News Strike: भर्ती परीक्षा को लेकर सीएम की अहम घोषणा ही भूले अफसर! कब खत्म होगा लाखों युवाओं का इंतजार?
News In Short
- सीएम की घोषणा के बावजूद अफसरों की सुस्ती से युवाओं का इंतजार बढ़ा।
- नई परीक्षा प्रणाली से युवाओं को एक ही फॉर्म और परीक्षा में कई अवसर मिलेंगे।
- नई प्रणाली के तहत 9 ही परीक्षाएं होंगी, जिससे फीस और प्रक्रिया कम होगी।
- ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली से नियमों में पारदर्शिता और प्रक्रिया में सुधार होगा।
- 29 अप्रैल को युवाओं की उम्मीदों का इम्तिहान, क्या फैसला मिलेगा?
News In Detail
सीएम साहब क्या आपको पता है आपकी एक अहम घोषणा का क्या हाल है। वो घोषणा जो प्रदेश के लाखों बच्चों से जुड़ी है। जो लाखों युवाओं के रोजगार का बड़ा कारण बन सकती है।
उस घोषणा पर अफसरों की ये कैसी लेतलाली है कि उस पर अमल नहीं हो पा रहा, जबकि घोषणा से जुड़ा पूरा मसौदा तैयार है। उस पर एग्जिक्यूशन शुरू हुआ तो न सिर्फ युवाओं को रोजगार मिलना आसान होगा। बल्कि एंट्रेंस एग्जाम की फीस का खर्च भी काफी हद तक कम हो जाएगा।
सीएम की घोषणाएं, अफसरों की फीताशाही
किसी प्रदेश का मुखिया कोई घोषणा करता है तो पूरी सरकारी मशीनरी उस घोषणा को योजना में तब्दील करने और फिर जमीन पर लाने में जुट जाती है। अगर सरकारी मशीनरी यानी कि अफसरों की फौज लाल फीताशाही में उलझी रही तो सीएम की घोषणा पुरानी होने लगती है और फिर महज जुमला बनकर सिमटने लगती है।
मध्यप्रदेश में भी सरकारी मशीनरी सीएम मोहन यादव की एक अहम घोषणा का ऐसा ही हाल कर रही है कि उसके पूरा होने का इंतजार लंबा खिंचता नजर आ रहा है और खामियाजा भुगत रहे हैं प्रदेश के ऐसे हजारों युवा जो हर साल सरकारी नौकरी की आस में परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। उसके बाद एक एक कर फॉर्म भरते हैं।
उन फॉर्मस को जमा करने के लिए लगने वाली फीस अदा करते हैं और उसके बाद जहां भी परीक्षा केंद्र मिलता है वहां जाकर परीक्षाएं देते हैं। इसके बाद सिलेक्शन हो या न हो। उनकी किस्मत।
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एक परीक्षा, लाखों उम्मीदें: सीएम की नई योजना
युवाओं की इन मुश्किलों को कम करने के लिए ही सीएम मोहन यादव ने घोषणा की थी। वन नेशन वन इलेक्शन की तर्ज पर प्रदेश में एक ही एंट्रेंस एग्जाम कराने की तैयारी है। इसे और बेहतर समझना है तो संघ लोकसेवा आयोग यानी कि यूपीएससी के उदाहरण से समझा जा सकता है।
जिस तरह यूपीएससी की एक परीक्षा होती है और उससे अलग अलग किस्म के पद भरे जाते हैं। उसी तरह प्रदेश में भी पीएससी और मप्र कर्मचारी चयन मंडल की एक ही परीक्षा कराने का प्रस्ताव है। सामान्य प्रशासन विभाग जिसे हम जीएडी भी कहते हैं। ये विभाग इन परीक्षाओं के लिए एक ड्राफ्ट भी तैयार कर चुका है।
युवाओं के लिए नई परीक्षा व्यवस्था
हम आपको उस ड्राफ्ट की कुछ मोटी-मोटी बातें बता देते हैं। जिससे आप ये समझ पाएंगे कि किस तरह रोजगार की उम्मीद लगाए बैठे युवाओं की मुश्किलों को आसान करने की कोशिश जारी है।
मप्र में मप्र लोकसेवा आयोग और कर्मचारी चयन मंडल की परीक्षाओं के जरिए सरकारी पद भरे जाते हैं। इसके लिए हर साल आयोग 20 से 22 परीक्षाएं आयोजित करवाता है और करीब 30 परीक्षाएं कर्मचारी चयन मंडल करवाता है, लेकिन नया सिस्टम लागू होने के बाद दोनों मिलाकर नौ परीक्षाएं ही करवाएंगे। जिसमें से 5 एग्जाम एमपीपीएससी करवाएगा और चार परीक्षाएं ईएसबी करवाएगा।
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नया सिस्टम: एक परीक्षा, एक फॉर्म
अब ये समझिए कि किस इस नए पैटर्न की जरूरत क्यों पड़ी। हर सरकारी विभाग में भर्ती के नियम अलग-अलग हैं। हर बार परीक्षा कराने के लिए आयोग और मंडल अलग-अलग विज्ञापन जारी करता है। फिर फॉर्म निकलते और जमा होते हैं। इस तरह पूरी प्रक्रिया आगे बढ़ती है। हर बार कैंडिडेट्स नए विज्ञापनों का इंतजार करते हैं।
फिर परीक्षा के फॉर्म भरते हैं। जिसके लिए उन्हें फीस भी अदा करनी होती है, लेकिन यूपीएससी की तर्ज पर परीक्षा होने पर उन्हें एक ही बार फॉर्म भरना होगा। एक ही बार परीक्षा देनी होगी। इसके बाद उनकी मेरिट के आधार पर उन्हें नौकरी मिलती जाएगी। जैसे मार्क्स होंगे। उसके आधार पर उन्हें पद मिलेगा। जो वेटिंग लिस्ट में होंगे। उन्हें सरकारी पद होने पर नौकरी मिलेगी।
एक परीक्षा, एक रैंक, कई अवसर
नए परीक्षा पेटर्सन के तहत नौ ही कैटेगरी में परीक्षा होगी। सालाना कैलेंडर भी इन्हीं परीक्षाओं के आधार पर तय होगा। सारे विभागों की पोस्ट के नाम तय होंगे और पे स्केल भी तय होगी।
कैंडिडेट की रैंक और फॉर्म में भरे गए उसके प्रिफरेंस के आधार पर उसे पद मिलेगा। मेरिट लिस्ट भी एक ही बार तैयार होंगी और वेटिंग लिस्ट भी साथ ही बनेगी। ताकि कैंडिडेट को क्लियर रहे कि उसे क्या मौका मिल रहा है या आगे मिल सकता है।
इस तरह जब भी परीक्षा होंगी कैंडिडेट को च्वाइस फिलिंग का मौका मिलेगा। अब मान लीजिए आप दो पदों को चुनते हैं तो रिजल्ट के बाद आपको तय करना होगा कि आप कौन सा पद चुनेंगे। उसके बाद बचा हुआ पद वेटिंग लिस्ट के कैंडिडेट की झोली में चला जाएगा।
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ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली
इस तरह की ज्वाइंट एग्जाम की पूरी प्रोसेस ऑनलाइन ही होगी। यानी आवेदन, रूल्स, रिजल्ट और मेरिट लिस्ट सबको नजर आएगी। बार-बार नियम जानने का झंझट भी खत्म होगा। क्योंकि हर परीक्षा के रूल्स भी एक ही जैसे होंगे। इससे ट्रांसपिरेंसी भी बनी रहेगी।
हालांकि, ऐसी परीक्षा कंडक्ट कराना आयोग और बोर्ड दोनों के लिए काफी चैलेंजिंग है। क्योंकि एक ही बार ज्यादा कैंडिडेट और पदों पर परीक्षा कराने के लिए ढेर सारे इंतजाम करने होंगे। एग्जाम सेंटर्स की संख्या बढ़ेगी। उन सेंटर्स पर तैनात होने वाले इंविजिलेटर की संख्या भी ज्यादा होगी। यानी जितने सेंटर्स उतनी मैन पावर।
लेकिन जब मामला बच्चों के भविष्य से जुड़ा हुआ हो रोजगार से जुड़ा हुआ हो तब क्या इन परेशानियों की फिक्र की जानी चाहिए। खासतौर से तब जब प्रदेश के मुखिया की ही ये मंशा है कि नौकरी के लिए तैयारी कर रहे युवाओं को नौकरी के लिए ज्यादा परेशान नहीं होना चाहिए। तब इसे लागू करने में क्यों देर हो रही है।
क्या अफसरों की इच्छा शक्ति एक परीक्षा प्रक्रिया को लागू करने में कमजोर साबित हो रही है। अब तो प्रदेश के मुख्य सचिव का रिटायरमेंट भी करीब है। सामान्य प्रशासन विभाग के ही अधिकारी कितनी बार बदल चुके हैं, लेकिन इस ज्वाइंट एग्जाम पर कोई पुख्ता कदम नहीं उठाया गया है।
परीक्षाओं की तारीखों में बदलाव
हाल ही में कर्मचारी चयन आयोग की एक परीक्षा की तारीख बदली है। सूबेदार और एसआई के पद पर भर्ती के लिए परीक्षा 9 अप्रैल को तय थी, लेकिन अब ये परीक्षा 26 अप्रैल को होगी। ये पहला मामला नहीं है जब ऐसा हुआ है। 12 परीक्षाओं में से तीन भर्ती परीक्षाओं की तारीख बदल चुकी है और आठ ऐसी हैं जिनकी अब तक तारीख तय नहीं है।
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युवाओं की उम्मीदें और अधिकारी की चुप्प
जरा सोचिए इन परीक्षाओं में शामिल होने वाले युवाओं का क्या हाल होगा। वो किस कंफ्यूजन के दौर से गुजर रहे होंगे। कभी झुंझलाकर पैन पटक रहे होंगे तो कभी किताबों से माथा फोड़ रहे होंगे। हर साल लाखों कैंडिडेट इन परीक्षाओं के होने का इंतजार करते हैं और उसके बाद उसके रिजल्ट का इंतजार करते हैं। क्या उनकी कशमकश को आप समझ सकते हैं। सीएम तो समझने की कोशिश की है।
अब उम्मीद उन अधिकारियों से है जिनकी वजह से फैसला रुका हुआ है क्या सीएम को अब अपने अधिकारियों से सवाल करने होंगे। तब कहीं जाकर वो ये सुध लेंगे कि परीक्षार्थियों को उनका वाजिब हक मिल सके और वो बिना किसी परेशानी के परीक्षाओं में शामिल हो सके।
29 अप्रैल: युवाओं के सब्र का इम्तिहान
इस मुद्दे पर बैठक अब आने वाली 29 अप्रैल को होनी है। जब युवाओं ने इतना इंतजार किया है तो चार दिन और सब्र कर लेंगे। क्या हम ये उम्मीद कर सकते हैं कि इस 29 अप्रैल को उन्हें अपने सब्र का भरपूर फल मिलेगा। News Strike | न्यूज स्ट्राइक