8वां वेतन आयोग: छत्तीसगढ़ के अधिकारी-कर्मचारियों के तेवर बढ़े, फेडरेशन ने थमाई मांगों की लंबी लिस्ट
8वें वेतन आयोग को लेकर छत्तीसगढ़ के सरकारी गलियारों में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मामला कर्मचारियों की जेब और उनके भविष्य से जुड़ा है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को अपना विस्तृत मांग-पत्र दिया है। जिसमें वेतन विसंगति, पुरानी पेंशन प्रणाली और भत्तों में भारी बढ़ोतरी जैसे मुद्दे हैं। फेडरेशन ने साफ कर दिया है कि अब लॉलीपॉप से काम नहीं चलेगा, कर्मचारियों को केंद्र के समान हक और सम्मानजनक जीवन स्तर चाहिए।
वेतन संरचना में सर्जिकल स्ट्राइक की मांग
फेडरेशन के अनुसार कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन मतिमाह 325000 निर्धारित होना चाहिए। इतना ही नहीं, कर्मचारियों ने डीए बढ़ाने की गणित दुरुस्त करने के लिए कहा है। जिसे 2.57 से बढ़ाकर न्यूनतम 3.68 करने पर जोर दिया है। इसका सीधा मतलब है कि अगर यह मांग मानी गई, तो कर्मचारियों की सैलरी में एक झटके में बड़ी उछाल आएगी। वार्षिक वेतनवृद्धि को भी 3 प्रतिशत के पुराने ढर्रे से निकालकर 5 प्रतिशत करने की मांग की है।
रायपुर बिलासपुर को चाहिए X कैटेगरी
महंगाई के दौर में फेडरेशन ने मकान किराया भत्ता को लेकर बड़ा दांव खेला है। मांग की गई है कि X कैटेगरी के शहरों के लिए 40 प्रतिशत HRA, Y कैटेगरी के लिए 30 प्रतिशत HRA, Z कैटेगरी के लिए 20 प्रतिशत HRA चाहिए।
दिलचस्प बात यह है कि फेडरेशन ने रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग-भिलाई को दिल्ली-मुंबई की तर्ज पर X कैटेगरी में शामिल करने का प्रस्ताव रखा है। साथ ही, मांग की गई है कि जैसे ही महंगाई भत्ता 50 कैटेगरी की सीमा पार करे, उसे मूल वेतन में जोड़ दिया जाए।
OPS की गूंज और 30 लाख की ग्रेच्युटी
सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के हितों को ध्यान में रखते हुए फेडरेशन ने पुरानी पेंशन योजना की बहाली की अपनी पुरानी मांग को फिर से दोहराया है। पेंशन को अंतिम आहरित वेतन का 50 प्रतिशत DA सुनिश्चित करने और ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा को बढ़ाकर 30 लाख करने का सुझाव दिया गया है। वरिष्ठ पेंशनरों के लिए उम्र के साथ अतिरिक्त पेंशन की मांग भी की गई है ताकि ढलती उम्र में उन्हें आर्थिक तंगी न झेलनी पड़े।
विशेष परिस्थितियों के लिए विशेष मांगें
छत्तीसगढ़ की भौगोलिक और सुरक्षा स्थितियों को देखते हुए मांग-पत्र में कुछ खास बिंदु जोड़े गए हैं
- 1. नक्सल प्रभावित क्षेत्र में यहां तैनात कर्मचारियों को 25 प्रतिशत विशेष जोखिम भत्ता देने की मांग।
- 2. संविदा कर्मचारी लंबे समय से संघर्ष कर रहे संविदा कर्मियों के नियमितीकरण पर जोर।
- 3. महिला सशक्तिकरण महिला कर्मचारियों के लिए चाइल्ड केयर लीव को 1000 दिन करने और दफ्तरों में क्रेच सुविधा की मांग।
5 दिवसीय कार्य सप्ताह और लंबित DA
फेडरेशन ने वर्क-लाइफ बैलेंस का हवाला देते हुए सभी विभागों में 5 डे वर्क वीक लागू करने की मांग की है। इसके साथ ही, तत्काल राहत के तौर पर केंद्र के समान लंबित 2 प्रतिशत महंगाई भत्ता एरियर सहित देय तिथि से स्वीकृत करने के निर्देश जारी करने का आग्रह किया गया है।
हमने अपनी बात पहुंचा दी है
छत्तीसगढ़ अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन के संयोजक कमल वर्मा के अनुसार 8वें वेतन आयोग के सामने रखा गया है। यह मांग-पत्र केवल सुझाव नहीं, बल्कि राज्य के लाखों कर्मचारियों की उम्मीदों का दस्तावेज है। संविदा नियमितीकरण से लेकर OPS तक हमने सरकार और आयोग दोनों तक अपनी बात पहुंचाई हैै। इसे लागू किया जाता है तो प्रशासनिक दक्षता तभी आएगी जब कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
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