कहां गुल हो गई बिजली: बांधों में पानी नहीं, कोयले की कमी और निजी कंपनियों का कर्ज बकाया

author-image
एडिट
New Update
कहां गुल हो गई बिजली: बांधों में पानी नहीं, कोयले की कमी और निजी कंपनियों का कर्ज बकाया

प्रदेश में बीते दिन से बिजली कटौती को लेकर नागरिक परेशान हैं। कटौती से सबसे ज्यादा किसान परेशान हैं, बारिश की मार और बिजली की कटौती एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। ज्यादातर जिलों में ग्रामीण इलाकों में बिजली बंद पड़ रही है। इसे लेकर सियासत भी गरमा गई है और विपक्ष एक बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहा है, लेकिन प्रदेश की बिजली अचानक गुल कहां हो गई आइये जानते हैं...

10 हजार मेगावाट की डिमांड

प्रदेश में बिजली मुख्यता बिजली प्लांट, हाइड्रल और सेंट्रल सेक्टर से मिलती है। प्रदेश में 10 हजार मेगावाट बिजली की मांग होती है, जबकि मात्र 8920 मेगावाट बिजली ही उपलब्ध है। प्रदेश बिजली के मामले में हमेशा आगे रहा है। सरकार भी बिजली के लिए प्रदेश के आत्मनिर्भर होने का दावा कर चुकी है।

मात्र 4 दिन का कोयला बचा

प्रदेश में सबसे ज्यादा बिजली का उत्पादन श्री सिंगाजी खंडवा में होता है, यहां 2520 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है। यहां महज 4 दिन का कोयला स्टॉक में है और 4 में से सिर्फ दो ही यूनिट चालू हैं जिससे मात्र 600 मेगावाट बिजली पैदा हो रही है। प्रदेश में तीन प्लांटों सतपुड़ा ताप विद्युत सारनी, संजय गांधी पावर प्लांट बिरसिंहपुर और अमरकंटक ताप गृह चचाई की है। इन चार प्लांटों में 16 यूनिट हैं, लेकिन कोयले की कमी के कारण 9 यूनिट बंद करने की नौबत आ गई है।

कर्ज में डूबी सरकार

प्रदेश में पावर जनरेटिंग कंपनी के कोयले आधारित ताप विद्युत संयंत्र को वेस्टर्न कोल लिमिटेड (WCL), साउथ-ईस्टर्न कोल लिमिटेड (SECL) और नार्दन कोल लिमिटेड (NCL) से कोयला मिलता है। हाल की स्थिति एसी है कि जनरेटिंग कंपनी पर तीनों कोल कंपनियों का 1500 करोड़ से ज्यादा का बकाया है।

जनरेटिंग कंपनी को विद्युत वितरण कंपनियां और पावर मैनेजमेंट कंपनियों से 2,500 करोड़ रुपए लेने हैं। विद्युत वितरण कंपनियों को सरकार से सब्सिडी के 8000 करोड़ रुपए लेने हैं। सरकार के स्तर पर भुगतान न होने से ये संकट बना हुआ है। सरकार की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है, ऐसे में वह बिजली कंपनियों को सब्सिडी नहीं दे पा रही है।

मध्यप्रदेश द सूत्र power cut बिजली उत्पादन bijli sankat ताप विद्युत संयंत्र को वेस्टर्न कोल लिमिटेड साउथ-ईस्टर्न कोल लिमिटेड नार्दन कोल लिमिटेड मेगावाट सरकार बिजली संकट कोयला स्टॉक electricity in madhya pradesh the sootra