कोरोना के दौर में: अनाथ बेसहारा बच्चों का सहारा बनीं रेहाना, निभा रहीं है हर जिम्मेदारी

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कोरोना के दौर में: अनाथ बेसहारा बच्चों का सहारा बनीं रेहाना, निभा रहीं है हर जिम्मेदारी

मुंबई पुलिस कांस्टेबल रेहाना शेख का वेतन भले ही कम हो, लेकिन उनका दिल काफी बड़ा है। कोरोना संकट के दौर में रेहाना ने 50 गरीब-बेसहारा बच्चों का सहारा बनने का फैसला किया। उन्होंने मुंबई के स्कूल में पढ़ने वाले 50 बच्चो को गोद लिया। साथ ही 10वीं तक इन सभी बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने का भी फैसला लिया है।

बच्चों का पूरा खर्च उठाया

रेहाना के मुताबिक उन्हें बच्चों की मदद की प्रेरणा उनके एक दोस्त से मिली। उनके दोस्त ने एक स्कूल की तस्वीर दिखाई। तस्वीर में वहां पढ़ने वाले बच्चों की हालत बहुत दयनीय थी। उन्होने उन बच्चों की मदद करने का फैसला किया। कुछ दिन बाद ही रेहाना अपने दोस्त के साथ उस स्कूल के बच्चों के घर पहुंचीं और मदद का भरोसा दिलाते हुए 50 बच्चों की पढ़ाई, खाने, रहने का पूरा खर्च उठाने का वादा किया।

कमिश्नर ने किया सम्मानित

रेहाना के इस कदम की उनके विभाग के अफसर भी काफी तारीफ कर रहे हैं। मुंबई पुलिस कमिश्नर इस काम के लिए रेहाना को सर्टिफिकेट देकर सम्मानित कर चुके हैं। रेहाना ने कोरोना कर्फ्यू के दौरान पूरी निष्ठा से अपनी नौकरी करने के साथ महामारी से पीड़ित लोगों की मदद भी की। लोगो को खाना देने से लेकर अस्पताल पहुंचाने तक का इंतजाम किया है।

खेल में भी महारत हासिल

रेहाना के पिता भी मुंबई पुलिस से रिटायर हुए हैं। वह रेहाना के कार्यों की हमेशा प्रशंसा करते हैं। बेटी के मददगार स्वभाव को देखते हुए वह रेहाना को 'मदर टेरेसा' कहकर बुलाते हैं। रेहाना एथलीट और वॉलीबॉल खिलाड़ी भी हैं। उन्होंने साल 2017 में श्रीलंका में मुंबई पुलिस फोर्स का नेतृत्व किया था। इस दौरान उन्होंने फोर्स के लिए दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल भी जीता।

बेसहारों का सहारा
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