लेकर है। धर्मांतरण का सबसे ज्यादा प्रभाव आदिवासी इलाकों में ही देखा जाता है। मध्यप्रदेश और छत्तीगसढ़ में बड़े आदिवासी राज्य माने जाते हैं, इसलिए इसकी शुरुवात इन राज्यों से ही की जा रही है। मध्यप्रदेश में पहले ही यह तय कर दिया गया है कि अगला विधानसभा चुनाव हिंदुत्व को लेकर लड़ा जाएगा। संघ ग्रास रुट लेवल पर काम कर आदिवासियों की सरकार के प्रति नाराजगी को भी दूर करेगा। इस वर्ग के बच्चे संघ के शिविर में शामिल हों इसके लिए सभी समाज के बच्चों को इसमें शामिल किया जा रहा है। बच्चों की रुचि बने इसके लिए संस्कृत को सरल भाषा में समझाया जा रहा है और इसीलिए सिर्फ दस दिन का कोर्स तैयार किया गया है। संस्कार भारती के महाकौशल प्रांत के सह मंत्री संदीप मिश्र कहते हैं कि संस्कृत देवभाषा है और ये हमारे बच्चों को आना ही चाहिए।





खेल-खेल में जोड़ने की कवायद





इस शिविर में भाग ले रहे बच्चे और महिलाएं भी उत्साहित हैं। उनको खेलखेल में नई भाषा सीखने जैसी अनुभूति हो रही है। यहां सभी संस्कृत में ही बातचीत करते हैं। 10 दिन के शिविर का पाठ्यक्रम कुछ ऐसा तैयार किया गया है कि इतनी कम अवधि में ही व्यक्ति संस्कृत बोलने लगता है। संस्कृत भारती के इस आवासीय शिविर में दिनचर्या सुबह 4.30 बजे से शुरू हो जाती है। इस वक्त यहां 111 लोग संस्कृत सीखने के लिए आए हुए हैं, इनमें 25 बच्चे और 86 बड़े लोग हैं।





संघ का नया एजेंडा





देश में हिंदी-अंग्रेजी को लेकर हमेशा चर्चा छिड़ी रहती है। पाठ्यक्रम में गीता शामिल करने पर भी ये बात उठती है कि राज्यों की बीजेपी सरकारें संघ का एजेंडा लागू कर रही हैं। केंद्र की मोदी सरकार ने भी बच्चों को संस्कारित करने के लिए स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक नई शिक्षा नीति लागू की गई है। इसमें भी संस्कृत को बढ़ावा दिया जा रहा है। संघ हमेशा हिंदुत्व को जीवनशैली मानता है और संस्कृत को देवभाषा माना जाता है। यही कारण है कि संघ के इस कदम को ग्रास रुट लेवल पर संस्कृत के जरिए समाज में पैठ बढ़ाने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।



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