वोटिंग के दिन बीजेपी ने अपनाई नई रणनीति, 40 लाख कार्यकर्ताओं को लगवाया सुबह छह बजे का अलार्म, जानें क्या था पूरा प्लान

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BP Shrivastava
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वोटिंग के दिन बीजेपी ने अपनाई नई रणनीति, 40 लाख कार्यकर्ताओं को लगवाया सुबह छह बजे का अलार्म, जानें क्या था पूरा प्लान

अरुण तिवारी, BHOPAL. मध्यप्रदेश में 17 नवंबर को वोटिंग हुई। इस बार की वोटिंग में पिछली बार का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। इस बार बीजेपी ने बूथ मैनेजमेंट की एक खास रणनीति पर काम किया। इस रणनीति के दो हिस्से थे। पहले हिस्से में प्रदेश के बड़े नेताओं को खास जिम्मेदारी सौंपी गई और दूसरे हिस्से में प्रदेश के 40 लाख पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर सुबह छह बजे उठाया गया। संगठन ने भोपाल से बूथ तक की पूरी चेन बनाई। बीजेपी को लगता है कि उनकी इसी रणनीति से इस बार वोटिंग ज्यादा हुई है। यही कारण है कि पार्टी इसी आधार पर अपनी सफलता को लेकर इतरा रही है। आइए आपको बताते हैं क्या थी बीजेपी की ये पूरी रणनीति।

बीजेपी ने पूरा चुनाव अमित शाह की अगुवाई में लड़ा

जेपी ने इस बार पूरा चुनाव केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अगुवाई में लड़ा है। 17 नवंबर को वोटिंग के दिन भी अमित शाह के हिसाब से नई रणनीति पर काम किया गया। ये पूरी रणनीति दिल्ली में शाह के निर्देशन में तैयार की गई। इस रणनीति को दो हिस्सों में बांटा गया। पहला हिस्सा बड़े नेताओं को जिम्मेदारी देना और दूसरे हिस्से में कार्यकर्ताओं को काम में लगाना। बूथ का ये सारा मैनेजमेंट संगठन एप के जरिए किया गया।

चुनाव से जुड़े बड़े नेताओं को क्या जिम्मेदारी दी गई 

इन नेताओं को 16 नवंबर को संगठन के मोबाइल नंबर से एक मैसेज पहुंचा। सबके पास 11-11 जनप्रतिनिधियों की सूची भेजी गई। जिसमें इनको 17 नवंबर की सुबह 6 बजे जगाने का नोट भी शामिल था। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को ऐसे लोगों के नाम दिए गए जिन्हें गणमान्य नागरिक या प्रबुद्धजन कहा जाता है। जो समाज को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को महापौरों को जगाने की जिम्मेदारी दी गई। प्रदेश चुनाव प्रभारी भूपेंद्र यादव और सह प्रभारी अश्विनी वैष्णव को सांसदों की, हितानंद शर्मा को संभागीय प्रभारी का जिम्मा सौंपा गया। सांसदों को जिला, जनपद अध्यक्षों और नगरपालिका अध्यक्षों को जगाने की जिम्मेदारी दी गई। इनके साथ ही इन जनप्रतिनिधियों को उनके नीचे के जनप्रतिनिधियों को सक्रिय करने को कहा गया। सांसदों ने उनके क्षेत्र के जिला अध्यक्षों को, महापौरों ने पार्षदों को, जिला जनपद,नगरपालिका अध्यक्षों को सरपंद,पार्षदों को एक्टीवेट करने को कहा गया।

इस तरह दो लाख कार्यकर्ताओं ने 40 लाख लोगों को जगाया

प्रदेश के बड़े नेताओं के साथ संगठन ने प्रदेश से लेकर बूथ तक कार्यकर्ताओं की पूरी चेन भी तैयार की। इसके लिए भी संगठन के नेताओं को जिम्मेदारी दी गई। प्रदेश के चालीस लाख कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के लिए सुबह छह बजे का अलार्म लगवाया गया। जिला, मंडल, शक्ति केंद्र और बूथ के अध्यक्ष और महामंत्रियों समेत दो लाख कार्यकर्ताओं को 40 लाख को जगाने का काम सौंपा गया। इसके अलावा सभी कार्यकर्ताओं से अपने घर के साथ चार अन्य घरों के वोट डालने की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके लिए सभी को वॉयस एसएमएस भी भेजे गए। प्रदेश से बूथ की संरचना कुछ इस तरह की गई। भोपाल में प्रदेश पदाधिकारियों को जिला अध्यक्षों और जिला महामंत्रियों को जगाने को कहा गया। जिला अध्यक्षों और महामंत्रियों ने मंडल के कार्यकर्ताओं को, मंडल ने शक्ति केंद्र के पदाधिकारियों को और शक्ति केंद्र ने बूथ समितियों के कार्यकर्ताओं को सुबह छह बजे जगाकर एक्टीवेट किया। इस तरह ये मैसेज पूरे चालीस लाख कार्यकर्ताओं तक पहुंचाया गया।

कांग्रेस ने वन बूथ 10 यूथ का फॉर्मूला अपनाया

 इस बार बूथ पर फोकस कांग्रेस ने भी किया। कांग्रेस ने एक बूथ दस यूथ का फॉर्मूला अपनाया। प्रदेश के सभी 64 हजार से ज्यादा बूथों पर वोट डलवाने के लिए अलग से कार्यकर्ताओं की टीम लगाई गई।

बीजेपी-कांग्रेस ले रही वोट प्रतिशत बढ़ने का श्रेय

वोट प्रतिशत बढ़ने का श्रेय बीजेपी और कांग्रेस दोनों ले रहे हैं। कांग्रेस कहती है कि ये सरकार के खिलाफ वोट डलने का इशारा है। वहीं बीजेपी का कहना है कि उनका कार्यकर्ता वोट डालने के लिए आगे आया और उसने अपने आसपास के घरों के वोट भी उनके पक्ष में डलवाए। यही कारण है कि बीजेपी अपनी संभावित सफलता मानकर इतरा रही है।

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