News Strike: सख्त एक्शन के नाम पर क्या प्रीतम लोधी का सफाई देना काफी है? विधायक का अब क्या होगा?
News Strike | न्यूज स्ट्राइक।बीजेपी के बिगड़ैल, अकड़ू, धमकीबाज विधायक प्रीतम लोधी क्या अब लाइन पर आ जाएंगे। बीजेपी ने उनकी क्लास तो कई बार लगाई है। उन्हें निष्कासित भी किया है, लेकिन हर बार प्रीतम जैसे अमृत की बूंद चखकर पार्टी में वापस लौट आते हैं।
इस बार तो प्रीतम पर राजनेताओं के साथ-साथ अफसरशाही भी सख्त है। प्रीतम का ये कोई नया मामला नहीं है। न सिर्फ प्रीतम बल्कि उनका बेटा भी सत्ता के मद में इतना डूबा है कि आम लोगों सहित अफसरों को भी कुछ नहीं समझ रहा है। अफसर से डैडी वाला सवाल करने वाले प्रीतम लोधी ने पार्टी के डैडी को क्या सफाई दी। वो भी जान लेते हैं।
बेलगाम भाषा, विधायक का विवाद
करेरा क्या तेरे डैडी की है। मेरा बेटा यहां आएगा और चुनाव भी लड़ेगा। तेरे डैडी में दम हो तो रोक लेना। हमारा इतिहास भी देख लेना एक बार। अपनी औकात में रह।
ये लाइन सुनकर आप ये कह सकते हैं कि कोई सड़कछाप, दादागिरी पर अमादा है। पर नहीं ये शब्द किसी आम चलते फिरते या गली के किसी बदमाश के नहीं हैं। मध्यप्रदेश के विधायक प्रीतम लोधी ने खुद ये बात अपनी जुबान से कही है।
एसडीओपी आयुष जाखड़ को उन्होंने ये अपशब्द कहे। बेलगाम भाषा का ये सिलसिला शुरू हुआ 16 अप्रैल की एक घटना से। घटना में उनका बेटा दिनेश लोधी शामिल है। जिसकी थार से तीन लोगों को टक्कर लगी।
इस घटना को देखने वालों का आरोप है कि दिनेश लोधी ने टक्कर मारने के बाद दादागिरी भी की और कहा कि वो हॉर्न दे रहे थे, लेकिन इन लोगों ने नहीं सुना। तीन लोगों को टक्कर मारने के बाद उन्होंने मदद का हाथ भी आगे नहीं बढ़ाया और घायलों को तड़पता हुआ छोड़कर वहां से चले गए।
डैडी वाले बयान से विवाद गहराया
बताया गया कि इसके बाद पुलिस भी उनके पास पहुंची। घटना के बाद दिनेश की थार को जब्त किया गया। हालांकि, दिनेश ने जुर्माना देकर गाड़ी छुड़वाई। उसके बाद एसडीओपी आयुष जाखड़ ने उन्हें थाने बुलवाया। थाने में दिनेश का अंदाज देखने लायक था। जो ये जाहिर कर रहा था कि उसे अपने किए पर शक नहीं है और नियम कायदे से दूर-दूर तक कोई वास्ता भी नहीं है।
काली फिल्म और हूटर वाली गाड़ी के साथ दिनेश थाने पहुंचा। उसके तेवर देखकर आईपीएस जाखड़ ने फटकार भी लगाई और सभी नियमों को तोड़ने पर कानून के अनुसार धाराएं भी लगाएं, लेकिन दिनेश लोधी की अकड़ कम नहीं हुई। उसके बाद प्रीतम लोधी का डैडी वाला बयान सामने आ गया।
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लोधी की धमकी पर अफसरों का रिएक्शन
प्रीतम लोधी ने जाखड़ के घर को गोबर से भरने की धमकी भी दी और खुलेआम शक्ति प्रदर्शन भी किया। पर मध्यप्रदेश के अफसरों ने भी ये जता दिया कि वो अगर एक हो जाएं तो उन्हें चुनौती देना मुश्किल है। 21 अप्रैल को आईपीएस अफसरों ने प्रेस नोट जारी किया। जिसमें लोधी की निंदा भी की।
एसोसिएशन के पत्र में साफ लिखा गया कि एक नए नियुक्त अफसर और उसके परिवार पर जो अपमानजनक टिप्पणियां की गईं और धमकियां दी गईं वो अशोभनीय हैं। आईपीएस एसोसिएशन का पत्र आप यहां देख सकते हैं। मंत्रालय सेवा अधिकारी कर्मचारी संघ ने भी इस घटना पर कार्रवाई की मांग की है।
बीजेपी ने लोधी को जारी किया नोटिस
ये मामला इतना संगीन था कि बीजेपी को प्रीतम लोधी पर एक्शन लेना ही पड़ा। उनके बर्ताव को अत्यंत आपत्तिजनक बताते हुए पार्टी ने उन्हें नोटिस जारी किया और तीन दिन में जवाब मांगा। उस तीन दिन की मियाद पूरी हो चुकी है। आज प्रतीम लोधी ने भोपाल आकर अपना जवाब प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को सौंप दिया है। अब पार्टी आगे क्या एक्शन लेगी वो बाद की बात है।
प्रीतम लोधी: बीजेपी की मजबूरी?
पर हम तो डिस्कस उस मजबूरी पर कर रहे हैं जो पार्टी के सामने शायद अब भी मौजूद है। जिस तरह की हिमाकत या हरकत प्रीतम लोधी कर चुके हैं। जिस तरह से उनके बेबाक बोल बढ़ते जा रहे हैं। क्या पार्टी को सफाई की जरूरत थी।
प्रीतम लोधी ने जो भी धमकी दी खुलेआम दी। उनके पुराने कारनामों की फेहरिस्त भी कुछ छोटी नहीं है। फिर पार्टी सिर्फ सफाई लेकर उन्हें कैसे बख्श सकती है। आखिर प्रीतम बीजेपी की मजबूरी क्यों हैं। उस पर बात करने से पहले एक नजर प्रीतम लोधी के अब तक कारनामों पर डाल लीजिए।
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प्रीतम लोधी के विवादित कारनामे
प्रीतम लोधी पर हत्या के तीन मामले समेत नौ अलग-अलग केस दर्ज हैं। प्रीतम लोधी खुद जिस इतिहास को जान लेने की धमकी दे रहे हैं। वो कोई ऐसे कारनामों से नहीं भरा है। जिन्हें स्वर्ण अक्षरों से लिखा जा सके। उसमें हत्या और मारपीट जैसे कई किस्से भरे पड़े हैं। हत्या और हत्या के प्रयास समेत 28 धाराओं में उनके खिलाफ नौ मामले दर्ज हैं। पुलिस से उनका टकराव भी नया नहीं है।
ग्वालियर की हजीरा चौकी में घुसकर वो पुलिसकर्मियों से मारपीट कर चुके हैं। ये घटना करीब बीस साल पुरानी है। इसके अलावा बलवा डकैती और मारपीट के 34 मामले दर्ज हैं। प्रीतम लोधी के मुगालते इतने बढ़े हैं कि उन्होंने एक समय में थानों में विधायक प्रतिनिधि नियुक्त कर दिए थे।
हालांकि, इस फैसले का भारी विरोध हुआ और प्रीतम लोधी को ये फैसला वापस लेना पड़ा था। सबसे चर्चित मामला था उनका और बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री का विवाद।
साल 2022 में प्रीतम लोधी ने ब्राह्मणों और कथा वाचकों पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। जिस पर धीरेंद्र शास्त्री ने भी जवाब दिया था। उस समय लोधी पर सख्त एक्शन लेते हुए बीजेपी ने उन्हें निष्कासित भी किया, लेकिन फिर सियासी मजबूरियां ऐसी बनी कि चुनाव से पहले उनकी पार्टी में वापसी हुई और टिकट भी मिला।
बेटा भी पिता से कम नहीं है। दिनेश लोधी पर 2023 में धमकी देने का मामला दर्ज है। 2024 में एक शख्स पर गाड़ी चढ़ाने की कोशिश का मामला दर्ज है। इसके साथ ही करोड़ों की वसूली के भी आरोप हैं।
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बीजेपी की लोधी वोट बैंक की मजबूरी
इतने सब कारनामों के बावजूद बीजेपी प्रीतम लोधी पर पूरी तरह सख्त क्यों नहीं हो पाती। मप्र की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के करीबी माने जाने वाले प्रीतम क्या बीजेपी जैसी पार्टी पर भारी पड़ जाते हैं। राजनीतिक हलकों में कहा जाता है कि लोधी की वजह से ही लोधी वोटर्स बीजेपी से जुड़े हुए हैं।
बुंदेलखंड की सागर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना जैसे क्षेत्र और ग्वालियर में लोधी वोटर्स की तादाद काफी ज्यादा है। करीब 65 विधानसभा सीटे ऐसी हैं जहां लोधी वोटर्स निर्णायक भूमिका में माने जाते हैं।
उमा भारती के बाद प्रदेश में प्रहलाद पटेल, राहुल सिंह लोधी और प्रीतम लोधी इस वोटबैंक को साधे हुए हैं। हो सकता है कि बीजेपी को डर हो कि इन सीटों पर प्रीतम लोधी को सजा देने का खामियाजा बीजेपी को न भुगतना पड़े।
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बड़ा सवाल: लोधी के खिलाफ एक्शन होगा?
क्या ये डर अब भी बरकरार है। बीजेपी ये बार-बार बोल रही है कि वो अब जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करेगी। तो फिर पार्टी ने अब तक प्रीतम लोधी के मामले पर टॉलरेंस क्यों रखा है। चलिए जो हुआ सो हुआ।
बात नए मामले की करते हैं क्या थार से तीन लोगों को घायल करने और उसके बाद अफसरशाही को धमकाने के बाद ये मामला इतना हलका है कि प्रीतम लोधी को सिर्फ सफाई देकर छोड़ दिया जाए।
बीजेपी अब ये जाहिर करेगी कि टॉलरेट करने की भी हद होती है। क्या बीजेपी के आला नेता ये जता सकेंगे कि करैरा किसे के भी डैडी का हो, लेकिन पार्टी भी किसी के डैडी की नहीं है।