News Strike: दिग्गी की सीट पर खतरा, कांग्रेस को हॉर्स ट्रेडिंग का डर, बीजेपी का दावा- विधायकों की बाड़ाबंदी शुरू

Harish Divekar | Mar 14, 2026, 07:00 IST
Photograph: (thesootr)
मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस को हॉर्स ट्रेडिंग और क्रॉस वोटिंग का डर है। बीजेपी ने दावा किया कि वह राज्यसभा की सभी सीटें जीत सकती है।

News In Short

  • कांग्रेस की एकमात्र राज्यसभा सीट बचाने के लिए 58 वोट चाहिए।
  • बीजेपी ने दावा किया कि वह राज्यसभा की सभी सीटें जीत सकती है।
  • कांग्रेस विधायकों को बाड़ाबंदी में रखने की योजना बना रही है।
  • राज्यसभा में क्रॉस वोटिंग से कांग्रेस की स्थिति कमजोर हो सकती है।
  • बीजेपी के पास तीसरी सीट जीतने के लिए 8-9 विधायकों की जरूरत।

News In Detail

न्यूज स्ट्राइक। News Strike:क्या मध्यप्रदेश की राजनीति में फिर से कोई बड़ा खेल शुरू होने वाला है। कांग्रेस लोकसभा चुनाव में हार चुकी है… क्या अब राज्यसभा में भी उसका खाता साफ हो सकता है। क्या सच में कांग्रेस अपनी आखिरी राज्यसभा सीट भी खो देगी?



आइए जानते हैं पूरा गणित और रणनीति

19 जून को मध्यप्रदेश से तीन राज्यसभा सीटें खाली होने वाली हैं। इनमें से दो सीटें बीजेपी की हैं सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन और एक सीट कांग्रेस की दिग्विजय सिंह, लेकिन इस बार दिग्विजय सिंह चुनाव नहीं लड़ेंगे।



ये बात खुद दिग्विजय सिंह ने सार्वजनिक तौर पर कही भी है। यानी कांग्रेस को अब अपनी एकमात्र सीट बचानी है। राज्यसभा चुनाव में सबसे बड़ा डर है क्रॉस वोटिंग और हॉर्स ट्रेडिंग। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने चेताया है कि हर वोट कीमती है।



इसी वजह से कांग्रेस अपने विधायकों को बाड़ाबंदी में रख सकती है। मतलब विधायकों को एक जगह रोककर दूसरे दल के संपर्क और प्रलोभन से बचाना। उधर बीजेपी नेता हितेश बाजपेयी ने X पर पोस्ट करके दावा किया, खिलेगा तो कमल ही।



कांग्रेस के डर और बीजेपी नेता के दावे के बीच हम आपको बताते हैं की राज्यसभा जीतने का फॉर्मूला क्या है।



  • मध्यप्रदेश में कुल विधायक = 230
  • राज्यसभा सीटें = 3

तो ऐसे में जीत के लिए उम्मीदवार को चाहिए लगभग 58 वोट। बीजेपी के पास 164 विधायक हैं, इसलिए दो सीटें आसानी से उनके हाथ में हो सकती हैं। कांग्रेस को अपनी सीट बचाने के लिए भी चाहिए 58 वोट। कांग्रेस के पास 65 विधायक हैं इनमें से बिना विधायक निर्मला सप्रे पहले ही बीजेपी को समर्थन दे चुकी हैं। दूसरा विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा का चुनाव शून्य हो चुका है।



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क्रॉस वोटिंग से कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ीं

हालांकि, अभी मामला अपील में जाएगा। मल्होत्रा को चुनाव से पहले राहत नहीं मिली तो कांग्रेस के विधायकों की संख्या घट कर ऐसे में इससे संख्या घटकर 63 हो सकती है।



इसके अलावा अंदरखानों का कहना है की कांग्रेस में कुछ विधायक नाराज चल रहे हैं। अगर इनमें से कोई भी क्रॉस वोटिंग करता है, तो कांग्रेस की स्थिति और कमजोर हो सकती है।



यदि ऐसा होता है तो ये प्रदेश की राजनीति में संभवतः पहले बार होगा क्यों इसके पहले प्रयास कई बार हुए लेकिन क्रॉस वोटिंग सफल नहीं हो पाई। अगर बीजेपी तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारती है, तो खेल पूरी तरह बदल सकता है।



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बीजेपी की तीसरी सीट जीतने की योजना

दो सीटें जीतने के बाद भी बीजेपी के पास बचेंगे लगभग 49 वोट। तीसरी सीट जीतने के लिए बस 8–9 विधायक चाहिए। अगर इतने विधायक क्रॉस वोटिंग कर देते हैं, तो कांग्रेस की सीट आसानी से बीजेपी के हाथ में चली जाएगी।



हम आपको बताते हैं की इसके पहले भी राज्यसभा में क्रॉस वोटिंग के प्रयास हुए हैं 2016 में बीजेपी ने निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन दिया। दो बीजेपी उम्मीदवार जीत गए, लेकिन विवेक तन्खा ने बीएसपी और निर्दलीय वोट लेकर बचाव किया।



इसी तरह 2020 में राज्यसभा चुनाव में एक बीजेपी विधायक के क्रॉस वोटिंग की बात सामने आई थी बाद में पार्टी नेताओं ने कहा की उनके विधायक का वोट गलती से कांग्रेस के पक्ष में चला गया। उस वक्त दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों ही राज्यसभा के हकदार थे।



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कांग्रेस की आखिरी सीट बचाने की चुनौती

सिंधिया को बीजेपी ने अपना कैंडिडेट बनाया था और कांग्रेस ने दिग्विजय को मैदान में उतारा था तब सिंधिया को 56 वोट मिले थे। बीजेपी उम्मीदवार सुमेर सिंह सोलंकी को 55 वोट मिले थे और दिग्विजय सिंह को मिले थे 57 वोट।



इन नतीजों ने सबको चौंका दिया था। बाद में खुलासा हुआ कि बीजेपी के एक विधायक ने क्रॉस वोटिंग की है। इसके अलावा बीजेपी का एक वोट निरस्त भी हो गया था। तब बीजेपी विधायक गोपीलाल जाटव ने ये कहकर अपनी गलती मान ली थी कि उनसे गलती से बीजेपी की जगह कांग्रेस का बटन दब गया।



तो अब सवाल यही है… क्या कांग्रेस रणनीति और गणित का इस्तेमाल करके अपनी आखिरी राज्यसभा सीट बचा पाएगी? या बीजेपी लोकसभा की तरह राज्यसभा में भी मध्यप्रदेश की सभी सीटें जीत जाएगी? इस चुनाव में छह से आठ विधायकों का खेल पूरी तस्वीर बदल सकता है। मध्यप्रदेश का यह राज्यसभा चुनाव इस बार बेहद दिलचस्प और नाटकीय होने वाला है।





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