उम्रकैद पर स्टे के बाद बोले अमित जोगी, थैंक यू गॉड, पहले ही तैयार थी राहत की स्क्रिप्ट
Arun Tiwari | Apr 23, 2026, 13:08 IST
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अमित जोगी को राम अवतार जग्गी हत्या मामले में उम्रकैद की सजा पर सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली। 23 अप्रैल को सुनवाई में उन्हें अस्थायी राहत दी गई है।
RAIPUR : पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी की 21 दिनों से चली आ रही ऊहापोह फिलहाल खत्म हो गई है। उम्रकैद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अमित ने ईश्वर को थैंक्स बोला है। अमित ने कहा कि सारी महिमा ईश्वर की है। उन्होंने लोगों की प्रार्थना के लिए भी आभार माना है।
सुप्रीम कोर्ट से मिले स्टे के बाद अमित जोगी ने कहा कि ईश्वर का आभारी हूँ और आप सभी का भी। इस कठिन समय में आपके प्रेम, प्रार्थना और समर्थन के लिए। सारी महिमा ईश्वर की है।
अपील,दलील,वकील। यह तीन शब्द हैं जिन पर अमित अपने जस्टिस की अटूट उम्मीद लगाए बैठे रहे। हाईकोर्ट के उम्रकैद के फैसले के बाद अमित ने राहत के लिए वो रास्ता चुना जिस पर चलने से उनको उम्मीद की किरण नहीं बल्कि उम्मीद का सूरज दिखाई दिया। दिल्ली में अमित ने कांग्रेस नेताओं समेत उन बड़े अधिवक्ताओं से मुलाकात की जो कांग्रेस से जुड़े रहे हैं। अमित को लगा कि वे ही उनको राहत दिलवा सकते हैं।
अमित उनसे मिले और उनके मिलने और पिता अजीत की किताब सपनों का सौदागर उनको भेंट की। यह फोटो सार्वजनिक हुए। उनके पक्ष में मुकुल रोहतगी,कपिल सिब्बल और विवेक तन्खा जैसे नामी गिरामी वकील खड़े हुए। यही वो कारण हैं जिनसे अमित को पूरी उम्मीद हो गई कि अब काम बन जायेगा।
इस मामले में तीन बार सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई हुई। तीसरी सुनवाई में जोगी को से मिल पाया। इन सब परिस्थितियों को देखते द सूत्र ने पहले ही यह बताया कि हुए अमित को राहत मिलेगी। यह भले ही फौरी राहत हो लेकिन अमित के लिए बड़ी राहत है।
अमित का भाग्य 23 डिग्री घूम गया । 23 नंबर उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा आंकड़ा बन गया। समय का पहिया ऐसा घूमा है कि पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित को 23 साल पहले ले गया है।
4 जून 2003 को राजधानी रायपुर में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे, जबकि अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 आरोपियों को सजा सुनाई गई थी। 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था।
इस फैसले के खिलाफ जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। जिस पर पहले अमित जोगी के पक्ष में स्टे मिला। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेज दिया। करीब दो साल पहले हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस हत्याकांड में दोषी ठहराए गए अन्य आरोपियों की अपील खारिज करते हुए उनकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था।
इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने CBI की अपील स्वीकार करते हुए मामले को दोबारा हाईकोर्ट भेजा, ताकि विस्तृत सुनवाई हो सके। शुरुआती जांच में पुलिस पर पक्षपात और ढिलाई के आरोप लगे थे, जिसके बाद राज्य सरकार ने जांच CBI को सौंप दी थी। CBI ने अपनी जांच में अमित समेत कई लोगों पर हत्या और साजिश के आरोप लगाए थे। उस समय पर्याप्त सबूत न मिलने के चलते उन्हें बरी कर दिया गया था। 2 अप्रैल को अमित को हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई। इस फैसले के खिलाफ अमित सुप्रीम कोर्ट गए और कोर्ट ने उनको से दे दिया।
सरेंडर नहीं करेंगे अमित जोगी, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर दिया स्टे
अमित जोगी के भाग्य का फैसला आज, क्या रोहतगी, सिब्बल और तन्खा की दलीलों में छिपा है राहत का राज
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अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत, अगली सुनवाई 23 अप्रैल को, स्टे पर होगा फैसला
स्टे के बाद क्या बोले जोगी:
राहत की ये स्क्रिप्ट :
अमित उनसे मिले और उनके मिलने और पिता अजीत की किताब सपनों का सौदागर उनको भेंट की। यह फोटो सार्वजनिक हुए। उनके पक्ष में मुकुल रोहतगी,कपिल सिब्बल और विवेक तन्खा जैसे नामी गिरामी वकील खड़े हुए। यही वो कारण हैं जिनसे अमित को पूरी उम्मीद हो गई कि अब काम बन जायेगा।
इस मामले में तीन बार सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई हुई। तीसरी सुनवाई में जोगी को से मिल पाया। इन सब परिस्थितियों को देखते द सूत्र ने पहले ही यह बताया कि हुए अमित को राहत मिलेगी। यह भले ही फौरी राहत हो लेकिन अमित के लिए बड़ी राहत है।
23 डिग्री घूमा जोगी का भाग्य :
- 23 साल पुराना राम अवतार जग्गी हत्याकांड
- 23 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
- 23 अप्रैल ही ही थी सरेंडर की मुकर्रर तारीख
- 23 अप्रैल को ही मिला अमित जोगी को स्टे
जग्गी हत्याकांड का पूरा मामला :
इस फैसले के खिलाफ जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। जिस पर पहले अमित जोगी के पक्ष में स्टे मिला। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेज दिया। करीब दो साल पहले हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस हत्याकांड में दोषी ठहराए गए अन्य आरोपियों की अपील खारिज करते हुए उनकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था।
इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने CBI की अपील स्वीकार करते हुए मामले को दोबारा हाईकोर्ट भेजा, ताकि विस्तृत सुनवाई हो सके। शुरुआती जांच में पुलिस पर पक्षपात और ढिलाई के आरोप लगे थे, जिसके बाद राज्य सरकार ने जांच CBI को सौंप दी थी। CBI ने अपनी जांच में अमित समेत कई लोगों पर हत्या और साजिश के आरोप लगाए थे। उस समय पर्याप्त सबूत न मिलने के चलते उन्हें बरी कर दिया गया था। 2 अप्रैल को अमित को हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई। इस फैसले के खिलाफ अमित सुप्रीम कोर्ट गए और कोर्ट ने उनको से दे दिया।
जग्गी हत्याकांड की टाइमलाइन :
- 2003- रायपुर में रामअवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या
- 2003-04 - मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई
- 2004-05- सीबीआई ने अमित समेत 29 लोगों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट को सौंपी
- ट्रायल कोर्ट ने 28 आरोपियों को दोषी करार दिया और अमित को बरी कर दिया
- सीबीआई ने अमित को बरी किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की
- सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मामला दोबारा खोला गया
- 2026 में हाईकोर्ट में दोबारा सुनवाई,11 हजार पन्नों की चार्जशीट पर हुई सुनवाई
- अप्रैल 2026,हाईकोर्ट ने अमित को दोषी करार दिया तीन सप्ताह में सरेंडर का आदेश
- 2 अप्रैल को अमित आजीवन कारावास की सजा
- जोगी ने सुप्रीम कोर्ट ने अपील की, 20 अप्रैल को इस मामले में सुनवाई हुई
- सुप्रीम कोर्ट ने 23 अप्रैल सुनवाई की अगली तारीख दी
- 23 अप्रैल ही अमित के सरेंडर की आखिरी तारीख
- 23 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने अमित को उम्रकैद की सजा पर स्टे
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