अबूझमाड़ में गूंजी शिक्षा की गूंज ; पहली बार बस्ता थामकर मुस्कुराए मासूम
NEWS IN SHORT
- माओवादी प्रभाव कम होने के बाद बच्चों ने स्कूल जाना शुरू।
- 800 बच्चों का नामांकन किया गया।
- 24 नए प्राथमिक विद्यालय खोले गए।
- सुस्त्रम वेलाल जैसे बच्चों ने पहली बार शिक्षा पाई।
- मुख्यमंत्री ने इसे संरचनात्मक सफलता बताया।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में बच्चों के लिए एक नई शुरुआत हुई है। माओवादियों के प्रभाव से मुक्त होने के बाद, यहां के बच्चों ने पहली बार स्कूल जाना शुरू किया है। यह बदलाव स्कूल चलो अभियान के तहत हुआ है, जिसका उद्देश्य बच्चों का नामांकन और शिक्षा सुनिश्चित करना है।
सुस्त्रम वेलाल, जो दुसेली गांव का निवासी है, अपने परिवार का पहला बच्चा है जो स्कूल गया। जब उसे किताबों और स्टेशनरी का सेट मिला, तो वह बहुत खुश हुआ और खुशी से उसे सिर पर रखकर घर की ओर चल दिया। सुस्त्रम जैसे कई बच्चे अब शिक्षित हो रहे हैं, जिन्होंने कभी स्कूल का मुँह नहीं देखा था।
दशकों से स्कूल बंद
अबूझमाड़ क्षेत्र में दशकों तक माओवादियों का प्रभाव था, जिसके कारण यहां के स्कूल बंद पड़े थे। लेकिन अब, माओवादी गतिविधियों में कमी के बाद, प्रशासन ने 10 सालों से बंद पड़े स्कूलों को फिर से खोल दिया है। इसके अलावा, 24 नए प्राथमिक विद्यालय भी खोले गए हैं। जिससे शिक्षा की सुविधा उन क्षेत्रों में भी पहुंची है जहां पहले शिक्षा का कोई ढांचा नहीं था।
800 बच्चों का हुआ नामांकन
अबूझमाड़ के 800 बच्चों का नामांकन हुआ है। जिनमें से कई बच्चों के लिए यह पहला स्कूल अनुभव है। प्रशासन का कहना है कि यह बदलाव केवल एक संख्या नहीं, बल्कि एक संरचनात्मक सफलता का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस पहल को बहुत महत्वपूर्ण बताया और कहा, "'स्कूल चलो अभियान के साथ, अब बच्चों की आवाज़ कक्षाओं में गूंज रही है। माओवादी प्रभाव कम होने के साथ अब हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाना हमारी प्राथमिकता है।" अबूझमाड़ में शिक्षा के क्षेत्र में यह बदलाव न केवल बच्चों के लिए बल्कि पूरे समुदाय के लिए एक नई दिशा दिखाता है।
निष्कर्ष
अबूझमाड़ में माओवादी प्रभाव कम होने के बाद, 800 बच्चों का नामांकन हुआ है। यह पहल, 'स्कूल चलो अभियान' के तहत, बच्चों के लिए शिक्षा की नई राह खोल रही है। प्रशासन ने बंद पड़े स्कूलों को फिर से खोला और शिक्षा का नया अवसर प्रदान किया है।
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