News Strike : बंद कमरे में किस पर भड़के कैलाश विजयवर्गीय? खुद के खिलाफ साजिश का अंदेशा

कैलाश विजयवर्गीय ने अपनी ही पार्टी में साजिश के अंदेशे जताए। विधानसभा में गुस्से में आकर अफसरों पर आरोप लगाए और गलत जानकारी देने के मुद्दे पर विवाद हुआ।

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Harish Divekar
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Photograph: (thesootr)

News In Short

कैलाश विजयवर्गीय को अपनी ही पार्टी में साजिश का संदेह है।
विधानसभा में गलत जानकारी देने पर कैलाश गुस्से में आ गए।
विजयवर्गीय ने अफसरों पर साजिश रचने का आरोप लगाया।
अफसरों ने पर्ची के जरिए सही जानकारी देने की जिम्मेदारी निभाई नहीं।
कांग्रेस ने गलत जानकारी पर विजयवर्गीय को निशाने पर लिया।

News In Detail

NEWS STRIKE | न्यूज स्ट्राइकएक बंद कमरा। उस कमरे में हैं बीजेपी के सिर्फ तीन नेता। तीनों ही कद्दावर। इसमें से एक है मध्यप्रदेश का सीनियर मंत्री। जो गुस्से से बेतहाशा चिल्ला रहा है, लेकिन क्यों। ये मंत्री हैं कैलाश विजयवर्गीय। 

क्या कैलाश विजयवर्गीय अपनी ही पार्टी की सरकार में, अपनों से ही घिर चुके हैं। पिछले कई दिनों से कैलाश विजयवर्गीय अलग-अलग कारणों से सुर्खियों में हैं। ये तो सब देख रहे हैं, लेकिन पर्दे के पीछे कहानी कुछ और है।

आज हम आपको बताएंगे कैलाश को गुस्सा आने की इनसाइड स्टोरी। जिसके बाद आप भी यही पूछेंगे कि क्या कैलाश विजयवर्गीय किसी राजनीतिक साजिश के केंद्र में हैं। औकात में रहो, मिनी धारावी जैसे बयान दे रहे कैलाश इन दिनों एक बड़ी मुश्किल का सामना कर रहे हैं।

कैलाश विजयवर्गीय का बदला मिजाज

मध्यप्रदेश के कूल एंड काम नेता कैलाश विजयवर्गीय। जो बड़ी से बड़ी राजनीतिक चुनौती का हमेशा हंसते-हंसते सामना करते नजर आए हैं, लेकिन इस बार उनके मिजाज कुछ बदले हुए हैं।

कैलाश विजयवर्गीय वो नेता हैं जो एक कनिंग स्माइल के साथ हर राजनीतिक बिसात को पलटने का माद्दा रखते हैं और घड़ी की सुईयां अगर उल्टी घूम रही हों तो शांति से उस सियासी तूफान को झेलने का जिगर भी रखते हैं। वो भी बिना किसी शिकन के, लेकिन जिस कैलाश विजयवर्गीय को आप इन दिनों खबरों में देख रहे हैं।

उसके बाद शायद आपको लगे कि हम सिर्फ लफ्फबाजी कर रहे हैं कैलाश विजयवर्गीय ऐसे बिलकुल नहीं है। जो कभी अपने विरोधी नेताओं के सवाल पर आग बबूला हो रहे हैं। तो कभी अपने ही क्षेत्र को ऐसा नाम दे रहे हैं। जिसे सुनना भी नागवार है। कैलाश विजयवर्गीय के सारे बयानों पर बात होगी। पर पहले जान लेते हैं वो इन साइड स्टोरी जो अब तक बहुत कम लोगों को पता है।

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क्यों भड़के कैलाश विजयवर्गीय?

बात वहीं से शुरू करते हैं, जहां हमने शुरुआत में अधूरी छोड़ दी थी। ये बात है मध्यप्रदेश विधानसभा के एक बंद कमरे की। इस बंद कमरे में बीजेपी के तीन सीनियर लीडर बैठे हैं। एक के बारे में तो आप समझ ही चुके हैं। वो हैं कैलाश विजयवर्गीय। जो मध्यप्रदेश सरकार के सीनियर लीडर हैं। एक हैं मध्यप्रदेश विधानसभा के स्पीकर और बीजेपी के सीनियर मोस्ट नेताओं में से एक नरेंद्र सिंह तोमर और एक नेता हैं बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल।

इन दो दिग्गजों के सामने कैलाश विजयवर्गीय का गुस्सा फूट पड़ता है। ये सब होता है विधानसभा में दिए एक जवाब के बाद। असल में कैलाश विजयवर्गीय विधानसभा में एक जवाब देकर कांग्रेस के निशाने पर आ जाते हैं। कांग्रेस का आरोप है कि विजयवर्गीय ने सदन में गलत जानकारी पेश की है। पहले जानते हैं सदन में क्या हुआ और फिर जानते हैं उस बंद कमरे की कहानी जहां पर बिफर पड़े थे कैलाश विजयवर्गीय।

भागीरथपुरा कांड पर क्यों बिफरे कैलाश

मप्र के विधानसभा सत्र के दौरान भागीरथ पुरा कांड पर स्थगन प्रस्ताव आया था। जिस पर चर्चा हो रही थी। याद दिला दूं भागीरथ पुरा कांड वही घटना है। जिसमें दूषित पानी पीने से इंदौर के भागीरथ पुरा में कई लोगों की मौत हो गई। जिस पर जमकर सियासत भी हुई। इस घटना के बाद से ही कैलाश विजयवर्गीय लगातार बौखलाते हुए नजर आ रहे हैं। इसी घटना पर पत्रकार के एक सवाल पर वो ऐसा शब्द बोल गए थे जिस पर बहुत बवाल हुआ था।

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'मिनी धारावी' बयान को लेकर विवाद

इसके बाद उन्होंने भागीरथपुरा को मिनी धारावी भी बोल दिया था। उनके इस कमेंट पर भी खूब बवाल हुआ था और भागीरथपुरा के लोगों ने अपनी उपलब्धियां गिनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। ये मामला विधानसभा में भी खूब गूंजा। स्थगन प्रस्ताव पर भी इस मामले की जानकारी देने की जिम्मेदारी कैलाश विजयवर्गीय की ही थी। क्योंकि वो प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री भी हैं।

कैलाश विजयवर्गीय ने भरपूर मोडेस्टी दिखाते हुए घटना की नौतिक जिम्मेदारी ली। और ये भी बताया कि भागीरथपुरा में बीस लोगों की मौत कैसे हुई। बस यही आंकड़ा कैलाश विजयवर्गीय की मुश्किल और गुस्सा, दोनों का कारण बन गया। क्योंकि कैलाश विजयवर्गीय के इस बयान के बाद ही कांग्रेस नेता जयवर्धन सिंह ने उन पर सदन में गलत जानकारी देने का आरोप लगा दिया। 

भागीरथपुरा में 32 मौतों का विवाद

जयवर्धन ने पूरे डिटेल में विधानसभा में बताया कि उन्होंने जो प्रश्न पूछा था उसका क्रमांक है 1625। इस प्रश्न के जवाब में मंत्रीजी ने कहा कि 20 मौतें हुईं। जयवर्धन ने लिखित उत्तर का भी हवाला दिया और, बताया कि उत्तर के पहले पेज पर 20 मौतें होना बताया गया है, जबकि अंदर 32 मौतें होने की बात कही जा रही है।

जयवर्धन ने भी इस ओर ध्यान खींचा कि नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार के सवाल पर भी 20 मौतें होना ही बताया गया था। बस फिर क्या था। कांग्रेस विधायक ने कैलाश विजयवर्गीय पर सदन में गलत जानकारी देने का आरोप लगाया और सवाल भी किया कि सरकार की ओर से सही जानकारी क्यों नहीं मिल पा रही है।

जाहिर है इन आरोपों पर कैलाश विजयवर्गीय के पास कोई जवाब नहीं होंगा। क्योंकि उनकी दी हुई जानकारी में वाकई आंकड़ों का काफी उलटफेर भी था। ये भी जाहिर है कि इसके बाद उन्हें गुस्सा तो आया ही होगा।

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अफसरों पर लगाया साजिश का आरोप

यही गुस्सा फूटा विधानसभा अध्यक्ष तोमर के कक्ष में। इस पूरे घटनाक्रम के बाद विजयवर्गीय के निशाने पर आए विभाग के अफसर। अंदर की खबर ये है कि विजयवर्गीय ने अफसरों पर उनके खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि अफसर ही उन्हें घेरने की कोशिश कर रहे हैं। इन संगीन आरोपों के बाद विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे को वहीं पर बुलवा लिया गया। तोमर ने दुबे से सख्ती के साथ सवाल किया।

विजयवर्गीय- किसने ये जवाब बनाया था। उसको सस्पेंड कर दीजिए।

दो दिग्गज नेताओं के गुस्से के बाद दुबे ने बेहद बेबाकी के साथ जवाब दिया।

दुबे- जवाब तो मेरे ही साइन से आया था। इसलिए मुझे ही सस्पेंड कर दीजिए।

विजयवर्गीय- क्या आप पढ़ते नहीं हैं? आपके गलत जवाब की वजह से विपक्ष मुझ पर हमलावर हुआ।

दुबे- हमारी गलती नहीं है। जवाब सही बना है। आपने ठीक से पढ़ा और समझी नहीं। 

अफसरों का विजयवर्गीय पर गलती का आरोप

इसके बाद दुबे ने तफ्सील से बताया कि गलती असल में कहां हुई है। दुबे के मुताबिक जवाब में साफ लिखा है कि 20 लोगों की मौत दूषित पानी से हुई है, जबकि 8 मौतों का कारण पानी नहीं बल्कि, दूसरी बीमारियां या दूसरे कारण रहे हैं। चार मौत में दूषित पानी के साथ ही दूसरी बीमारियां भी एक कारण के रूप में सामने आईं। दुबे के मुताबिक ये जानकारी पीएम रिपोर्ट के अनुसार पेश की गई थीं।

यहां ये क्लियर है कि अफसरों ने अपनी गलती का ठीकरा भी विजयवर्गीय के सिर फोड़ने में कोई गुरेज नहीं किया। अब हम आपको बताते हैं कि असल गलती कहां हुई है। अफसरों ने बड़ी चालाकी से ये स्पष्ट कर दिया कि मौत के आंकड़े अलग-अलग कैसे हैं, लेकिन जब मंत्री को ये बात बतानी चाहिए थी तब नहीं बताई गई। इसके लिए आपको विधानसभा की एक व्यवस्था को समझना पड़ेगा।

विजयवर्गीय ने अफसरों से पर्ची क्यों नहीं मांगी?

विधानसभा में जब भी किसी अहम मसले पर बहस होती है या कोई गंभीर सवाल पर मंत्री जवाब पेश करता है। तब सदन में उस विभाग से जुड़ा एक जानकार अफसर भी मौजूद होता है। जो पूरे समय अलर्ट मोड पर रहता है। उसकी जिम्मेदारी यही होती है कि मंत्री अगर कोई गलत जानकारी दे दे तो वो तुरंत एक पर्ची भेजे और मंत्री को सही जानकारी बताए। ताकि सदन में भी सही इंफोर्मेशन दी जा सके और ठीक यही सवाल विजयवर्गीय ने भी दुबे से पूछा।

दुबे ने जब अपनी पूरी सफाई पेश कर दी। तब विजयवर्गीय ने भी यही सवाल पूछा कि जब वो गलत जानकारी दे रहे थे तब उन्हें पर्ची क्यों नहीं भिजवाई गई और इससे पहले जब अफसरों ने उन्हें पूरी ब्रिफिंग दी। तब भी ये सारी बातें विस्तार से क्यों नहीं समझाई गईं। 

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विजयवर्गीय की मुश्किलें या पार्टी के भीतर साजिश?

अब आप ही बताइए इस पूरे मामले में गलती किसकी थी। क्या कैलाश विजयवर्गीय को सदन में जाने से पहले अच्छे से पूरे जवाब पर नजर नहीं डालनी चाहिए थी, लेकिन मंत्रियों के पास एक नहीं कई विभाग और कई मसले होते हैं। ऐसे में अधिकारी उन्हें पूरी जानकारी देते हैं। क्या विजयवर्गीय को जानकारी देने में अफसरों से गलती हुई या जानबूझ कर ऐसा किया गया। 

इस मामले पर विजयवर्गीय पहले ही औकात में रहने के बयान पर घिर चुके हैं। कांग्रेसी जगह-जगह उनके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। इसे विधानसभा की शालीनता के खिलाफ भी माना गया था और फिर ये गलत जानकारी वाला मामला। वैसे विजयवर्गीय खुद इतने सीजन्ड हैं कि ऐसे मामलों को खुद ही हैंडल कर सकते हैं, लेकिन इस बार वो आपा खो रहे हैं।

क्या ये इस बात का इशारा है कि उनकी ही पार्टी में उनके खिलाफ कुछ पक रहा है। जो उन्हें बार-बार डिस्टर्ब कर रहा है या गलतियां करने पर मजूबर कर रहा है। और क्या इस सियासी जंग का हथियार बन रहे हैं वो अफसर। जो उन्हें गलत जानकारी देने के बाद भी गलती मानने की जगह बेबाक जवाब दे रहे हैं।

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