अजीत जोगी ने कहा था CBI जांच की डिमांड छोड़ो डॉलर में तौल दूंगा, अमित जोगी चुटकी बजाकर बोले मैं असली मुख्यमंत्री ये तो बस नाम के
Arun Tiwari | Apr 13, 2026, 15:54 IST
raipur jaggi murder case satish jaggi about amit jogi
एनसीपी नेता रामावतार जग्गी हत्याकांड से जुड़े पुराने मामले में सतीश जग्गी ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी पर सीबीआई जांच रोकने के लिए दबाव, और राजनीतिक ऑफर देने के आरोप लगाए हैं।
Raipur. छत्तीसगढ़ में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी के पुत्र सतीश जग्गी ने सोशल मीडिया इंटरव्यू में एक बड़ा खुलासा किया है। सतीश जग्गी ने कहा कि पिता की हत्या होने के बाद उनको तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने सीएम हाउस में बुलाया था। उनके सामने कुछ ऐसे ऑफर रखे गए जिससे किसी का भी ईमान डगमगा सकता था।
लेकिन मैं अपनी बात पर अडिग रहा। ये ऑफर उनको पिता की हत्या की सीबीआई जांच की डिमांड न करने के लिए दिए गए थे। उस दौरान अमित जोगी ने चुटकी बजाकर कहा कि मैं ही असली सीएम हूं।
साल 2003 में एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी को बीच सड़क पर गोली मार दी गई। ये राजनीतिक हत्या मानी गई। उनके पुत्र सतीश जग्गी ने पिता की हत्या की जांच के लिए सीबीआई इन्क्वायरी की मांग की। इस समय राजनीति का चक्र बहुत तेजी से चला। सतीश जग्गी ने एक सोशल मीडिया पर दिए इंटरव्यू में उस समय के कुछ राज से पर्दा हटाया है।
सतीश जग्गी ने कहा कि उनको सीएम हाउस में बुलाया गया। जहां पर तत्कालीन सीएम अजीत जोगी ने उनसे बात की। अजीत जोगी ने कहा कि राज्यसभा की एक सीट खाली है, बस तुम सीबीआई जांच की डिमांड छोड़ दो। सतीश जग्गी ने कहा कि वे एक व्यापारी हैं, उनको राजनीति नहीं करनी है।
तब अजीत जोगी ने कहा कि व्यापार के लिए क्या करना है, कहो तो तुमको डॉलर या पाउंड में तौल दूं। इसी दौरान अमित वहां आते हैं। अमित ने चुटकी बजाते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ का असली मुख्यमंत्री मैं हूं, ये तो सिर्फ नाम के मुख्यमंत्री हैं।
अमित जोगी को बिलासपुर हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। 23 अप्रैल को उनकी सरेंडर की तारीख खत्म हो रही है। वहीं अमित ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सुप्रीम कोर्ट 20 अप्रैल को इस मामले की सुनवाई करेगा। या तो सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलेगी या फिर हाईकोर्ट की सजा पर सुप्रीम मुहर लगेगी, यह तो 20 अप्रैल को कोर्ट के फैसले के बाद सामने आएगा।
अमित यह कह चुके हैं कि हाईकोर्ट ने उनको सुने बिना सजा मुकर्रर कर दी। यह उनके साथ अन्याय हुआ है। सुप्रीम कोर्ट से उनको न्याय की पूरी उम्मीद है। सतीश जग्गी का कहना है कि यह सब अमित के इशारे पर हुआ और अब उनकी 23 साल पुरानी इंसाफ की लड़ाई पूरी हुई है।
4 जून 2003 को राजधानी रायपुर में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे, जबकि अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 आरोपियों को सजा सुनाई गई थी।
31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। जिस पर पहले अमित के पक्ष में स्टे मिला। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेज दिया।
करीब दो साल पहले हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस हत्याकांड (Jaggi Murder Case) में दोषी ठहराए गए अन्य आरोपियों की अपील खारिज करते हुए उनकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने CBI की अपील स्वीकार करते हुए मामले को दोबारा हाईकोर्ट भेजा, ताकि विस्तृत सुनवाई हो सके।
शुरुआती जांच में पुलिस पर पक्षपात और ढिलाई के आरोप लगे थे, जिसके बाद राज्य सरकार ने जांच CBI को सौंप दी थी। CBI ने अपनी जांच में अमित समेत कई लोगों पर हत्या और साजिश के आरोप लगाए थे। हालांकि उस समय पर्याप्त सबूत न मिलने के चलते उन्हें बरी कर दिया गया था, लेकिन अब अमित को हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है।
2003 - रायपुर में रामअवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या
2003-04 - मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई
2004-05 - सीबीआई ने अमित समेत 29 लोगों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट को सौंपी
ट्रायल कोर्ट ने 28 आरोपियों को दोषी करार दिया और अमित को बरी कर दिया
सीबीआई ने अमित को बरी किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मामला दोबारा खोला गया
2026 में हाईकोर्ट में दोबारा सुनवाई, 11 हजार पन्नों की चार्जशीट पर हुई सुनवाई
अप्रैल 2026, हाईकोर्ट ने अमित को दोषी करार दिया, तीन सप्ताह में सरेंडर का आदेश, आजीवन कारावास की सजा
अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, 20 अप्रैल को इस मामले में सुनवाई
23 साल पुराने जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अमित जोगी को उम्रकैद
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पूर्व सीएम के पुत्र अमित जोगी का 23 अप्रैल को ना हो सरेंडर, सुप्रीम राहत के लिए उतारे सिब्बल,रोहतगी और तन्खा जैसे धुरंधर
रामावतार जग्गी हत्याकांड पर हाईकोर्ट में अंतिम सुनवाई, अमित जोगी के वकील ने मांगा समय
लेकिन मैं अपनी बात पर अडिग रहा। ये ऑफर उनको पिता की हत्या की सीबीआई जांच की डिमांड न करने के लिए दिए गए थे। उस दौरान अमित जोगी ने चुटकी बजाकर कहा कि मैं ही असली सीएम हूं।
राज्यसभा चाहिए या डॉलर :
सतीश जग्गी ने कहा कि उनको सीएम हाउस में बुलाया गया। जहां पर तत्कालीन सीएम अजीत जोगी ने उनसे बात की। अजीत जोगी ने कहा कि राज्यसभा की एक सीट खाली है, बस तुम सीबीआई जांच की डिमांड छोड़ दो। सतीश जग्गी ने कहा कि वे एक व्यापारी हैं, उनको राजनीति नहीं करनी है।
तब अजीत जोगी ने कहा कि व्यापार के लिए क्या करना है, कहो तो तुमको डॉलर या पाउंड में तौल दूं। इसी दौरान अमित वहां आते हैं। अमित ने चुटकी बजाते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ का असली मुख्यमंत्री मैं हूं, ये तो सिर्फ नाम के मुख्यमंत्री हैं।
अमित जोगी जाएंगे या बचेंगे :
अमित यह कह चुके हैं कि हाईकोर्ट ने उनको सुने बिना सजा मुकर्रर कर दी। यह उनके साथ अन्याय हुआ है। सुप्रीम कोर्ट से उनको न्याय की पूरी उम्मीद है। सतीश जग्गी का कहना है कि यह सब अमित के इशारे पर हुआ और अब उनकी 23 साल पुरानी इंसाफ की लड़ाई पूरी हुई है।
जग्गी हत्याकांड का पूरा मामला :
31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। जिस पर पहले अमित के पक्ष में स्टे मिला। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेज दिया।
करीब दो साल पहले हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस हत्याकांड (Jaggi Murder Case) में दोषी ठहराए गए अन्य आरोपियों की अपील खारिज करते हुए उनकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने CBI की अपील स्वीकार करते हुए मामले को दोबारा हाईकोर्ट भेजा, ताकि विस्तृत सुनवाई हो सके।
शुरुआती जांच में पुलिस पर पक्षपात और ढिलाई के आरोप लगे थे, जिसके बाद राज्य सरकार ने जांच CBI को सौंप दी थी। CBI ने अपनी जांच में अमित समेत कई लोगों पर हत्या और साजिश के आरोप लगाए थे। हालांकि उस समय पर्याप्त सबूत न मिलने के चलते उन्हें बरी कर दिया गया था, लेकिन अब अमित को हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है।
जग्गी हत्याकांड की टाइमलाइन :
2003-04 - मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई
2004-05 - सीबीआई ने अमित समेत 29 लोगों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट को सौंपी
ट्रायल कोर्ट ने 28 आरोपियों को दोषी करार दिया और अमित को बरी कर दिया
सीबीआई ने अमित को बरी किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मामला दोबारा खोला गया
2026 में हाईकोर्ट में दोबारा सुनवाई, 11 हजार पन्नों की चार्जशीट पर हुई सुनवाई
अप्रैल 2026, हाईकोर्ट ने अमित को दोषी करार दिया, तीन सप्ताह में सरेंडर का आदेश, आजीवन कारावास की सजा
अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, 20 अप्रैल को इस मामले में सुनवाई
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अमित जोगी ने उठाया सवाल, बापू के हत्यारे को सुना गया तो मुझे क्यों बिना सुने सूली पर चढ़ा दिया
पूर्व सीएम के पुत्र अमित जोगी का 23 अप्रैल को ना हो सरेंडर, सुप्रीम राहत के लिए उतारे सिब्बल,रोहतगी और तन्खा जैसे धुरंधर
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