/sootr/media/media_files/2026/03/03/news-strike-49-2026-03-03-19-03-06.jpeg)
Photograph: (thesootr)
News In Short
कैलाश विजयवर्गीय और अमित शाह के बीच बंद कमरे में बैठक हुई।
विजयवर्गीय को पश्चिम बंगाल में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।
पश्चिम बंगाल में बीजेपी को विजयवर्गीय से उम्मीदें हैं।
विजयवर्गीय की रणनीति ने बंगाल में बीजेपी की सीटें बढ़ाई।
मध्यप्रदेश में विधानसभा सत्र के बाद, विजयवर्गीय को बंगाल भेजने की संभावना।
News In Detail
NEWS STRIKE | न्यूज स्ट्राइक: अमित शाह और कैलाश विजयवर्गीय की मीटिंग के बाद अब आगे क्या होगा। दोनों की एक बंद कमरे में बैठक हुई। इसके बाद कैलाश विजयवर्गीय इंदौर लौट आए। फिलहाल इस बैठक के बाद दिल्ली से लेकर भोपाल तक सन्नाटा पसरा है।
हम और आप जैसे लोग जो राजनीति में दिलचस्पी रखते हैं, सिर्फ वही ये जानने को उत्सुक नहीं है। खुद बीजेपी के लोग भी ये जानना चाहते हैं कि दोनों के बीच क्या बातचीत हुई। क्या पार्टी कैलाश विजयवर्गीय को लेकर कोई बड़ा फैसला ले सकती है या कोई और बड़ी जिम्मेदारी उन्हें सौंप सकती है।
दिल्ली बैठकों से बढ़ी सियासी हलचल
मध्यप्रदेश की राजनीति में बीते कुछ महीनों से काफी कुछ घट रहा है। कैबिनेट की बैठक हो या फिर विधानसभा का सत्र हो। इस बार जो नेता सुर्खियों में सबसे ज्यादा रहे वो हैं कैलाश विजवर्गीय। जो इस समय बीजेपी कैबिनेट के सीनियर मोस्ट नेताओं में से एक हैं।
कैलाश विजयवर्गीय हाल ही में दिल्ली से लौटे हैं। गृहमंत्री अमित शाह के साथ उनकी खास मुलाकात हुई। मंत्री प्रहलाद पटेल से भी विजयवर्गीय ने अलग से मुलाकात की है। जिस समय शाह के साथ ये बैठक चल रही थी उसी दरमियान प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और सीएम मोहन यादव की मुलाकात पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन से हुई है।
दोनों बैठकों में इतना अंतर था कि शाह ने अलग-अलग और एक-एक कर मुलाकात की. लेकिन नितिन नबीन ने एक साथ मीटिंग की है। शाह की वन टू वन बैठक की वजह से ही अंदर की बात पुरजोर तरीके से बाहर नहीं आ सकी है, लेकिन अटकलों का बाजार गर्म है।
ये खबर भी पढ़े...
कैलाश विजयवर्गीय की बयानबाजी बनी अड़चन
वैसे तो प्रहलाद पटेल के तेवर भी अक्सर कैबिनेट की बैठकों में तल्ख हो रहे हैं। लेकिन कैलाश विजयवर्गीय थोड़े ज्यादा मुखर बताए जा रहे हैं। इसकी कई वजह है वो कुछ फैसलों पर अपनी सरकार के साथ हम कदम नहीं हो पा रहे हैं और भागीरथपुरा का दूषित पानी कांड है। जिसकी वजह से कई बार वो अपनी नाराजगी को छुपा नहीं सके।
कभी पत्रकारों पर उनका गुस्सा फूटा तो कभी विधानसभा में वो ऐसे बयान दे गए कि उन्हें विपक्ष की नाराजगी का भी सामना करना पड़ा। खासतौर से नेता विपक्ष को औकात में रहने की सलाह देने पर कांग्रेस ने उन्हें घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसके बाद कैलाश विजयवर्गीय पर सदन में गलत जानकारी देने के आरोप भी लगे।
कैलाश विजयवर्गीय ने इस गंभीर गलती पर अपने विभाग के अफसरों पर साजिश का आरोप भी लगाया। इन सारे घटनाक्रमों के बाद बैठक हुई तो उस ने लोगों का एक्साइटमेंट बढ़ा दिया है।
ये खबर भी पढ़े...
पश्चिम बंगाल के लिए विजयवर्गीय से बेहतर कौन?
हालांकि, राजनीतिक जानकारों का एक तबका ऐसा भी है जो दावा कर रहा है कि कैलाश विजयवर्गीय के साथ बैठक का सबब कोई स्थानीय पॉलिटिकल समस्या नहीं थी। बल्कि बड़े मंसूबे को लेकर ये मीटिंग की गई थी। फिलहाल अमित शाह का पूरा फोकस पश्चिम बंगाल पर है।
पश्चिम बंगाल में जल्द ही चुनाव होने हैं। ये प्रदेश किस कदर बीजेपी के लिए नाक का सवाल बना हुआ है ये सब जानते हैं। पिछले कई चुनावों से बीजेपी यहां पर एड़ी चोटी का जोर लगा रही है, लेकिन अब तक कामयाबी नहीं मिली है। आने वाले चुनाव के लिए भी बीजेपी ने अपनी सारी ताकत पश्चिम बंगाल में झोंक दी है।
अब बीजेपी को किसी ऐसे लीडर की सख्त जरूरत है जो पश्चिम बंगाल की समझ भी रखता हो और वहां संगठन को मजबूत भी बनाकर रख सके। इसके लिए कैलाश विजयवर्गीय से बेहतर और कौन से नेता हो सकते हैं।
कैलाश विजवर्गीय को पश्चिम बंगाल की राजनीति की भी समझ है और वो वहां के संगठन को भी अच्छे से जानते हैं। या यूं कहा जा सकता है कि वहां के संगठन को खड़ा करने का क्रेडिट उनके खाते में भी है।
ये खबर भी पढ़े...
News Strike : बंद कमरे में किस पर भड़के कैलाश विजयवर्गीय? खुद के खिलाफ साजिश का अंदेशा
बंगाल में विजयवर्गीय का बढ़ सकता है दबदबा
इसे देखते हुए माना जा रहा है कि पार्टी एक बार फिर उनके एक्सपीरियंस का फायदा पश्चिम बंगाल में उठा सकती है। वैसे भी वो अब मध्यप्रदेश में विधानसभा सत्र खत्म हो गया है।
पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने परिवर्तन यात्रा निकालना भी शुरू कर ही दिया है। इस परिवर्तन यात्रा का जिम्मा कैलाश विजयवर्गीय को सौंपा जा सकता है।
कैलाश विजयवर्गीय बीजेपी के दबंग नेता माने जाते हैं। इसलिए ममता बैनर्जी जैसी मुखर और दबंग नेता का सामना करने के लिए भी वो एक परफेक्ट चॉइस हो सकते हैं।
बात सिर्फ मुखर होने या फिर दबंग होने की नहीं है। कैलाश विजवर्गीय पहले भी संगठन में रहते हुए पश्चिम बंगाल में पार्टी को मजबूत करने का काम बखूबी किया भी है।
साल 2015 में बीजेपी ने कैलाश विजवर्गीय को पश्चिम बंगाल भेजा था। बतौर राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजवर्गीय करीब छह साल वो बंगाल में रहे। इस दौरान बीजेपी अपने दम पर विधानसभा चुनाव तो नहीं जीत सकी। लेकिन लोकसभा में जरूर पार्टी की सीटें 18 तक पहुंच गईं।
ये खबर भी पढ़े...
News Strike : मप्र में राष्ट्रगीत गाना अनिवार्य, अल्पसंख्यक नेताओं ने जताया विरोध, क्या बीजेपी का है फायदा?
विजयवर्गीय की रणनीति से बंगाल में बदलाव
पश्चिम बंगाल से पहले विजयवर्गीय हरियाणा के चुनाव में अच्छा प्रदर्शन कर चुके थे। उनके पश्चिम बंगाल पहुंचने के बाद बीजेपी ने साल 2016 के विधानसभा चुनाव में 3 सीटें जीतीं और अगले पांच साल में सीटों की संख्या तेजी से बढ़ी।
साल 2021 के चुनाव में बीजेपी ने 294 में से 77 सीटें जीतीं। हालांकि, पार्टी ने उस चुनाव में 200 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा था। बीजेपी लक्ष्य तक तो नहीं पहुंची, लेकिन सीटों में इजाफा जरूर हुआ। सीटों के अलावा पार्टी का वोट शेयर भी काफी ज्यादा बढ़ा था।
2016 के चुनाव में पश्चिम बंगाल में बीजेपी का वोट शेयर 10.2 परसेंट था। जो 2021 के चुनाव में बढ़कर 38.09 परसेंट हो गया था। बीजेपी जो पिछले चुनाव में नहीं कर सकी। वो करने की उम्मीद शायद इस बार हो। बीजेपी एक बार फिर दो सौ सीटें जीतने की मंशा के साथ ही मैदान में उतरेगी।
विजयवर्गीय को भेजा जा सकता है पश्चिम बंगाल
इसलिए हो सकता है कि चुनाव तक कैलाश विजयवर्गीय ही ये जिम्मेदारी संभालें और पश्चिम बंगाल भेज दिए जाएं। फिलहाल चुनावों का ऐलान नहीं हुआ। फिर भी ये संभावना है कि मई से पहले चुनाव हो जाएं और नई सरकार बन जाए।
इस लिहाज से हम मान सकते हैं कि डेढ़ महीने के भीतर बंगाल में सारी राजनीतिक उठापटक हो जाएगी। तब तक कैलाश विजयवर्गीय पश्चिम बंगाल में रहेंगे। इस बीच हो सकता है कि मध्यप्रदेश की सियासत में भी शांति आ जाए और एक नई शुरुआत के साथ प्रदेश सरकार और उनके मंत्री कदमताल कर सकें।
/sootr/media/agency_attachments/dJb27ZM6lvzNPboAXq48.png)
Follow Us