अजय चंद्राकर के चचेरे भाई ने एक जमीन का दो बार लिया मुआवजा, रोशन ने 2 खसरों पर 4 बार लिए पैसे

Arun Tiwari | Apr 28, 2026, 11:27 IST
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ईडी के छापे में मुआवजा घोटाले का खुलासा हुआ, जिसमें अजय चंद्राकर के रिश्तेदारों ने एक ही जमीन पर दो बार मुआवजा लिया और गांधी परिवार ने भूमि को कई हिस्सों में बांटा।

RAIPUR : भारतमाला परियोजना में मुआवजा वितरण को लेकर हुए बड़े घोटाले की परतें खुलती जा रही हैं। ईडी ने आरोपियों के घरों पर छापामार कार्रवाई की है। आरोप है कि एक पूर्व मंत्री के रिश्तेदार भूपेंद्र चंद्राकर ने राजस्व अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर एक ही जमीन का दो बार मुआवजा ले लिया। वहीं गांधी परिवार ने प्रोजेक्ट में आ रही जमीन को 80 लोगों के नाम कर दिया। यही खेल रोशन चंद्राकर ने भी किया।



इस तरह किया गया खेल:

जानकारी के मुताबिक पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के चचेरे भाई भूपेंद्र चंद्राकर ने एक जमीन का दो बार मुआवजा लिया। आरोप है कि पहले एक खसरे पर मुआवजा लिया, फिर उसी जमीन को अलग-अलग खसरा नंबरों में दिखाकर दोबारा भुगतान हासिल कर लिया। इस प्रक्रिया में राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव भी किए गए।



इस तरह मिला मुआवजा:

दस्तावेजों के अनुसार खसरा नंबर 1259/2 की 0.0316 हेक्टेयर भूमि के लिए 75,80,461 रुपए का मुआवजा दिया गया। वहीं खसरा नंबर 1259/3 और 1259/4 के नाम पर 95 लाख 95 हजार 520 रुपए और 95 लाख 95 हजार 698 रुपए का भुगतान किया गया।



इसके अलावा, 1259/2 के एक हिस्से को दोबारा दिखाकर 0.0084 हेक्टेयर भूमि के लिए भी मुआवजा लेने की कोशिश की गई, जिसे बाद में रोका गया। कुल मिलाकर 0.1200 हेक्टेयर जमीन पर 2 करोड़ 67 लाख 71 हजार 501 रुपए का मुआवजा स्वीकृत हुआ।



2 जमीन पर चार बार मुआवजा:

नान घोटाले के आरोपी रोशन चंद्राकर को भी अलग-अलग खसरा नंबरों के जरिए मुआवजा दिया गया। खसरा नंबर 1259/6 की 0.0400 हेक्टेयर भूमि के लिए 95 लाख 95 हजार 520 रुपए, 1259/5 की 0.0353 हेक्टेयर भूमि के लिए 84 लाख 68 हजार 046 रुपए और 1502/2 के लिए भी 95 हजार 95 लाख 520 रुपए का भुगतान किया गया। एक अन्य हिस्से 1259/5 की 0.0047 हेक्टेयर भूमि पर मुआवजा रोका गया। कुल 0.1200 हेक्टेयर भूमि के लिए 2 करोड़ 76 लाख 59 हज़ार 86 रुपए की राशि तय हुई।



जमीन को टुकड़ों में बांटा:

यह भी सामने आया है कि जमीन को टुकड़ों में बांटकर मुआवजा बढ़ाने का खेल खेला गया। आरोप है कि गांधी परिवार ने जमीन के हिस्सों को छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित कर 159 खसरा को 80 लोगों में बांट दिया। इससे जमीन की कीमत करीब 29.5 करोड़ से बढ़कर 78 करोड़ रुपए तक पहुंच गई।



शिकायतकर्ता के आरोप:

शिकायतकर्ता कृष्ण कुमार साहू का कहना है कि उन्होंने इस पूरे मामले के दस्तावेज 12 दिसंबर 2022 को मुख्य सचिव को सौंपे थे। अब धीरे-धीरे इस मामले की जांच सामने आ रही है। उन्होंने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।



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