News Strike: भोपाल, जबलपुर सहित बदलेंगे इन शहरों के नाम, पुरानी पहचान लौटाने की कवायद या महज राजनीति ?

Harish Divekar | Apr 15, 2026, 23:53 IST
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News Strike
Photograph: (the sootr)

भोपाल और जबलपुर सहित कई शहरों के नाम बदलने की चर्चा चल रही है। क्या यह एक राजनीति है या पुरानी ऐतिहासिक पहचान को लौटाने का कदम? पढ़ें इस मुद्दे पर इसबार का News Strike।

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भोपाल का नाम बदलने वाला है। जबलपुर भी अब इस नाम से नहीं जाना जाएगा....
एक नाम को लेकर कितने यादगार कोट्स रचे गए हैं। शेक्सपीयर ने कहा नाम में क्या रखा है तो लताजी ने गा दिया नाम गुम जाएगा. तो शाहरुख ने पूछ डाला नाम तो सुना होगा। कहने का मतलब ये कि नाम सिर्फ एक लफ्ज नहीं है। ये पहचान भी है और इतिहास भी है। इसलिए तो नाम बदलने की राजनीति भी बड़ा रंग लाती है। अब भोपाल और जबलपुर भी इसी फेहरिस्त में शामिल होने वाले है।

मैं आपसे पूछता हूं क्या आप भी चाहते हैं प्रदेश के इन दो ऐतिहासिक शहरों के नाम बदले जाएं। ये नाम इन शहरों की पहचान हैं इन शहरों का इतिहास हैं। लेकिन इसमें भी कोई दो राय नहीं है कि कई बार नाम बदलने से वो लोग वो इतिहास भी जान पाते हैं जो पुराने पन्नों में गुम हो चुका होता है। इसलिए नाम को लेकर सबकी अपनी अलग अलग राय हो सकती है, लेकिन इतिहास को जानना और समझना भी बेहद जरूरी होता है। पहले मैं आपको ये बता दूं कि आज मैं आपसे शहरों के नाम पर बात क्यों कर रहा हूं। असल में सिर्फ शहर ही नहीं मैं आपसे मोहल्लों के नाम पर भी बात करूंगा।

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14 शहर और 42 मोहल्लों के नाम बदलने की चर्चा

प्रदेश के राजनीतिक से लेकर सामाजिक हलकों में कुछ शहरों और मोहल्लों के नाम बदलने की चर्चा जोरों पर हैं। इस चर्चा में 14 शहर और करीब 42 मोहल्ले शामिल हैं। प्रदेश कांग्रेस नेता भूपेंद्र गुप्ता ने खुद सीएम बनकर कुछ मोहल्लों के नाम बदलने की मांग की है। इन मोहल्लों में लोहारपुरा, सुनारपुरा, कायस्थपुरा, लखेरापुरा, दांगी मोहल्ला, इस्लाम मोहल्ला, कसाईपुरा और ब्राह्मणपुरा जैसे नाम शामिल हैं। गुप्ता का तर्क है कि ये सारे नाम जातिसूचक हैं. इसलिए इन्हें बदला जाना चाहिए। इसके अलावा भोपाल और रीवा की एक तहसील के नाम पर भी आपत्ति है। ये नाम है हुजूर तहसील, भोपाल और रीवा दोनों ही जगह इस नाम की तहसील है। जबकि भोपाल में हुजूर नाम की कोई जगह नहीं है. इस नाम को बार बार गुलामी की मानसिकता बताया जाता रहा है।

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भोपाल का इतिहास बताती राजा भोज की प्रतिमा

ये तो छोटी-छोटी जगहों के नाम में बदलाव की बात है। भोपाल का नाम और जबलपुर का नाम क्यों बदला जाना चाहिए। अब इस पर बात करते हैं। भोपाल का असल इतिहास समझना है तो आप एक बार बड़े तालाब के किनारे से गुजरने वाली वीआईपी रोड का सफर तय करके आइए। सीना तानकर खड़ी एक विशाल प्रतिमा आपको खुद ही इस शहर की पहचान बता देगी। कई फीट लंबी ये प्रतिमा राजा भोज की प्रतिमा है। कहा जाता है कि उन्हीं के नाम पर भोपाल का नाम पड़ा। हो सकता है कि कभी ये नाम भोजपाल ही रहा हो, लेकिन बदलते-बदलते इसे भोपाल कर दिया गया। वैसे भोपाल के इतिहास से जुड़ी कई अलग-अलग कहानियां सुनने को मिलती हैं।

🔴News Strike | बदलेंगे इन शहरों के नाम, पुरानी पहचान लौटाने की कवायद या महज राजनीति ?

कभी भोपाल का नाम भूपाल भी था

एक कहानी कहती है कि भोपाल का नाम पहले भूपाल था। इस नाम के अनुसार शहर की स्थापना करने वाले राजा का नाम भूपाल शाह ही बताया जाता है। इसकी ज्यादा गहराइयों में जाएं तो तर्क मिलता है कि भू यानी कि भूमि और पाल यानी कि उस जमीन का रक्षक। मध्यप्रदेश के कुछ सरकारी रिकॉर्ड्स में भोपाल का नाम पहले भोजपाल दर्ज होने का दावा भी किया जाता है। जो परमार शासक राजा भोज के नाम पर पड़ा था। भोपाल जैसे शहर में बड़े और छोटे तालाब बनाने की सौगात देने का क्रेडिट भी राजा भोज को ही दिया दिया जाता है।

उनके राज करने की टाइनलाइन दसवीं शताब्दी बताई जाती है। कहा जाता है कि राजा भोज एक महान और विद्वान शासक थे और एक शूरवीर योद्धा भी। उन्हीं के बाजुओं की ताकत ने भोपाल को ताल और तलैया की नगरी बनाया। इसलिए बड़ा ताल सबसे बड़े मानव निर्मित यानी कि मैन मैड तालाबों में से एक माना जाता है।

इसके बाद भोपाल पर गौंड शासकों, निजाम शाह जैसे शासकों का भी राज रहा। और फिर लंबे अरसे तक भोपाल बगमों के साये में फलता फूलता रहा। राजधानी में बने कई महल और इमारतें आज भी बेगमों के दौर की यादें ताजा करती हैं। लेकिन असल इतिहास भूपाल या भोजपाल से ही जुड़ता है। यही वजह है कि भोपाल के पुराने इतिहास को जिंदा करने के लिए उसे भोजपाल करने की सलाह दी जाती रही है।

जबलपुर का इतिहास जाबाली नाम के संत से जुड़ा

जबलपुर का बुलंद इतिहास जाबाली नाम के संत से जुड़ा है। कहा जाता है कि एक समय में जबलपुर कई महाऋषियों की तपोभूमि था। भेड़ाघाट का पूरा क्षेत्र महर्षि भृगु का क्षेत्र ही माना जाता था। उसके बाद जमदग्नि और भगवान परशुराम भी इस क्षेत्र में तपस्या करते रहे। ऋषियों का प्रताप देखते हुए जबलपुर को पहले जबलपुरम ही कहे जाने की किंवदंतियां मौजूद है। निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरी कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ये बता चुके हैं कि वाल्मिकी रामायण में जाबालि का जिक्र मिलता है। जो भेड़ाघाट के आसपास ही तप किया करते थे। लेकिन बाद में ये नाम जबलपुर के रूप में सरकारी दस्तावेजों में दर्ज हुआ। अब दोबारा जबलपुर को जबलपुरम करने की मांग उठ रही है।

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किसी शहर का नाम बदलना इतना भी आसान नहीं

पर ये भी समझने वाली बात है कि क्या किसी शहर के नाम को बदलना इतना आसान है। नाम बदलने की ये प्रक्रिया काफी लंबी और कॉम्पलेक्स होती है। इसके लिए सबसे पहले किसी भी स्थानीय निकाय को प्रस्ताव भेजा जाता है। वहां से प्रस्ताव पास होने के बाद जिला प्रशासन उस पर एक्शन लेता है। फिर राज्य सरकार और फिर केंद्र सरकार के पास ये प्रस्ताव जाता है। कई बार गृह मंत्रालय की मंजूरी मिलने और फिर गजट नोटिफिकेशन तक में काफी समय लगता है। पर इस प्रक्रिया में कितनी तेजी आएगी ये सरकारी इच्छाशक्ति पर निर्भर करता है।

अगर सरकार मन बना ले तो ये नाम बहुत जल्दी बदले जा सकते हैं। भोपाल और जबलपुर के साथ साथ कटनी, शमशाबाद और विदिशा के नाम बदलने के भी प्रस्ताव हैं। क्या आप जानते हैं कि पहले ये शहर किन नामों से जाने जाते थे। अगर हां तो कमेंट करके जरूर बताइए। और ये भी कि क्या आप चाहते हैं कि शहरों को दोबारा वही एतिहासिक पहचान मिले।

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