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वित्त मंत्री ने लोकसभा में इकोनॉमी पर पेश किया 59 पेज का श्वेत पत्र

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण( Finance Minister Nirmala Sitharaman)ने गुरुवार, 8 फरवरी को लोकसभा (Lok Sabha) में भारतीय अर्थव्यवस्था ( इकोनॉमी ) पर 59 पेज का श्वेत पत्र (white papers) पेश किया। इसमें बताया गया है कि यूपीए सरकार में अर्थव्यवस्था नाजुक थी।

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BP shrivastava
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Finance Minister Nirmala Sitharaman

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को लोकसभा में भाषण देती हुईं।

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NEW DELHI. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण( Finance Minister Nirmala Sitharaman)ने गुरुवार, 8 फरवरी को लोकसभा (Lok Sabha) में भारतीय अर्थव्यवस्था ( इकोनॉमी ) पर 59 पेज का श्वेत पत्र (white papers)पेश किया। इसमें बताया गया है कि जब 2014 में मोदी सरकार ( Modi government) ने सत्ता संभाली, तो अर्थव्यवस्था नाजुक स्थिति में थी। इकोनॉमिक मिसमैनेजमेंट और करप्शन था।

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सीतारमण ने श्वेत पत्र में बताया कि UPA सरकार के हतोत्साहित करने वाले निवेश माहौल ने घरेलू निवेशकों को विदेशों में अवसर तलाशने के लिए प्रेरित किया। बार-बार नीतिगत बदलावों के कारण इंडस्ट्रियलिस्ट्स ने इंडोनेशिया और ब्राजील जैसे देशों में निवेश का रुख किया।

लक्ष्य- 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना

2014 में जब मोदी सरकार आई तो उसने कठोर फैसले लिए, जिससे अर्थव्यवस्था पटरी पर आई। देश की अर्थव्यवस्था अब दुनिया की पांच नाजुक अर्थव्यवस्थाओं से शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में पहुंच गई है। हमारा लक्ष्य 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है।

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PM मोदी ने राज्यसभा में पढ़ी नेहरू की चिट्ठी, कांग्रेस पर साधा निशाना

मोदी सरकार ने तीन पार्ट में श्वेत पत्र पेश किया है...

पार्ट A: UPA सरकार में भारत की आर्थिक स्थिति

पार्ट B: UPA सरकार के विभिन्न घोटाले

पार्ट C: मोदी सरकार ने कैसे इकोनॉमी बदली

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पार्ट A से जुड़ी बड़ी बातें...

1. पांच साल महंगाई चरम पर रही, खामियाजा आम आदमी ने भुगता

UPA सरकार को अधिक सुधारों के लिए तैयार एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था विरासत में मिली थी, लेकिन उसने अपने दस साल में इसे नॉन परफॉर्मिंग बना दिया। 2004 में जब UPA सरकार ने अपना कार्यकाल शुरू किया तो इकोनॉमी 8% की दर से बढ़ रही थी। पहले 5 साल यानी 2004 से 2008 तक इकोनॉमी तेजी से बढ़ी और महंगाई भी कम थी।

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फिर 2008 के ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस के बाद किसी भी तरह से हाई इकोनॉमिक ग्रोथ को बनाए रखने के लिए UPA सरकार ने आर्थिक नींव को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया। ऐसी ही एक नींव जिसे UPA सरकार ने बुरी तरह कमजोर कर दिया था, वह थी प्राइस स्टेबिलिटी। 2009 से 2014 के बीच महंगाई चरम पर रही और इसका खामियाजा आम आदमी को भुगतना पड़ा।

लक्ष्य- 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना

2014 में जब मोदी सरकार आई तो उसने कठोर फैसले लिए, जिससे अर्थव्यवस्था पटरी पर आई। देश की अर्थव्यवस्था अब दुनिया की पांच नाजुक अर्थव्यवस्थाओं से शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में पहुंच गई है। हमारा लक्ष्य 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है।

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मोदी सरकार ने तीन पार्ट में श्वेत पत्र पेश किया है...

पार्ट A: UPA सरकार में भारत की आर्थिक स्थिति

पार्ट B: UPA सरकार के विभिन्न घोटाले

पार्ट C: मोदी सरकार ने कैसे इकोनॉमी बदली

पार्ट A से जुड़ी बड़ी बातें...

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1. पांच साल महंगाई चरम पर रही, खामियाजा आम आदमी ने भुगता

UPA सरकार को अधिक सुधारों के लिए तैयार एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था विरासत में मिली थी, लेकिन उसने अपने दस साल में इसे नॉन परफॉर्मिंग बना दिया। 2004 में जब UPA सरकार ने अपना कार्यकाल शुरू किया तो इकोनॉमी 8% की दर से बढ़ रही थी। पहले 5 साल यानी 2004 से 2008 तक इकोनॉमी तेजी से बढ़ी और महंगाई भी कम थी।

फिर 2008 के ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस के बाद किसी भी तरह से हाई इकोनॉमिक ग्रोथ को बनाए रखने के लिए UPA सरकार ने आर्थिक नींव को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया। ऐसी ही एक नींव जिसे UPA सरकार ने बुरी तरह कमजोर कर दिया था, वह थी प्राइस स्टेबिलिटी। 2009 से 2014 के बीच महंगाई चरम पर रही और इसका खामियाजा आम आदमी को भुगतना पड़ा।

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2. इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण पर ध्यान नहीं, 10 साल में 16,000 km सड़क

UPA सरकार ने भविष्य के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में अपनी विफलता स्वीकार की। सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका के जवाब में UPA सरकार ने कहा था कि लगभग 40,000 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों में से 24,000 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग 1997 से 2002 तक NDA शासन के दौरान बने थे। इसके बाद, UPA सरकार के पिछले दस वर्षों में केवल लगभग 16,000 किलोमीटर जोड़े गए हैं।

3. 2010 से GST लागू करने का वादा किया था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका

UPA सरकार ने 1 अप्रैल 2010 से वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू करने का वादा किया था। देश भर से 26 पार्टियों का गठबंधन होने के बावजूद, UPA सरकार 1 अप्रैल 2010 को GST लागू करने में विफल रही। इससे स्ट्रक्चरल रिफॉर्म बाधित हुआ। हमारी सरकार आने तक वन नेशन, वन मार्केट सिस्टम को प्राप्त करने की आकांक्षा एक अवास्तविक लक्ष्य बनकर रह गई।

पार्ट B से जुड़ी बड़ी बातें....

1. कोयला ब्लॉक आवंटन में भ्रष्टाचार, 1.86 लाख करोड़ रुपए का नुकसान

इसमें निजी कंपनियों को सरकार की ओर से कोल ब्लॉक्स के आवंटन में अनियमितताएं और भ्रष्टाचार किया गया था। CAG के अनुमान के अनुसार इससे सरकारी खजाने को 1.86 लाख करोड़ का नुकसान हुआ। यह बात 2012 में सामने आई थी। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे 204 आवंटन रद्द कर दिए। 47 मामलों में से 14 मामलों में अभियुक्तों को ट्रायल कोर्ट ने दोषी ठहराया है।

2. कॉमनवेल्थ गेम्स में भ्रष्टाचार, इससे इवेंट प्रभावित हुआ

खेलों से संबंधित विभिन्न प्रोजेक्ट की प्लानिंग और एग्जीक्यूशन में भ्रष्टाचार किया गया। इससे यह इवेंट प्रभावित हुआ। 8 मामलों में आरोप पत्र दायर किए गए जो दिल्ली की अदालतों में विचाराधीन हैं।

3. 2G टेलीकॉम घोटाला, इससे 1.76 लाख करोड़ के रेवेन्यू का नुकसान

इसमें सरकार को लगभग 1.76 लाख करोड़ के संभावित राजस्व का नुकसान हुआ। नुकसान का अनुमान CAG ने 3G स्पेक्ट्रम की दरों के आधार पर लगाया है। भ्रष्टाचार के मामले अपीलीय अदालत में हैं।

पार्ट C से जुड़ी बड़ी बातें...

1. इकोनॉमी मजबूत हुई, 2027 तक तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था होगा भारत

2014 में जब से हमारी सरकार ने सत्ता संभाली है, तब से भारतीय अर्थव्यवस्था में कई स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स हुए हैं, जिससे अर्थव्यवस्था के फंडामेंटल्स मजबूत हुए हैं। 2014 में भारत 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी, जो 2023 में पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई। IMF के अनुमान के अनुसार 2027 तक इसके तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की उम्मीद है।

2. इन्फ्रास्ट्रक्चर बदला, सड़क निर्माण की गति 2.3 गुना बढ़ी

हमारी सरकार के नेशन फर्स्ट के दृष्टिकोण ने भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स ईकोसिस्टम की क्वालिटी को बदल दिया है, जो देश के लिए इन्वेस्टमेंट अट्रैक्ट करने और ग्लोबल वैल्यू चेन में अपनी उपस्थिति का विस्तार करने में महत्वपूर्ण है।

उदाहरण के लिए, जब हमारी सरकार ने वित्त वर्ष 2015 में कार्यभार संभाला था, तब राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण की गति 12 किमी/दिन थी। वित्त वर्ष 2023 में निर्माण की गति 2.3 गुना से अधिक बढ़कर 28 किमी/दिन हो गई।

3. मोदी सरकार ने औसत महंगाई 5.0% पर रखी, UPA के समय 8.2% थी

FY14 और FY23 के बीच औसत वार्षिक महंगाई 5.0% रही है जो FY04 और FY14 के बीच 8.2% थी। जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट के कारण ग्लोबल कमोडिटी की कीमतें काफी बढ़ गई हैं, नहीं तो औसत महंगाई और भी कम होती। सरकार ने सप्लाई सोर्सेज में डायवर्सिफिकेशन और प्रमुख फूड आइटम्स के बफर को मजबूत करके महंगाई को कंट्रोल में रखा है।

UPA सरकार के 15 बड़े घोटाले

1. कोयला ब्लॉक आवंटन: कोलगेट नाम प्रसिद्ध इस घोटाले में 1.85 लाख करोड़ का मामला 2012 में सामने आया। 47  मामलों में फाइल रिपोर्ट, 10 केस अंडर ट्रायल, 14 लोग दोषी करार दिए गए।

2. राष्ट्रमंडल खेल

यह कॉमलवेल्थ नाम से भी जाना जाता है। खेल से जुड़े प्रोजेक्टस में मिसमैनेजमेंट और वित्तीय अनियमितताओं में 8 मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई। जांच चल रही है।

3. 2G टेलिकॉम: यह 1.76 लाख करोड़ रुपए का घोटाला। मामला अपीलीय अदालत में है।

4. शारदा चिटफंड:  इन्वेस्टमेंट और फंड डायवर्सन से जुड़ा घोटाला 2013 में सामने आया। इसमें 10 लाख से ज्यादा निवेशक प्रभावित हुए थे।

5. INX मीडिया केस: मामला मनीलॉन्ड्रिंग और एक मीडिया कंपनी में विदेशी निवेश से जुड़ा है। केस अभी ट्रायल में है।

6. एयरसेल-मैक्सिस: एक टेलिकॉम कंपनी में विदेशी निवेश के लिए अप्रूवल से जुड़ी अनियमितता के आरोप है। केस अभी ट्रायल में है।

7. एंट्रिक्स देवास डील: ISRO की एंट्रिक्स कॉर्पोरशन और देवास-मल्टीमीडिया के बीच सेटेलाइट डील से जुड़ा घोटाला। सुप्रीम कोर्ट ने फ्रॉड की पुष्टि की है। आरोपियों पर क्रिमिनल केस चल रहे हैं।

8. लैंड फॉर जॉब: रेलवे की ग्रुप-D में नौकरी देने के बदले जमीन ट्रांसफर करने के आरोप है। मामले की जांच चल रही है।

9. पंचकुला और गुड़गांव में प्राइम लैंड अलॉटमेंट/रिलीज केस: निजी बिल्डरों की मिलीभगत से प्राइम लैंड को मुक्त कराने और औद्योगिक भूमि को सहयोगियों को देने के आरोप हैं। ट्रायल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल है।

10. जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन: फर्जी बैंक अकाउंट खोलकर 44 करोड़ रुपए की हेरफेर से जुड़ा मामला, जांच के बाद चार्जशीट दाखिल है।

11. एम्ब्रेयर डील: यह ब्राजील की एयरोस्पेस कंपनी एम्ब्रेयर से भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी से जुड़ा मामला है। जांच के बाद चार्जशीट दाखिल है, लेकिन केस ट्रायल कोर्ट में पेंडिंग है।

12. पिलैटस बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट: मामला 2009 में भारतीय वायुसेना के लिए 75 पिलैटस बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट की खरीद से जुड़ा है।

13. हॉक विमान खरीद : हॉक विमानों की खरीद में 2003 से 2012 के दौरान रक्षा मामला के अधिकारियों पर रिश्वत लेने के आरोप हैं।

14. आदर्श हाउसिंग सोसायटी घोटाला: एक डिफेंस लैंड प्रोजेक्ट में अपार्टमेंट्स के अवांटन में अनियमितताओं से जुड़ा मामला है। केस अभी ट्रायल में है।

15. अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाला: हेलीकॉप्टरों की खरीदी में रिश्वत देने का मामला है।

 

 

 

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