छत्तीसगढ़ में एक और टेंडर घोटाला, मंत्री के करीबी को दे दिया काम

Arun Tiwari | Jun 18, 2026, 18:20 IST
अंबिकापुर में टेंडर घोटाला 2026
अंबिकापुर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि करोड़ों रुपये का कार्य बिना ई-टेंडर प्रक्रिया अपनाए एक निजी वेंडर को सौंप दिया गया। आयोजन स्थल पर प्रशासनिक आदेश से पहले ही टेंट और अन्य तैयारियां शुरू हो चुकी थीं।

Raipur. छत्तीसगढ़ में जंबूरी पार्ट टू हो गया है। इस बार मौका अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को लेकर है। टेंडर हुआ नहीं और करोड़ों का काम दे दिया गया। पड़ताल की तो पता चला कि यह ठेकेदार मंत्री का चहेता है। मंत्री ने हाल ही में बड़ा धार्मिक आयोजन कराया। सूत्र कहते हैं कि इस धार्मिक आयोजन का ठेका इसी ठेकेदार को मिला था। मंत्री ने खुश होकर एक और ठेका दे दिया। इसमें कमाल की बात एक और है। ठेका बाद में दिया गया और काम पहले शुरू हो गया। मैदान में टेंट भी तन गए और काम भी हो गया।



भ्रष्टाचार का योग :

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के राज्य स्तरीय आयोजन को लेकर सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आयोजन की तैयारियों के बीच करोड़ों रुपये के काम के आवंटन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि करोड़ों का काम कार्य बिना टेंडर के एक निजी वेंडर को सौंप दिया गया। जबकि सरकारी नियमों के अनुसार इतनी बड़ी राशि के कार्यों के लिए ई-टेंडरिंग और प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया अपनाना अनिवार्य माना जाता है। मामले में सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि प्रशासनिक आदेश जारी होने से पहले ही आयोजन स्थल पर बड़े पैमाने पर निर्माण और टेंट लगाने का काम शुरू हो चुका था। इसे लेकर स्थानीय व्यापारियों और विभिन्न संगठनों ने प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं।



आदेश बाद में, तैयारी पहले :

जानकारी के अनुसार राज्य सरकार ने 16 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन संबंधी निर्देश जारी किए। इसके बाद 17 जून को आयोजन के लिए बजट स्वीकृत किया गया। उसी दिन देर रात करीब 11 बजे कलेक्टर कार्यालय से आदेश जारी कर लोक निर्माण विभाग (PWD) के कार्यपालन अभियंता को आयोजन का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार जब आयोजन स्थल का निरीक्षण किया गया, तब तक वहां विशाल डोम टेंट का निर्माण काफी हद तक पूरा हो चुका था। इससे यह सवाल उठने लगा कि जब प्रशासनिक आदेश और जिम्मेदारी निर्धारण की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी, तब आयोजन संबंधी काम किसके निर्देश पर शुरू कर दिया गया।



अंबिकापुर टेंडर घोटाला


करोड़ों की लागत का डोम टेंट :

योग दिवस के लिए जिस पंडाल और डोम संरचना का निर्माण किया जा रहा है, वह लगभग एक लाख वर्ग फीट क्षेत्र में फैली बताई जा रही है। आयोजन स्थल पर वॉटरप्रूफ जर्मन डोम टेंट लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। इसकी लागत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है। आलोचकों का कहना है कि इतने बड़े वित्तीय आकार वाले कार्यों में सामान्यतः विस्तृत निविदा प्रक्रिया अपनाई जाती है ताकि विभिन्न एजेंसियों को प्रतिस्पर्धा का अवसर मिले और सरकारी धन का उपयोग पारदर्शी तरीके से हो सके। लेकिन इस मामले में अब तक सार्वजनिक रूप से किसी निविदा या ई-टेंडर प्रक्रिया की जानकारी सामने नहीं आई है।



स्थानीय व्यापारियों में नाराजगी :

मामले का एक अन्य पहलू स्थानीय कारोबारियों से जुड़ा हुआ है। सरगुजा और अंबिकापुर क्षेत्र में बड़े स्तर के आयोजन करने वाले कई अनुभवी टेंट व्यवसायी और इवेंट एजेंसियां मौजूद हैं। इसके बावजूद आयोजन का कार्य स्थानीय स्तर पर उपलब्ध एजेंसियों को न देकर बाहर के वेंडर को सौंपे जाने की चर्चा है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यदि विधिवत निविदा प्रक्रिया अपनाई जाती तो क्षेत्र के व्यवसायियों को भी भागीदारी का अवसर मिलता। उनका आरोप है कि पारदर्शी प्रतिस्पर्धा के बजाय सीमित स्तर पर निर्णय लिए गए हैं, जिससे स्थानीय व्यवसाय प्रभावित हुए हैं।



मंत्री से करीबी संबंधों की चर्चा :

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि जिस एजेंसी को आयोजन संबंधी काम मिला है, उसने पूर्व में एक प्रभावशाली मंत्री के निजी धार्मिक आयोजनों में भी पंडाल और मंच व्यवस्था का कार्य किया था। इसी आधार पर विपक्षी दल और कुछ सामाजिक संगठन पक्षपात के आरोप लगा रहे हैं। पूरे मामले ने सरकारी खर्च और प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े कर दिए हैं।



प्रमुख सवाल यह है कि यदि कार्य का मूल्य करोड़ों रुपये में है, तो क्या सभी वित्तीय और तकनीकी नियमों का पालन किया गया। यदि निविदा प्रक्रिया अपनाई गई थी, तो उसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं है। और यदि आदेश जारी होने से पहले काम शुरू हुआ तो इसकी अनुमति किस स्तर पर दी गई।



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