News Strike: पंचायत अध्यक्ष को मंच पर जगह, इस पहल से क्या साधेंगे पटवारी?

Harish Divekar | Mar 17, 2026, 07:00 IST
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Photograph: (THESOOTR)

BHOPAL. जीतू पटवारी ने कांग्रेस की ताकत को मजबूत करने के लिए पंचायत अध्यक्षों को मंच पर जगह देने की पहल की। इस कदम से पार्टी को माइक्रोलेवल पर सशक्त करने की उम्मीद है।

News In Short

जीतू पटवारी ने पंचायत अध्यक्षों को मंच पर जगह दी।
इस पहल से कांग्रेस का नेटवर्क मजबूत होगा।
पटवारी की रणनीति माइक्रोलेवल तक कांग्रेस को सशक्त करने की है।
बीजेपी की कार्यकर्ता फौज को चुनौती देने का प्रयास हो रहा है।
क्या पटवारी अकेले यह मिशन पूरा कर पाएंगे, यह सवाल बना हुआ है।

News In Detail

News Strike न्यूज स्ट्राइक: मंच की राजनीति से कांग्रेस ने मध्यप्रदेश में अपनी तकदीर बदलने का रास्ता खोज निकाला है। आपने अक्सर ऐसे किस्से तो सुने ही होंगे कि मंच पर जगह न मिलने से फलां नेता नाराज।

मंच पर किस नेता को कहां बिठाया गया है वो अक्सर उनके ओहदे और दबदबे से तय होता है। कुछ दिन पहले दिग्विजय सिंह ने भी ऐलान किया था कि वो मंच पर नहीं बैठेंगे। कहने का मतलब ये है कि सियासी दुनिया में मंच कितनी अहम भूमिका निभाता है।

ये वही नेता बता सकता है जिसे मंच पर जगह या सही जगह न मिली हो। अब कांग्रेस इसी राजनीति के जरिए अपनी पैठ मजबूत करने जा रही है या यूं कहें कि इसके जरिए बीजेपी की माइक्रोलेवल व्यू को भेदने की कोशिश कर रही है।

जीतू पटवारी की राजनीतिक कसावट से हलचल

मंच की इस राजनीति का आइडिया नया तो नहीं है, लेकिन इसे एक नए तरीके से रीइंवेंट किया है कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने। मध्यप्रदेश की राजनीति की और खासतौर से कांग्रेसी सियासत की ऊपरी सतह इतनी खामोश है कि लगता है जैसे कोई काम हो ही नहीं रहा। कहीं कोई हलचल कभी कभार ही सुनाई देती है। पर जीतू पटवारी के एक वायरल वीडियो और एक ट्वीट से ये साबित हुआ है कि वो अपने स्तर पर संगठन को कसने का काम कर रहे हैं।

आमतौर पर कांग्रेस के बारे में ये प्रचलित है कि कांग्रेस में गुटबाजी है। कलह है... सब कुछ है। इसमें कोई दो राय नहीं। पर कुछ न कुछ कोशिशें भी जारी हैं। इसका अंजाम क्या होगा ये फिलहाल तो नहीं कहा जा सकता, लेकिन पिछले कुछ समय के सोशल मीडिया थ्रेड को फॉलो करें तो ये साबित हो जाता है कि जीतू पटवारी एक सिस्टमैटिक प्लानिंग पर तो निकल ही चुके हैं।

जीतू पटवारी के ताजे सोशल मीडिया पोस्ट से लेकर बीते एक साल तक के थ्रेड्स को फॉलो करेंगे तो आप समझ जाएंगे कि वो किस तरह निचले लेवल तक कांग्रेस में कसावट लाने पर काम कर रहे हैं।

शुरुआत नए ताजे ट्वीट से करते हैं। जिसे पोस्ट किया है खुद जीतू पटवारी ने।

इस ट्वीट में आप देख सकते हैं जीतू पटवारी एक मंच पर मौजूद हैं। पहले वो मंच पर मौजूद सभी लोगों को नीचे उतारते हैं। कुछ फ्रेम्स बाद आपको मंच वापस खचाखच भरा नजर आएगा।

जीतू पटवारी क्षेत्रीय बोली में कार्यकर्ताओं की ताकत का बखान कर रहे हैं और उनसे कांग्रेस को मजबूत करने की बात कर रहे हैं। उन्होंने कैप्शन में भी लिखा है कि अब ग्राम पंचायत अध्यक्ष भी मंच पर बैठेंगे और यही साथी 2028 में कांग्रेस की सरकार भी बनाएंगे।

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जीतू पटवारी की पार्टी मजबूत करने नई पहल?

जीतू पटवारी के इस पोस्ट के आप क्या मायने निकालते हैं। कुछ ट्विटर यूजर ने जीतू पटवारी की इस पहल पर रिप्लाई करते हुए इसे ग्राउंड पर पार्टी को मजबूत करने की बात कही है। हालांकि, कुछ यूजर्स आलोचना करते हुए भी दिख रहे हैं।

आप इस बारे में क्या सोचते हैं क्या कांग्रेस वाकई मंच की इस राजनीति से प्रदेश में मजबूत हो पाएगी। कमेंट सेक्शन में आप हमें बता सकते हैं। फिलहाल इस पहल पर आगे बात करते हैं।

किसी विधानसभा सीट पर कोई कार्यक्रम होता है तो उस जगह का जनप्रतिनिधि कार्यक्रम का हिस्सा बनता है। ये तो हुई सरकारी प्रोटोकॉल की बात।

कार्यक्रम जब किसी राजनीतिक दल का होता है तब उस दल के बड़े नेता ही मंच पर नजर आते हैं जिसमें स्थानीय विधायक हो सकते हैं। पार्टी के बड़े ओहदेदार हो सकते हैं।

कई मामलों में कोई ऐसा व्यक्ति हो सकता है जो उस क्षेत्र में पार्टी का झंडा बुलंद करता हो या टिकट का प्रबल दावेदार हो सकता हो, लेकिन बहुत निचले लेवल तक जाकर किसी नेता को मंच पर बुलाने की परंपरा कम ही दिखाई देती है।

इस पोस्ट को अगर हम डिकोड करें तो लग रहा है कि जीतू पटवारी अब कार्यकर्ता सम्मेलन या गांव लेवल पर होने वाले कार्यक्रमों में कांग्रेस समर्थित पंचायत अध्यक्ष को भी मंच पर जगह देने की पहल कर रहे हैं। उन्हें इस पहल के जरिए पार्टी को माइक्रोलेवल पर मजबूत करने का रास्ता मिल गया है।
पर ये भी बता दें कि इसी पोस्ट में कुछ लोगों ने ये भी चेताया है कि कांग्रेस समर्थित दिखने वाले पंचायत अध्यक्ष आरएसएस से जुड़े हैं।

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कांग्रेस को मजबूत करने की जीतू की रणनीति

तो जीतू पटवारी ने भी इन नई रणनीति पर काम करने से पहले ऐसे रिस्क को तोलमोल लिया है। इसके अलावा कांग्रेस ने संभवतः पंचायत स्तर पर भी अध्यक्षों का ऐलान किया है जिस तरह जिला अध्यक्ष होते हैं या ब्लॉक अध्यक्ष होते हैं उसी तरह पंचायत अध्यक्ष भी बनाए गए हैं।

जीतू पटवारी इस मिशन में आज से नहीं लगे हैं। उनका ये पोस्ट बेशक अभी का है, लेकिन ग्रास रूट लेवल तक यानी कि गांव के लेवल तक जाकर उनकी प्लानिंग करीब एक साल पहले से ही शुरू हो गई थी। अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने अपनी टीम हो सकता है लेट बनाई हो, लेकिन गांव-गांव जाकर मजबूती लगाने की प्लानिंग काफी पहले शुरू कर दी थी।

करीब एक साल पहले से वो हर पंचायत लेवल पर कांग्रेस की टीम बनाने की शुरुआत कर चुके हैं। हर पंचायत पर उन्होंने 11 सदस्यों का दल बनाना शुरू कर दिया था।

पंचायत लेवल पर अध्यक्ष तैनात करने के बाद कांग्रेस पंचायत के वॉर्डों में भी छोटी-छोटी टीमें बनाने की शुरूआत कर चुकी है। जीतू पटवारी ने ये भी साफ कर दिया है कि जिस सीट पर कांग्रेस कमजोर है। उस सीट पर ज्यादा मजबूत टीम बनाने की कोशिश होगी।

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बीजेपी की रणनीति: कार्यकर्ताओं की फौज तैयार करना

वैसे इतनी गहराई तक उतर कर प्लानिंग करने में बीजेपी का कोई जवाब नहीं रहा है। बीजेपी ने निचले स्तर तक कार्यकर्ताओं का तगड़ा जाल बुनने में बहुत मेहनत की है।

खुद अमित शाह भी दौरे पर आते हैं तो कार्यकर्ताओं से जरूर मुलाकात करते हैं। पन्ना प्रमुख से लेकर बूथ प्रमुख तक के लेवल पर जाकर बीजेपी कार्यकर्ताओं की फौज तैयार करती है। जिन्हें रेगुलर रूप से ट्रेनिंग दी जाती है और तवज्जो भी।

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जीतू पटवारी अकेले कर पाएंगे कांग्रेस को मजबूत?

क्या जीतू पटवारी सिर्फ मंच पर बिठाकर अपने नेटवर्क को उतना ही मजबूत बना पाएंगे। इस सवाल का जवाब कांग्रेस को या पटवारी को जरूर तलाशना चाहिए।

ये भी सवाल है कि क्या पटवारी अकेले इस मिशन पर निकले हैं या पार्टी के दूसरे नेता भी उनके साथ इस मिशन में लगे हुए हैं। अगर पटवारी अकेले हैं तो कांग्रेस को ही खुद सोचना चाहिए कि अकेला चना या भाड़ फोड़ पाएगा।


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