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Raipur. नेशनल रोवर रेंजर जंबूरी आयोजन में टेंडर गड़बड़ी पर राज्य सरकार ने अपनी बचाव के लिए नया तर्क दिया है। जिसमें कहा गया है कि भारत स्काउट एंड गाइड का जेम में रजिस्ट्रेशन नहीं है इस कारण सारा काम एक समिति की स्वीकृति के जरिए करवाया जा रहा है। बता दें कि 4 दिन के इस आयोजन में 10 करोड़ रुपए खर्च होने हैं, जिसपर शुरुआती दिन से ही गड़बड़ी का आरोप लग रहा है।
इस पर पहले स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने पहले कहा था कि एनएसएस के वार्षिक आयोजन का कैलेंन्डर सालभर के लिए तैयार होता है। इसलिए हड़बड़ी और गड़बड़ी का कोई सवाल ही नहीं उठता।
सवालों पर सरकार की हामी
बालोद जिले में आज से शुरु इस राष्ट्रीय आयोजन खर्च को लेकर उठे सवालों पर सरकार ने स्वीकार किया है कि इस आयोजन के लिए जेम के माध्यम से टेंडर नहीं किया गया। सरकार का तर्क है कि एनएसएस की राष्ट्रीय इकाई यानी भारत स्काउट्स एवं गाइड्स की नेशनल बॉडी का जेम पोर्टल पर पंजीकरण नहीं होने के कारण यह प्रक्रिया अपनाना संभव नहीं था।
26 नवंबर 2025 को एनएसएस ने डीपीआई को पत्र लिखकर बता दिया था कि राष्ट्रीय संस्था का जेम आईडी पंजीकृत नहीं होने के कारण टेंडर प्रक्रिया में देरी हो रही है। ऐसे में व्यवस्थाओं के लिए जिला शिक्षा अधिकारी, बालोद को अधिकृत करने का निवेदन किया गया। इसके बाद यह काम शुरु हुआ।
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समिति के जरिए स्वीकृति
टेंडर प्रक्रिया को लेकर सरकार का कहना है कि टेंडर की शर्तों के निर्धारण के लिए कलेक्टर बालोद ने क्रय समिति गठित की है। इस समिति के अध्यक्ष अपर कलेक्टर, एडीएम बालोद हैं, जबकि जिला शिक्षा अधिकारी सचिव के रूप में शामिल हैं। अध्यक्ष और सचिव सहित कुल नौ सदस्यीय समिति गठित की गई है, जो टेंडर से संबंधित सभी प्रक्रियाओं की निगरानी कर रही है।
10 करोड़ में आयोजन
दरअसल, बालोद जिले के दुहली में 9 से 13 जनवरी तक आयोजित राष्ट्रीय जंबूरीे में लगभग 12 हजार रोवर और रेंजर शामिल हो रहे हैं। इसके अलावा विदेशों से भी रोवर, रेंजर और ऑफिशियल्स के आने की सूचना है। इनके लिए बिजली, पानी, आवास सहित सभी आवश्यक तैयारियां राज्य इकाई द्वारा की गई हैं, देशभर से लगभग 1500 स्टाफ की तैनाती की गई है। शासन द्वारा जंबूरी के लिए कुल 10 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है, जिसमें से 5 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति पहले ही दी जा चुकी है, जबकि शेष 5 करोड़ रुपये की मांग शासन से की गई है।
सवाल जस का तस
राज्य सरकार ने टेंडर विवाद पर सफाई तैयार कर ली है लेकिन इस सफाई ने नया सवाल उठा दिया है। वह यह कि भारत स्काउट्स एंड गाइड 1969 की संस्था है। हर साल कई बड़े आयोजन करती है। प्रत्येक आयोजन में करोड़ों रुपए खर्च होते हैं। क्या उन सभी के लिए नियमों को दरकिनार कर खरीदी की जाती है?
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