मैं जेल में होता या पागलखाने में, अमित जोगी बोले, यदि सुप्रीम कोर्ट में वो न हुआ होता जो हुआ
Raipur. छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को 23 साल पुराने जग्गी हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने जोगी को हाईकोर्ट से मिली उम्रकैद और सरेंडर पर रोक लगा दी है। जोगी ने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट में यह न हुआ होता तो मैं या तो जेल में होता या पागलखाने में।
अमित ने सोशल मीडिया पर कहा कि मैं फैसले के पहले विजय की घोषणा कर रहा था, तो लोग सोच रहे होंगे कि मैं पागल हो गया हूं। वहीं अमित जोगी ने एक और बात कही। उनके पिता यानी अजीत जोगी की तस्वीर को पिंजरे में कैद कर रखा गया है। अमित जोगी अपने पुनर्जन्म की बात भी कर रहे हैं। आपको बताते हैं कि कब होगा अमित जोगी का पुनर्जन्म।
जेल या पागलखाना :
अमित ने एक्स पर पोस्ट किया कि 23 साल पुराना मुकदमा। बिना सुनवाई के दोषसिद्धि। मेरी आज़ादी दाँव पर थी। और मैं सोशल मीडिया पर विजय की घोषणा कर रहा था। आप गलत नहीं थे अगर आपने सोचा “पागल हो गए।” क्योंकि अगर 11 दिन बाद सुप्रीम कोर्ट में वह न होता जो हुआ तो जेल तो थी ही। शायद पागलखाना भी।
वह पोस्ट पागलपन नहीं था। उसका नाम है ACTUS FIDEI यानी विश्वास का कार्य। कानून में actus reus होता है वह कृत्य जो अपराध सिद्ध करता है। स्वर्ग के न्यायालय में actus fidei होता है वह कृत्य जो आज़ाद करता है। देखने से पहले बोलना। होने से पहले घोषित करना।
जो दाँव नहीं लगाता वह घोषित नहीं करता। 23 अप्रैल की शाम। ठीक 11 दिन बाद। देश की दिग्गज कानूनी हस्तियाँ एक शब्द नहीं बोलीं। सर्वोच्च न्यायालय ने खुद पूछा “बिना सुनवाई के दोषसिद्धि? यह कैसा निर्णय है? फिर मुस्कुराते हुए “आपने एक शब्द नहीं बोला और सब कुछ मिल गया! सारे आदेश निलंबित। आज़ादी बहाल।
कब होगा अमित जोगी का पुनर्जन्म :
अमित जोगी को मिली सुप्रीम राहत के बाद उनका पुनर्जन्म होने वाला है। अमित के पुनर्जन्म की तारीख 29 अप्रैल है। अमित ने कहा (Amit Jogi Statement) कि 29 अप्रैल 2026 को अपने पिताजी छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी की समाधि गौरेला स्थित ‘जोगी स्थल’ जाऊँगा, उनका आशीर्वाद लेने।
इस दिन पापा की 80वीं जयंती है। इससे उचित अवसर और क्या हो सकता था कि उन्हीं के चरणों में, मैं परम पिता परमेश्वर के असीम अनुग्रह से अपने जीवन को एक बार फिर छत्तीसगढ़ की जनता की सेवा में समर्पित करूँ। अमित ने आगे कहा कि यह दिन मेरा नया जन्म है।
पिंजरे में बंद अजीत जोगी :
अमित जोगी ने राज्य सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि मैं आजाद हो गया लेकिन पापा पिंजरे में कैद हैं। उन्होंने लिखा कि जोगी स्थल गौरेला में पापा की समाधि। फूलों से सजी, रोशनी से दमकती, लाखों दिलों में जीवित। उसी गौरेला में, उन्हीं के जन्मस्थान पर पापा की मूर्ति आज भी जाली के पिंजरे में बंद है कपड़े और प्लास्टिक में ढकी हुई, जालीदार पिंजरे में कैद।
राज्य सरकार के निर्देश पर। मैं एक स्वतंत्र नागरिक के रूप में लौट रहा हूं। पापा अभी भी कैद में हैं। यही कारण है कि 29 अप्रैल को उनके चरणों में जाना और भी आवश्यक हो जाता है।
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