News Strike: परिसीमन के बाद कितनी होंगी मप्र की लोकसभा सीटें, 2028 के चुनाव में लागू होगी नई सीट संख्या? समझिए विस्तार से
Harish Divekar | Apr 18, 2026, 07:00 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. परिसीमन और महिला आरक्षण पर चल रही बहस में मध्यप्रदेश की सीटों में बदलाव की संभावना है। क्या 2028 के चुनाव परिसीमन के हिसाब से होंगे? जानें विस्तार से।
News In Short
- परिसीमन से मध्यप्रदेश की लोकसभा सीटें 40-45 हो सकती हैं।
- 2001 के बाद परिसीमन में सीटों की संख्या नहीं बढ़ी थी।
- 2011 के बाद जनगणना नहीं हुई, विपक्ष ने परिसीमन की मांग की।
- विधानसभा सीटों का दायरा बढ़कर 230 से 280 हो सकता है।
- केंद्र सरकार ने जनगणना के आधार पर परिसीमन करने का प्रस्ताव दिया।
News In Detail
ऐसे बहुत से सवाल होंगे जिनके जवाब आप खोज रहे होंगे या जानना चाहते होंगे। लेकिन कंफ्यूजन बरकरार है पर आपके ऐसे हर सवाल का जवाब हम लेकर आए हैं। बिलकुल सीधे और स्पष्ट शब्दों में।
पिछले दो दिनों से विशेष सत्र के नाम पर संसद में जो बहस चल रही है हम उसे बहुत आसान तरीके से आपको समझाते हैं। और ये भी बताते हैं कि मध्यप्रदेश पर इसका क्या असर पड़ेगा।
परिसीमन: चुनावों का नया दांव
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जनसंख्या से तय होगा परिसीमन
बल्कि जनसंख्या के आधार पर सीमाओं का निर्धारण होता है। और सिर्फ इसलिए इस शब्द का उपयोग लोकसभा सीट और विधानसभा सीटों का दायरा तय करने के लिए किया जाता है।
मोटे तौर पर हम ये कह सके हैं कि कितने लोगों पर सांसद या विधायक की जरूरत है या क्षेत्र में बांटने की जरूरत है। इसका फैसला परिसीमन से ही होता है। इसके बाद ही ये देखा जाता है कि किसी क्षेत्र में किस तबके के वोटर्स ज्यादा हैं। उसके हिसाब से आरक्षण की बात आगे बढ़ती है।
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परिसीमन से सीटों का नया गणित
परिसीमन के लिए एक नियम ये भी है कि ये ताजी जनगणना के आधार पर होना चाहिए, लेकिन 2011 के बाद से जनगणना नहीं हुई है। विपक्षी दल पहले जनगणना के बाद ही परिसीमन की मांग पर अड़े हैं।
केंद्र सरकार के नए मसौदे के मुताबिक संसद की सीटें 545 से बढ़ कर 850 हो जाएंगी। जिसमें राज्यों की सीटें 815 होंगी और 35 सीटें केंद्र शासित राज्यों की होंगी। जो फिलहाल बीस ही हैं।
जीत के जादुई आंकड़े पर भी इसका असर पड़ेगा। अभी किसी भी पार्टी को केंद्र में सरकार बनाने के लिए 272 सीटों की जरूरत होती है। अब 426 सीटें जीतने के बाद ही कोई भी पार्टी सरकार बना पाएगी।
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मध्यप्रदेश में परिसीमन का असर
इससे पहले मध्यप्रदेश में परिसीमन 1976 में हुआ था। उसके बाद से अब तक जनसंख्या कितनी बदली होगी ये आप अंदाजा लगा ही सकते हैं। उस समय प्रदेश में 37 लोकसभा सीटें थीं।
ये आंकड़ा मौजूदा सीटों से ज्यादा इसलिए है क्योंकि तब मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ का विभाजन नहीं हुआ था। विभाजन के बाद दोनों प्रदेशों की लोकसभा सीटों में ज्यादा फर्क नहीं आया था जितनी लोकसभा सीटें छत्तीसगढ़ अंचल में थीं। वो राज्य बनने के बाद उसके खाते में ही चली गईं थीं।
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विधानसभा चुनाव पर कितना असर
अब एक सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या आने वाले चुनाव नए परिसीमन के बाद होंगे या नहीं। इसी पॉइंट पर सारा चुनावी रायता बिखरा हुआ है। क्योंकि ये बहुत पेंचिंदा मामला हो चुका है। नियम ये कहते हैं कि जनगणना के बाद ही परिसीमन की प्रक्रिया होगी।
अब केंद्र का कहना है कि 2011 की जनगणना के आधार पर ही परिसीमन हो जाना चाहिए। लेकिन विपक्ष जनगणना की मांग पर अड़ा हुआ है। किस जनगणना के आधार पर परिसीमन होगा ये तय करने की जिम्मेदारी भी संसद की ही होगी।
फिलहाल हम ये मान सकते हैं कि बिल पर फैसले के बाद संसद में फिर चर्चा होगी। ताकि वो इस नतीजे पर पहुंच सके कि आगे क्या करना है, लेकिन इससे पहले मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ये ऐलान कर चुके हैं कि प्रदेश में आने वाले चुनाव परिसीमन के बाद ही होंगे।
परिसीमन... चुनावों की नई राह
अगर यही पहली शर्त बना तो किसी भी सूरत में 2028 और 2029 तक जनगणना का काम पूरा होना आसान नहीं है। ऐसे में आने वाले चुनाव परिसीमन के अनुसार करवाना मुश्किल ही है।
संसद के विशेष सत्र का अंत और अंजाम ये तय करेगा कि क्या परिसीमन में जनगणना की शर्त पर संशोधन हो सकेगा। अगर ऐसा हुआ तो समझिए कि देश की राजनीति एक नई दिशा में जाती हुई नजर आएगी।
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