अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत, अगली सुनवाई 23 अप्रैल को, स्टे पर होगा फैसला
Arun Tiwari | Apr 20, 2026, 12:49 IST
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अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से सोमवार को कोई अंतरिम राहत नहीं मिली। कोर्ट ने उनकी दो याचिकाओं को एक साथ टैग करते हुए अगली सुनवाई 23 अप्रैल 2026 को निर्धारित की है। इस दिन सरेंडर आदेश पर रोक को लेकर भी अहम सुनवाई होगी।
Raipur. छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को जग्गी हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट से सोमवार को कोई राहत नहीं मिली है। अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं दाखिल की हैं। इनमें से एक एसलएलपी और एक उम्रकैद के खिलाफ वैधानिक अपील है।
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों याचिकाओं को क्लब कर सुनवाई की अगली तारीख 23 अप्रैल दी है। इस दिन ही हाईकोर्ट के उम्रकैद के फैसले पर स्टे को लेकर सुनवाई होगी। हाईकोर्ट ने अमित जोगी को सरेंडर करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया था जो करीब 23 अप्रैल को खत्म हो रहा है।
अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलने की उम्मीद जताई है। सुप्रीम कोर्ट में अमित जोगी की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी,कपिल सिब्बल,विवेक तन्खा,सिद्धार्थ दवे और शशांक गर्ग सुप्रीम कोर्ट में मौजूद रहे।
जोगी ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने आज दोनों मामलों को एक साथ टैग कर दिया है। दिनांक 25.03.2026 के लीव टू अपील आदेश के विरुद्ध मेरी एसएलपी, दिनांक 02.04.2026 के उच्च न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध वैधानिक अपील। दोनों मामलों की संयुक्त सुनवाई 23 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
मेरी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी, विवेक तन्खा, सिद्धार्थ दवे और शशांक गर्ग उपस्थित हुए। मेरी कानूनी टीम का हृदय से आभार। न्यायपालिका पर मुझे पूर्ण विश्वास है।
2 अप्रैल को 23 साल बाद जग्गी हत्याकांड में बिलासपुर हाईकोर्ट ने जोगी को दोषी मानते हुए उम्र कैद की सज़ा सुनाई। तीन सप्ताह में सरेंडर का आदेश दिया। यह मियाद 23 अप्रैल तक है। जोगी ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की। इस पर सुप्रीम कोर्ट में 20 अप्रैल यानी सोमवार को सुनवाई की।
जोगी की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दो अलग-अलग याचिकाएं लगाई गईं। एक याचिका एक जज के चैंबर में लगाई गई जो कि हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक सरेंडर करने पर स्थगन के लिए थी। दूसरी याचिका सुप्रीम कोर्ट के दो नंबर कोर्ट में लगाई गई थी जिस पर दो जजों ने सुनवाई की और यह तय किया गया कि 23 अप्रैल गुरुवार को इस मामले को आगे सुना जाएगा।
अदालत में मृतक रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी के वकील भी खड़े हुए थे। इस बेंच ने सरेंडर करने से किसी रियायत देने से मना कर दिया और कहा कि जिस जज के चेंबर में यह आवेदन लगाया गया है वही इसका फैसला करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट या तो उम्रकैद पर स्टे देगी या फिर हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखेगी। यदि हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा तो जोगी को जेल जाना पड़ेगा। यदि स्टे मिला तो यह जोगी के लिए फिलहाल बड़ी राहत होगी।
4 जून 2003 को राजधानी रायपुर में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे, जबकि अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 आरोपियों को सजा सुनाई गई थी।
31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में जोगी को बरी कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। जिस पर पहले जोगी के पक्ष में स्टे मिला। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेज दिया।
करीब दो साल पहले हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस हत्याकांड में दोषी ठहराए गए अन्य आरोपियों की अपील खारिज करते हुए उनकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने CBI की अपील स्वीकार करते हुए मामले को दोबारा हाईकोर्ट भेजा, ताकि विस्तृत सुनवाई हो सके।
शुरुआती जांच में पुलिस पर पक्षपात और ढिलाई के आरोप लगे थे, जिसके बाद राज्य सरकार ने जांच CBI को सौंप दी थी। CBI ने अपनी जांच में जोगी समेत कई लोगों पर हत्या और साजिश के आरोप लगाए थे। हालांकि उस समय पर्याप्त सबूत न मिलने के चलते उन्हें बरी कर दिया गया था, लेकिन अब जोगी को हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई।
2003- रायपुर में रामअवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या
2003-04 - मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई
2004-05- सीबीआई ने जोगी समेत 29 लोगों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट को सौंपी
- ट्रायल कोर्ट ने 28 आरोपियों को दोषी करार दिया और जोगी को बरी कर दिया
- सीबीआई ने अमित जोगी को बरी किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की
- सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मामला दोबारा खोला गया
- 2026 में हाईकोर्ट में दोबारा सुनवाई,11 हजार पन्नों की चार्जशीट पर हुई सुनवाई
- अप्रैल 2026,हाईकोर्ट ने जोगी को दोषी करार दिया तीन सप्ताह में सरेंडर का आदेश,आजीवन कारावास की सजा
- जोगी ने सुप्रीम कोर्ट ने अपील की, 20 अप्रैल को इस मामले में सुनवाई
- सुप्रीम कोर्ट ने 23 अप्रैल को अगली तारीख दी
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सुप्रीम कोर्ट ने दोनों याचिकाओं को क्लब कर सुनवाई की अगली तारीख 23 अप्रैल दी है। इस दिन ही हाईकोर्ट के उम्रकैद के फैसले पर स्टे को लेकर सुनवाई होगी। हाईकोर्ट ने अमित जोगी को सरेंडर करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया था जो करीब 23 अप्रैल को खत्म हो रहा है।
अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलने की उम्मीद जताई है। सुप्रीम कोर्ट में अमित जोगी की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी,कपिल सिब्बल,विवेक तन्खा,सिद्धार्थ दवे और शशांक गर्ग सुप्रीम कोर्ट में मौजूद रहे।
क्या बोले अमित जोगी :
मेरी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी, विवेक तन्खा, सिद्धार्थ दवे और शशांक गर्ग उपस्थित हुए। मेरी कानूनी टीम का हृदय से आभार। न्यायपालिका पर मुझे पूर्ण विश्वास है।
उम्रकैद या स्टे पर होगा फैसला:
जोगी की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दो अलग-अलग याचिकाएं लगाई गईं। एक याचिका एक जज के चैंबर में लगाई गई जो कि हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक सरेंडर करने पर स्थगन के लिए थी। दूसरी याचिका सुप्रीम कोर्ट के दो नंबर कोर्ट में लगाई गई थी जिस पर दो जजों ने सुनवाई की और यह तय किया गया कि 23 अप्रैल गुरुवार को इस मामले को आगे सुना जाएगा।
अदालत में मृतक रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी के वकील भी खड़े हुए थे। इस बेंच ने सरेंडर करने से किसी रियायत देने से मना कर दिया और कहा कि जिस जज के चेंबर में यह आवेदन लगाया गया है वही इसका फैसला करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट या तो उम्रकैद पर स्टे देगी या फिर हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखेगी। यदि हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा तो जोगी को जेल जाना पड़ेगा। यदि स्टे मिला तो यह जोगी के लिए फिलहाल बड़ी राहत होगी।
जग्गी हत्याकांड का पूरा मामला :
31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में जोगी को बरी कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। जिस पर पहले जोगी के पक्ष में स्टे मिला। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेज दिया।
करीब दो साल पहले हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस हत्याकांड में दोषी ठहराए गए अन्य आरोपियों की अपील खारिज करते हुए उनकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने CBI की अपील स्वीकार करते हुए मामले को दोबारा हाईकोर्ट भेजा, ताकि विस्तृत सुनवाई हो सके।
शुरुआती जांच में पुलिस पर पक्षपात और ढिलाई के आरोप लगे थे, जिसके बाद राज्य सरकार ने जांच CBI को सौंप दी थी। CBI ने अपनी जांच में जोगी समेत कई लोगों पर हत्या और साजिश के आरोप लगाए थे। हालांकि उस समय पर्याप्त सबूत न मिलने के चलते उन्हें बरी कर दिया गया था, लेकिन अब जोगी को हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई।
जग्गी हत्याकांड की टाइमलाइन :
2003-04 - मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई
2004-05- सीबीआई ने जोगी समेत 29 लोगों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट को सौंपी
- ट्रायल कोर्ट ने 28 आरोपियों को दोषी करार दिया और जोगी को बरी कर दिया
- सीबीआई ने अमित जोगी को बरी किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की
- सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मामला दोबारा खोला गया
- 2026 में हाईकोर्ट में दोबारा सुनवाई,11 हजार पन्नों की चार्जशीट पर हुई सुनवाई
- अप्रैल 2026,हाईकोर्ट ने जोगी को दोषी करार दिया तीन सप्ताह में सरेंडर का आदेश,आजीवन कारावास की सजा
- जोगी ने सुप्रीम कोर्ट ने अपील की, 20 अप्रैल को इस मामले में सुनवाई
- सुप्रीम कोर्ट ने 23 अप्रैल को अगली तारीख दी
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