अमित जोगी के भाग्य का फैसला आज, क्या रोहतगी, सिब्बल और तन्खा की दलीलों में छिपा है राहत का राज

Arun Tiwari | Apr 23, 2026, 09:15 IST
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अमित जोगी की किस्मत का फैसला आज, सुप्रीम कोर्ट में जग्गी हत्याकांड की सुनवाई जारी है। उम्रकैद सजा निलंबन की याचिका पर 23 अप्रैल को अंतिम निर्णय होगा।

RAIPUR : छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी की किस्मत का फैसला आज यानी 23 अप्रैल को होने वाला है। जग्गी हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट में पिछली 20 अप्रैल को सुनवाई हुई थी। जिसे 23 अप्रैल तक के लिए बढ़ा दिया गया था। अमित जोगी ने कोर्ट में दो याचिकाएं लगाई थीं जिनको एक कर दिया गया है। आज उन दोनों मामलों की सुनवाई है जिसमें उम्रकैद की सजा निलंबित करने और इस पर स्टे देने की अपील की गई है। 23 साल पुराने मामले में 23 तारीख ही उनके सरेंडर की आखिरी तारीख है। यानी अमित जोगी अपनी किस्मत के फैसले से बस एक कदम दूर हैं।

Kapil Sibal and Amit Jogi
Kapil Sibal and Amit Jogi


क्या जोगी का जागेगा भाग्य:

अपील,दलील,वकील। यह तीन शब्द हैं जिन पर अमित जोगी अपने जस्टिस की अटूट उम्मीद लगाए बैठे हैं। हाईकोर्ट के उम्रकैद के फैसले के बाद अमित जोगी ने राहत के लिए वो रास्ता चुना जिस पर चलने से उनको उम्मीद की किरण नहीं बल्कि उम्मीद का सूरज दिखाई दिया। सूत्रों की मानें तो दिल्ली में अमित ने कांग्रेस नेताओं समेत उन बड़े अधिवक्ताओं से मुलाकात की जो कांग्रेस से जुड़े रहे हैं। अमित को लगा कि वे ही उनको राहत दिलवा सकते हैं। अमित उनसे मिले और उनके मिलने और पिता अजीत जोगी की किताब सपनों का सौदागर उनको भेंट की। यह फोटो सार्वजनिक हुए। अब उनके पक्ष में मुकुल रोहतगी,कपिल सिब्बल और विवेक तन्खा जैसे नामी गिरामी वकील खड़े हैं। यही वो कारण हैं जिनसे अमित जोगी पूरी उम्मीद लगाए बैठे हैं। इस मामले में तीन बार सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई टल चुकी है। यानी इनको अपनी बात रखने का पर्याप्त समय भी मिल गया है। सवाल यही है कि इन सब परिस्थितियों को देखते हुए क्या ये माना जाए कि अमित जोगी को राहत मिल सकती है।

23 डिग्री घूमा जोगी का भाग्य :

अमित जोगी का भाग्य 23 डिग्री घूम गया है। 23 नंबर उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा आंकड़ा बन गया है। समय का पहिया ऐसा घूमा है कि पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को 23 साल पहले ले गया है। अमित जोगी की किस्मत का फैसला बस एक कदम दूर है। 23 साल पुराने राम अवतार जग्गी हत्याकांड की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 23 अप्रैल को है और अमित जोगी के सरेंडर का अंतिम दिन भी 23 अप्रैल ही है। अमित जोगी कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने उनके दोनों मामलों आजीवन कारावास की सजा से निलंबन और उम्रकैद पर रोक को एक कर एक ही दिन में सुनवाई के लिए रखा है। जोगी की नजर में यह जस्टिस से एक कदम पास आने का रास्ता है।

जग्गी हत्याकांड का पूरा मामला :

4 जून 2003 को राजधानी रायपुर में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे, जबकि अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 आरोपियों को सजा सुनाई गई थी। 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था।

इस फैसले के खिलाफ जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। जिस पर पहले अमित जोगी के पक्ष में स्टे मिला। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेज दिया। करीब दो साल पहले हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस हत्याकांड में दोषी ठहराए गए अन्य आरोपियों की अपील खारिज करते हुए उनकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने CBI की अपील स्वीकार करते हुए मामले को दोबारा हाईकोर्ट भेजा, ताकि विस्तृत सुनवाई हो सके।

शुरुआती जांच में पुलिस पर पक्षपात और ढिलाई के आरोप लगे थे, जिसके बाद राज्य सरकार ने जांच CBI को सौंप दी थी। CBI ने अपनी जांच में अमित जोगी समेत कई लोगों पर हत्या और साजिश के आरोप लगाए थे। हालांकि उस समय पर्याप्त सबूत न मिलने के चलते उन्हें बरी कर दिया गया था, लेकिन अब अमित जोगी को हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई।

जग्गी हत्याकांड की टाइमलाइन :

2003- रायपुर में रामअवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या
2003-04 - मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई
2004-05- सीबीआई ने अमित जोगी समेत 29 लोगों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट को सौंपी

- ट्रायल कोर्ट ने 28 आरोपियों को दोषी करार दिया और अमित जोगी को बरी कर दिया
- सीबीआई ने अमित जोगी को बरी किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की
- सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मामला दोबारा खोला गया
- 2026 में हाईकोर्ट में दोबारा सुनवाई,11 हजार पन्नों की चार्जशीट पर हुई सुनवाई
- अप्रैल 2026,हाईकोर्ट ने अमित जोगी को दोषी करार दिया तीन सप्ताह में सरेंडर का आदेश
- 2 अप्रैल को अमित जोगी आजीवन कारावास की सजा
- अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट ने अपील की, 20 अप्रैल को इस मामले में सुनवाई हुई
- सुप्रीम कोर्ट ने 23 अप्रैल सुनवाई की अगली तारीख दी
- 23 अप्रैल ही अमित जोगी के सरेंडर की आखिरी तारीख




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