सिंहासन छत्तीसी : मंत्री के पीए की पांचों उंगलियां घी और सिर कढ़ाई में, क्यों चल रही है एक ही इलाके के मंत्री और विधायक में अदावत?

Arun Tiwari | Mar 08, 2026, 12:15 IST
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छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों मंत्रियों के सहायकों की कमाई, भाजपा विधायक और मंत्री के बीच की रार और 'ड्रग्स क्वीन' नव्या मलिक के रसूख की चर्चा जोरों पर है। आज के सिंहासन छत्तीसी में पढ़िए इन घटनाओं के बारे में विस्तार से...

Raipur. छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में कुछ ज्यादा ही गर्मी है। यहां पर कुछ मंत्रियों और उनके पीए की चर्चा बहुत है। एक मंत्रीजी के सहायक तो कमाई में गजब ही कर रहे हैं।



चारों तरफ से बस कमाई ही कमाई हो रही है। इन मंत्री के पास विभाग भी ऐसे हैं जिनमें कमाई की बहुत गुंजाइश है। वहीं एक मंत्री की अपने ही इलाके की विधायक से अदावत विधानसभा तक पहुंच गई है।



अपने काम करवाने के लिए विधायक को विधानसभा में सवाल लगाना पड़ रहा है। एक अफसर ऐसे भी हैं जो गोबर खा गए हैं। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों की ऐसी ही अनसुनी खबरों के लिए पढ़िए 'द सूत्र' का साप्ताहिक कॉलम सिंहासन छत्तीसी।



शराब, पीए और कमाई

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छत्तीसगढ़ में कुछ मंत्रियों के यहां हाल यह है कि मंत्री तो गुड़ ही रह गए और उनके पीए शक्कर हो गए। हम ऐसे ही माननीय मंत्री के पीए की बात कर रहे हैं जिनकी पांचों उंगलियां घी में और सिर कढ़ाई में है।



पूरी कहानी शराब, साहब और सहायक के इर्द-गिर्द ही घूम रही है। साहब का नाम इसलिए लिया जा रहा है क्योंकि पीए कमाई करे और मंत्रीजी को खबर न हो, यह तो कुछ हजम होने वाली बात नहीं है।



यह सहायक उन मंत्री के यहां है जिनके पास कुछ प्रमुख विभाग हैं। उनको एक विभाग तो ऐसा भी मिल गया है जिसके नशे में कमाई ही कमाई है। इन दिनों इस विभाग में पीए का सिक्का चल रहा है।



चारों तरफ से कमाई के द्वार खुले हुए हैं। लोग तो यहां तक कहने लगे हैं कि यदि पीए साहब पर लगाम नहीं लगाई गई, तो कहीं ऐसा न हो जाए कि वे मंत्रीजी को भी उसी गिलास में ले डूबें।



मंत्री और विधायक में अदावत

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मंत्री और विधायक में अदावत हो, यह कोई नई बात नहीं है। लेकिन यहां मामला इससे थोड़ा ज्यादा है। ज्यादा इसलिए क्योंकि विधायक भी बीजेपी की हैं और सबसे बड़ी बात यह है कि दोनों पड़ोसी हैं।



विधायक साहिबा को अपने काम करवाने के लिए विधानसभा में सवाल लगाने पड़ते हैं। कुछ जनता से जुड़े जरूरी काम हैं जो दो साल से रुके हुए हैं। ये काम पड़ोसी मंत्री के विभाग से ही जुड़े हैं।



इस सत्र में भी जब इन महिला विधायक ने अपने क्षेत्र का सवाल उठाया, तो कांग्रेस के एक बड़े नेता ने चुटकी ले ली। कांग्रेस नेता बोले कि पड़ोसी होकर भी बीजेपी की विधायक को विधानसभा में सवाल लगाना पड़ रहा है, तो समझा जा सकता है कि सरकार किस तरह काम कर रही है।



इसके बाद मंत्री और विधायक सफाई देने लगे। वैसे महिला विधायक तेज-तर्रार, पढ़ी-लिखी और समझदार मानी जाती हैं, इसलिए मंत्रीजी को काम करने का भरोसा दिलाना पड़ा।



नव्या, नशा और निशाना

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छत्तीसगढ़ 3 सितंबर को नेशनल मीडिया की सुर्खियों में आ गया जब हुस्न की मलिका नव्या मलिक को गिरफ्तार किया गया। रायपुर ड्रग्स तस्करी मामले में मुंबई से गिरफ्तार नव्या इंटीरियर डिजाइनर से 'ड्रग्स क्वीन' बन गई।



नव्या पर क्लब, पब, फार्महाउस के साथ हाई-प्रोफाइल पार्टियों में ड्रग्स सप्लाई करने का आरोप है। नव्या कई यूनिवर्सिटी और कॉलेज स्टूडेंट्स के संपर्क में थी। यहां तक तो सब ठीक है, लेकिन राजनीतिज्ञों और नौकरशाहों में हड़कंप मच गया है। हड़कंप इसलिए है क्योंकि नव्या का नाम विधानसभा में भी आ गया है।



नव्या के नाम पर बीजेपी और कांग्रेस नेताओं समेत कई नौकरशाह असहज हैं। नव्या के मोबाइल ने कई नेता-अफसरों के नाम उगल दिए हैं। नव्या के बारे में बात करने से हर बड़ा आदमी बच रहा है।



बात विधानसभा में आई है, तो लोगों को डर है कि कहीं नामों का खुलासा न हो जाए। जानकारी के मुताबिक, नव्या मलिक का कनेक्शन छत्तीसगढ़ के एक बड़े बिजनेसमैन, अधिकारी और राजनीतिक हस्तियों के साथ भी सामने आया है।



इन लोगों के साथ ड्रग्स क्वीन नव्या नाइट पार्टियां किया करती थी। नव्या के ठाठ इतने ज्यादा थे कि वह हर साल विदेश भी जाती थी। दुबई, चीन, बैंकॉक और सिंगापुर समेत कई जगहों पर वह नाइट पार्टीज कर चुकी है।



इसी को लेकर इन लोगों की जान हलक में अटकी है। नव्या का कनेक्शन एक शराब कारोबारी और उसके बेटे के साथ भी सामने आया है।



डीएफओ ने खाया लाखों का गोबर

छत्तीसगढ़ के एक फॉरेस्ट अफसर बहुत चर्चा में हैं। चर्चा में इसलिए हैं क्योंकि ये दाल-रोटी खाने के साथ 'गोबर भी खाते' हैं। इन्होंने सांठ-गांठ कर लाखों का गोबर खा लिया है। इनके खिलाफ शिकायत आई है कि इन्होंने फर्जी प्रमाणक तैयार करने, कूटरचित हस्ताक्षर करने और सरकारी राशि के गबन का खेल खेला है।



शिकायत में कहा गया है कि फॉरेस्ट अफसर ने गोबर खरीदी के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर 14 लाख 77 हजार 600 रुपये कैश निकालने की अनुमति जारी कर दी, जबकि 5 हजार से ज्यादा का नकद आहरण नहीं किया जा सकता। इन अधिकारियों पर एफआईआर की मांग उठने लगी है। फिलहाल गोबर खरीदी घोटाला चर्चा का विषय बना हुआ है।



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आखिर वह कौन सी चिट्ठी आई है, जिसने एक मंत्री को मुश्किल में डाल दिया है और क्यों पुलिस कमिश्नरी की चमक फीकी पड़ गई?



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