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जबलपुर के जिस कॉलेज में फिलॉसफी पढ़ाते थे ओशो, उस महाकौशल कॉलेज का नाम आचार्य रजनीश पर होगा, कॉलेज में अब भी उनकी चीजें सुरक्षित

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Rajeev Upadhyay
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जबलपुर के जिस कॉलेज में फिलॉसफी पढ़ाते थे ओशो, उस महाकौशल कॉलेज का नाम आचार्य रजनीश पर होगा, कॉलेज में अब भी उनकी चीजें सुरक्षित

Jabalpur. जबलपुर में मौलश्री वृक्ष के नीचे ध्यान और तप कर ज्ञान पाने वाले आचार्य रजनीश ने पूरे विश्व में अपने आध्यात्म का डंका पिटवाया था। जबलपुर में जिस महाकौशल कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में आचार्य रजनीश ने सालों दर्शनशास्त्र पढ़ाया। उस कॉलेज का नाम अब रजनीश ओशो पर रखा जाएगा। जिला योजना समिति की बैठक में यह प्रस्ताव लाया गया था, जिस पर सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से मुहर लगा दी। अब जल्द ही महाकौशल कॉलेज आचार्य रजनीश कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय के नाम से जाना जाएगा। 

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ओशो प्रेमियों में दौड़ी खुशी की लहर





प्रदेश में वैसे तो शहरों और स्टेशनों के नाम बदलने की बयार बह ही रही थी। इसी कड़ी में महाकौशल कॉलेज का नाम बदलने का प्रस्ताव झट से स्वीकार कर लिया गया, हालांकि इसकी मांग काफी पहले से चल रही थी। हालांकि कहा यही जा रहा है कि महाकौशल कॉलेज के नाम के आगे ओशो जुड़ जाएगा। नाम बदलने का यह प्रस्ताव साल 2019 में लाया गया था। महाकौशल कॉलेज प्रबंधन ने भी रजनीश ओशो के नाम पर कॉलेज का नाम करने चिट्ठी लिखी थी। 





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साठ के दशक में रहे थे प्रोफेसर

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जानकारों की मानें तो 1960 के दशक में रजनीश ने 10 साल तक इस कॉलेज में अपनी सेवाएं दी थीं। वे दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर थे। जबलपुर उनकी कर्मभूमि थी, वहीं देश और विदेश में उनके लाखों प्रेमी हैं। महाकौशल कॉलेज में वे जिस कुर्सी पर बैठकर पढ़ाया करते थे, कॉलेज ने वह कुर्सी भी सहेज कर रखी है। जिन किताबों में उनके हस्ताक्षर थे, वह रिकॉर्ड भी सहेजकर रखा गया है। इसी तरह उनसे जुड़ी काफी सामग्री को सहेजा गया है। 





जिला योजना समिति में आया था प्रस्ताव





बता दें कि बीते दिनों जिला योजना समिति की बैठक में यह प्रस्ताव रखा गया था। प्रभारी मंत्री गोपाल भार्गव और शहर के समस्त विधायकों ने इस पर सहमति जताई और प्रस्ताव पास कर दिया। अब भोपाल से नाम बदलने की कार्रवाई की जाएगी। 

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पूर्व छात्रों ने भी उठाई थी मांग





महाकौशल कॉलेज के पूर्व छात्रों ने ओशो महोत्सव और छात्र मिलन समारोह आयोजित किया था। इसमें प्रदेश और देश के कई शहरों से छात्र हिस्सा लेने पहुंचे थे। इस समारोह में ही एक सुर में कॉलेज का नाम ओशो के नाम पर करने की मांग उठी थी। पूर्व छात्रों ने अपने संस्मरण में भी बताया कि ओशो इतने लोकप्रिय थे कि दर्शनशास्त्र के विद्यार्थियों के अलावा अन्य विषयों के छात्र भी उनकी क्लास में आकर बैठ जाते थे और ज्ञान प्राप्त करते थे। 



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