खुद की जिंदगी बदली: ट्रेन में भीख मांगती थी ट्रांसजेंडर; कैमरा खरीदा, अब फोटो जर्नलिस्ट हैं

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खुद की जिंदगी बदली: ट्रेन में भीख मांगती थी ट्रांसजेंडर; कैमरा खरीदा, अब फोटो जर्नलिस्ट हैं

जोया थॉमस लोबो एक ट्रांसजेंडर हैं, लेकिन एक समय उनकी यही सच्चाई मुसीबत बन गई थी। जब उनकी सेक्सुअलिटी जाहिर हुई तो उसके बाद उन्हें कई परेशानियों से जूझना पड़ा। भीख तक मांगनी पड़ी, जोया ने हार नहीं मानी। अपनी बचत से एक कैमरा खरीदा। आज वे फ्रीलांस फोटो जर्नलिस्ट हैं।

पिता चौकीदार थे

जोया मुंबई से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता एक सोसाइटी में चौकीदार थे। उन्होंने पांचवीं तक एक कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ाई की। वे बताती हैं कि कम उम्र में पिता की मौत हो गई। मां ने ही मुझे और मेरी बहन को पाला। पिता की मौत के बाद हमें अपना घर भी छोड़ना पड़ा। फिर मैंने एक बेकरी में नौकरी कर ली। उम्र बढ़ने के साथ मेरे शरीर में बदलाव आने लगे, लेकिन मैं किसी से भी अपनी सेक्सुअलिटी पर बात नहीं कर पाती थी। ‘जब सभी को इस बारे में पता चला तो जिंदगी कठिन हो गई। 17 साल की उम्र में मैं अपने गुरु से मिली, जिन्होंने बतौर ट्रांसजेंडर मुझे अपने समूह से मिलवाया। मुझे समुदाय की भाषा और ताली बजाना सिखाया गया। फिर मैं भी उनके साथ ट्रेनों में भीख मांगने लगी, पर मुझे कुछ और करना था। मैंने पैसे जुटाए और कैमरा खरीदकर फोटोग्राफी करने लगी। यही अब मेरी पहचान है।’

मां को चिंता रहती है

जोया के मुताबिक, मेरी मां को जब पता चला कि मैं ट्रांसजेंडर समूह में शामिल हो गई हूं, तो बहुत चिंतित हुईं कि मैं कहीं सेक्स वर्कर न बन जाऊं। मैंने उन्हें भरोसा दिया कि भीख मांग लूंगी, पर खुद को नहीं बेचूंगी। शुरुआती दिनों में उन्हें दिक्कत हुई, लेकिन बाद में उन्होंने मेरे काम को अपना लिया और साथ जाना बंद कर दिया। फिर मां की भी मौत हो गई और मैंने भी समूह के साथ जाना बंद कर दिया।

ऐसे बदली जिंदगी

जोया बताती हैं कि मैंने अपनी बचत से एक डिजिटल कैमरा खरीदा और फोटो खींचने की शुरुआत की। मैं उसकी बारीकियां सीख ही रही थी कि इसी बीच मुझे एक डाक्यूमेंटरी फिल्म में काम करने का मौका मिला। इसके लिए मुझे सम्मानित किया गया। वहीं, एक अखबार के मालिक ने मुझसे फ्रीलांस काम करने के लिए कहा, जिसने मेरी जिंदगी बदल दी। काम के दौरान ही मैंने फोटो जर्नलिज्म के बारे में सीखा। फिलहाल मैं स्वतंत्र रूप से काम कर रही हूं, जिसके एवज में मुझे पर्याप्त पैसे मिलते हैं।

जज्बा
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