ओल्ड पेंशन स्कीम को लेकर क्यों बदल सकता है सरकार का रुख, OPS बहाल हुई तो कैसे एक स्कूल टीचर को पेंशन में होगा 22 हजार का फायदा

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Sunil Shukla
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ओल्ड पेंशन स्कीम को लेकर क्यों बदल सकता है सरकार का रुख, OPS बहाल हुई तो कैसे एक स्कूल टीचर को पेंशन में होगा 22 हजार का फायदा

BHOPAL. राज्य सरकार के करीब 6 लाख कर्मचारियों वाले मध्यप्रदेश में ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) सत्ताधारी बीजेपी के लिए गले की फांस बनती जा रही है। विधानसभा में ओपीएस के बारे में कांग्रेस के सवाल के जवाब में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा के बयान के बाद इस मुद्दे पर बीजेपी और उसके नेता दबाव में नजर आ रहे हैं। जबकि कांग्रेस ने बीजेपी को कर्मचारी विरोधी करार देते हुए विधानसभा चुनाव के बाद अपनी सरकार बनने पर ओपीएस लागू करने का वादा दोहराया है। माना जा रहा है कि जैसे-जैसे चुनाव की घड़ी पास आएगी बीजेपी पर दबाव बढ़ेगा और उसे ओपीएस के मुद्दे पर अपना रुख बदलना पड़ सकता है।





40 कर्मचारी संगठन बना रहे आंदोलन की रणनीति





सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए प्रदेश के करीब 40 कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन की रणनीति बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। ये वही संगठन हैं जिन्होंने पिछली 5 फरवरी को भोपाल में एकजुट होकर ओपीएस के लिए प्रदर्शन किया था। यदि प्रदेश में ओपीएस लागू होती है तो करीब 52 हजार रुपए मासिक सैलरी वाले प्राथमिक शिक्षक को रिटायर होने पर वर्तमान एनपीएस के फॉर्मूले के मुताबिक 7 लाख 20 हजार रुपए कैश मिलेंगे और हर महीने मिलने वाली पेंशन की राशि 2 हजार 760 रुपए होगी। इसके उलट ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) लागू होने पर प्राथमिक शिक्षक को आजीवन हर महीने 24 हजार 890 रुपए पेंशन मिलेगी।





इन 2 कारणों से दबाव में है सरकार





इसकी पहली वजह हाल ही में बीजेपी शासित कर्नाटक में कर्मचारियों के आंदोलन के बाद वहां की सरकार द्वारा ओपीएस के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) की अध्यक्षता में अध्ययन दल बनाना है। इस को दल राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार द्वारा लागू की गई ओपीएस का अध्ययन कर 30 अप्रैल तक रिपोर्ट देगा। दूसरी वजह मप्र में राज्य के कर्मचारियों की संख्या करीब 6 लाख 70 हजार हैं जो कुल मतदाताओं (5 करोड़ 36 लाख 17 हजार 266) का करीब 1.25 फीसदी है। यदि इनमें से हर कर्मचारी के परिवार में वोट देने वाले सदस्यों की औसत संख्या 4 मानी जाई तो इस लिहाज से करीब 26 लाख 89 हजार वोटर होंगे जो कि कुल वोटर का करीब 5 फीसदी हैं। जबकि पिछले विधानसभा चुनाव (2018) में बीजेपी को कांग्रेस के मुकाबले 0.13 फीसदी ज्यादा वोट मिलने के बाद भी 5 सीट मिली थीं। कांग्रेस ने 114 जबकि बीजेपी ने 109 सीट जीती थीं। प्रदेश में 4 बड़े शहरों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर के साथ संभागीय मुख्यालय और जिला मुख्यालय वाले शहरों में कर्मचारी वर्ग से जुड़े वोटर की संख्या ज्यादा होती है। अतः इस लिहाज से यह संभावना कम है कि बीजेपी कर्मचारी वर्ग से जुड़े वोटर को नाराज कर उसे आसानी से कांग्रेस के पाले में जाने देगी।





ओपीएस लागू होने पर सरकार पर कब, कैसे बोझ बढ़ेगा





प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की संख्या 6.70 लाख है। कर्मचारी संगठनों से जुड़े नेताओं के मुताबिक इसमें 4.82 लाख कर्मचारी-अधिकारी न्यू पेंशन स्कीम के दायरे में हैं, जबकि 1.88 लाख पुरानी पेंशन स्कीम में आते हैं। 1 जनवरी 2005 के बाद से लागू एनपीएस के दायरे में आने वाले कर्मचारियों में सबसे बड़ी संख्या स्कूल शिक्षा विभाग की है और इसमें शिक्षक ज्यादा हैं। इनकी संख्या 2 लाख 87 हजार है। इनके अलावा 48 हजार बाकी कर्मचारी हैं। सरकार हर महीने इनकी बेसिक सैलरी की 14 फीसदी राशि अंशदान के रूप में जमा करती है। ये सालाना करीब 344 करोड़ रुपए होती है। यदि बीजेपी सरकार राज्य में ओल्ड पेंशन स्कीम को बहाल करती है तो ऐसे स्थिति में सरकार को अभी हर साल 344 करोड़ रुपए की बचत होगी। सरकार को अभी हर महीने जो 344 करोड़ रुपए जमा करने पड़ रहे हैं, वे उसे 12 साल तक जमा नहीं करने पड़ेंगे। उस पर करीब 12 साल बाद यानी 2035-36 से आर्थिक बोझ बढ़ना शुरू होगा क्योंकि 2005 और इसके बाद से नियुक्त ज्यादातर अधिकारी 2035 के बाद से ही रिटायर होना शुरू होंगे। अनुमान के मुताबिक इससे सरकार के खजाने पर पेंशन के तौर पर सालना 500 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ आएगा।





4 राज्यों में लागू हो चुकी है OPS





कर्मचारियों में पुरानी पेंशन योजना की मांग बढ़ने के बाद देश में राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड और हिमाचल प्रदेश में ओपीएस बहाल की जा चुकी है। इनमें से ज्यादातर राज्यों में कांग्रेस की सरकारें हैं। इसके अलावा पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार भी ओपीएस लागू करने का नोटिफकेशन जारी कर चुकी है। कांग्रेस एमपी और कर्नाटक में भी अपनी सरकार बनने पर ओपीएस बहाल करने का ऐलान कर चुकी है। कर्नाटक के बाद महाराष्ट्र में भी राज्य सरकार के कर्मचारियों ने ओपीएस लागू करने को लेकर आंदोलन छेड़ दिया है। माना जा रहा है कि मप्र में ओपीएस के बारे में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा के बयान के बाद राज्य सरकार के कर्मचारी भी एकजुट होकर दबाव बढ़ाने के लिए आंदोलन शुरू कर सकते हैं। प्रदेश के करीब 40 छोड़े-बड़े कर्मचारी संगठनों ने 5 फरवरी को भोपाल में ओपीएस की बहाली के लिए बड़ा प्रदर्शन कर सरकार में विभिन्न स्तर पर ज्ञापन सौंपे थे।





क्या है ओल्ड पेंशन स्कीम ?





पुरानी पेंशन योजना यानी ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) के तहत सरकार साल 2004 से पहले अपने कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद एक निश्चित पेंशन देती थी। यह पेंशन कर्मचारी के रिटायरमेंट के समय उनके वेतन पर आधारित होती थी। इस स्कीम में रिटायर हुए कर्मचारी की मौत के बाद उनके परिजन को भी फैमिली पेंशन दी जाती थी। हालांकि, इस स्कीम को 1 अप्रैल 2004 में बंद करके इसे राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) से बदल दिया गया।





ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) के लाभ







  • ओपीएस के तहत कर्मचारियों को रिटायरमेंट के समय उनके वेतन की आधी राशि पेंशन के रूप में दी जाती है।



  • पुरानी पेंशन स्कीम में अगर रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी की मृत्यु हो जाए तो उनके परिजनों को पेंशन की राशि दी जाती है।


  • इस स्कीम में पेंशन देने के लिए कर्मचारियों के वेतन से किसी भी तरह की कटौती नहीं होती है।


  • पुरानी पेंशन स्कीम में रिटायरमेंट के समय कर्मचारियों की अंतिम बेसिक सैलरी का 50 फीसदी यानी आधी राशि तक पेंशन के रूप में दिया जाता है।


  • ओपीएस में रिटायर हुए कर्मचारी को ग्रेच्युटी के रूप में एकमुश्त राशि भी दी जाती है।






  • स्कूल शिक्षक को एनपीएस में 2760 रुपए पेंशन, OPS में मिलेगी 24,890 रुपए





    आइए अब आपको उदाहरण के साथ समझाते हैं कि राज्य सरकार के एक कर्मचारी के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) और न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) क्या मायने हैं। इन दोनों में कर्मचारी का क्या फायदा और नुकसान है। इस समझाने के लिए हमने सरकार के सबसे बड़े और सबसे ज्यादा कर्मचारियों वाले स्कूल शिक्षा विभाग के एक प्राथमिक शिक्षक और एक उच्चतर माध्यमिक शिक्षक का उदाहरण लिया है। करीब 52 हजार रुपए मासिक सैलरी वाले प्राथमिक शिक्षक को रिटायर होने पर वर्तमान एनपीएस के फॉमूले के मुताबिक 7 लाख 20 हजार रुपए कैश मिलेंगे और हर महीने मिलने वाली पेंशन की राशि 2 हजार 760 रुपए होगी। इसके उलट ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) लागू होने पर प्राथमिक शिक्षक को आजीवन हर महीने 24 हजार 890 रुपए पेंशन मिलेगी। इसके अलावा समय-समय पर महंगाई राहत (डीआर) का लाभ भी मिलेगा। यदि रिटायर होने के कुछ समय बाद मृत्यु हो जाती है तो पत्नी को आजीवन हर महीने फैमिली पेंशन (पेंशन राशि की आधी) मिलेगी जो करीब 12 हजार 500 रुपए होगी। इसे विस्तार से ऐसे समझ सकते हैं।





    उदाहरण एक : प्राथमिक शिक्षक





    कुल वेतन- 52 हजार 440 रुपए प्रति माह





    बेसिक सैलरी- 38 हजार रुपए





    डीए- 38 प्रतिशत के हिसाब से 14 हजार 400 रुपए





    ओल्ड पेंशन स्कीम में पेंशन का फॉर्मूला





    बेसिक का 50 प्रतिशत (19 हजार रुपए) + डीए 31 प्रतिशत (5 हजार 890 रुपए) = पेंशन राशि 24 हजार 890 रुपए प्रतिमाह





    न्यू पेंशन स्कीम में पेंशन का फॉर्मूला







    • पूरी सर्विस के दौरान सैलरी में 10% राशि कटेगी और इसमें 10% सरकार अपनी ओर से मिलाएगी। इस हिसाब से रिटायरमेंट तक करीब 12 लाख रूपए जमा होंगे। 



  • जमा राशि के 60% का भुगतान रिटायरमेंट पर होगा : 7 लाख 20 हजार रुपए 


  • जमा राशि की 40% राशि पेंशन देने वाली बैंक में रहेगी : 4 लाख 80 हजार रुपए 


  • बैंक अपने पास जमा राशि पर 6.9% ब्याज देगी और इसी ब्याज की राशि से पेंशन मिलेगी जो 2760 रुपए प्रति माह होगी। 


  • पेंशनधारी के निधन के बाद उसकी पत्नी या अन्य नॉमिनी को बैंक में जमा राशि (40%) एकमुश्त मिल जाएगी क्योंकि बैंक पेंशन इस राशि के ब्याज के रूप में ही दे रही थी।






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    ओल्ड पेंशन स्कीम पर क्या है केंद्र सरकार का नजरिया





    केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री भागवत कराड़ ने पिछले दिनों लोकसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में कहा था कि पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। उन्होंने यह भी दोहराया था कि राजस्थान और छत्तीसगढ़ की सरकारों ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) को फिर से शुरू करने के अपने फैसले से केंद्र सरकार, पेंशन निधि नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRA) को अवगत कराया है। राज्य सरकारों के इन प्रस्तावों के जवाब में पेंशन निधि नियामक और विकास प्राधिकरण ने संबंधित राज्यों को स्पष्ट रूप से बता दिया गया  है कि सरकार और कर्मचारी के अंशदान के रूप में जमा राशि को राज्य सरकार को लौटाने का कोई प्राविधान नहीं है। जाहिर है इस मसले का समाधान इतना आसान नहीं है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीति और गरमाएगी। राज्य और केंद्र के बीच टकराव भी सामने आ सकता है।





    ( स्टोरी इनपुट : राहुल शर्मा )



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