पूर्व सीएम के पुत्र अमित जोगी का 23 अप्रैल को ना हो सरेंडर, सुप्रीम राहत के लिए उतारे सिब्बल,रोहतगी और तन्खा जैसे धुरंधर
Arun Tiwari | Apr 06, 2026, 17:42 IST
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रामावतार जग्गी हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाए अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है। उनके पक्ष में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी और विवेक तन्खा ने दलीलें पेश की हैं।
Raipur. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाए पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को फिलहाल कोई फौरी राहत नहीं मिली है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की अगली तारीख 20 अप्रैल तय कर दी है। जबकि सरेंडर की डेडलाइन 23 अप्रैल है।
अमित जोगी ने उम्मीद जताई है कि उनको सुप्रीम कोर्ट से न्याय जरुर मिलेगा। अमित जोगी ने हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उन्हें दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई। याचिका में आरोप लगाया गया है कि हाईकोर्ट ने उनका पक्ष सुने बिना ही फैसला सुनाया।
पूर्व सीएम के पुत्र अमित जोगी के लिए 23 साल बाद वो मुश्किल घड़ी आ गई है जिसकी कल्पना शायद उन्होंने कभी नहीं की होगी। दो दशक बाद उनको जग्गी हत्याकांड में उम्रकैद की सजा हुई है। हाईकोर्ट के दिए गए ऑर्डर के हिसाब से सरेंडर की डेडलाइन 23 अप्रैल है। सरेंडर की नौबत न आए इसलिए अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
जोगी ने सुप्रीम राहत के लिए सीनियर एडवोकेट की फौज उतार दी है। अमित जोगी के लिए न्याय की पैरवी कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी और विवेक तन्खा जैसे धुरंधर कानून के जानकार कर रहे हैं। अमित जोगी को उम्मीद है कि उनको सुप्रीम कोर्ट से इंसाफ जरुर मिलेगा।
सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई के बाद अमित जोगी ने कहा कि आज माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के 25.03.2026 और 02.04.2026 के दोनों निर्णयों को एक साथ जोड़ते हुए 20.04.2026 को संयुक्त सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। आज की सुनवाई में मेरे पक्ष में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी, विवेक तन्खा और सिद्धार्थ दवे ने प्रभावी रूप से पक्ष रखा। मैं माननीय सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश का स्वागत करता हूँ। मुझे पूर्ण विश्वास है कि मेरे साथ हुआ गंभीर अन्याय अब सुधारा जाएगा। सत्य और न्याय की जीत अवश्य होगी।
अमित जोगी के वकील वैभव वालिया का दावा है कि 2 अप्रैल को हाईकोर्ट ने बिना सुनवाई का पूरा अवसर दिए ही उन्हें दोषी करार दे दिया। उन्होंने कहा कि केस से जुड़े 10 हजार से ज्यादा पन्नों के दस्तावेज हैं। जिनका ठीक से अध्ययन किए बिना ही निर्णय लिया गया। अब इस मामले में नई अपील दायर की जाएगी जिस पर 20 अप्रैल को विस्तृत सुनवाई होगी।
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने निचली अदालत के उस फैसले को पलट दिया था, जिसमें अमित जोगी को बरी कर दिया गया था। 78 पन्नों के अपने फैसले में हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि 4 जून 2003 को हुई राम अवतार जग्गी की हत्या की साजिश में अमित जोगी की अहम भूमिका थी। अदालत ने यह भी कहा कि जब अन्य सह-आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं, तो बिना किसी विशेष कारण के अमित जोगी को अलग राहत नहीं दी जा सकती।
हाईकोर्ट ने उन्हें आजीवन कारावास के साथ 1,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में छह महीने की अतिरिक्त कठोर कारावास की सजा भी तय की गई है।
23 साल बाद जग्गी हत्याकांड का जिन्न बोतल से बाहर निकल आया। रामावतार जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट ने अमित जोगी को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुना दी। फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए अमित जोगी ने कहा कि उन्हें पूरी सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया और यह निर्णय उनके लिए चौंकाने वाला है।
उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ न्याय नहीं हुआ है। सुनवाई के दौरान रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने कोर्ट में दावा किया कि यह हत्या एक राजनीतिक साजिश का हिस्सा थी। मामले की जांच कर रही सीबीआई ने 11 हजार पन्नों की चार्जशीट पेश की, जिसमें कई अहम सबूत शामिल बताए गए। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने CBI की अपील को मंजूरी दी और अमित जोगी को सरेंडर करने का आदेश दिया। इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था, लेकिन बाद में इस मामले को फिर से खोला गया।
23 साल पुराने जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अमित जोगी को उम्रकैद
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अमित जोगी ने उम्मीद जताई है कि उनको सुप्रीम कोर्ट से न्याय जरुर मिलेगा। अमित जोगी ने हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उन्हें दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई। याचिका में आरोप लगाया गया है कि हाईकोर्ट ने उनका पक्ष सुने बिना ही फैसला सुनाया।
जोगी,जेल और जस्टिस :
जोगी ने सुप्रीम राहत के लिए सीनियर एडवोकेट की फौज उतार दी है। अमित जोगी के लिए न्याय की पैरवी कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी और विवेक तन्खा जैसे धुरंधर कानून के जानकार कर रहे हैं। अमित जोगी को उम्मीद है कि उनको सुप्रीम कोर्ट से इंसाफ जरुर मिलेगा।
क्या बोले अमित जोगी :
अमित के वकील का दावा :
हाईकोर्ट ने पलटा फैसला :
हाईकोर्ट ने उन्हें आजीवन कारावास के साथ 1,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में छह महीने की अतिरिक्त कठोर कारावास की सजा भी तय की गई है।
23 साल बाद निकला जिन्न :
उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ न्याय नहीं हुआ है। सुनवाई के दौरान रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने कोर्ट में दावा किया कि यह हत्या एक राजनीतिक साजिश का हिस्सा थी। मामले की जांच कर रही सीबीआई ने 11 हजार पन्नों की चार्जशीट पेश की, जिसमें कई अहम सबूत शामिल बताए गए। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने CBI की अपील को मंजूरी दी और अमित जोगी को सरेंडर करने का आदेश दिया। इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था, लेकिन बाद में इस मामले को फिर से खोला गया।
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