बस्तर की इमली का स्वाद चख बोले अमित शाह, यहां की इमली खट्टी नहीं, मीठी
Raipur. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बस्तर जिले के नेतानार गांव पहुंचकर शहीद वीर गुंडाधूर सेवा डेरा (जन सुविधा केंद्र) का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने बस्तर की प्रसिद्ध इमली का स्वाद चखा और कहा कि यहां की इमली खट्टी नहीं बल्कि बेहद मीठी है।
बस्तर में इमली प्रोसेसिंग सेंटर:
नेतानार स्थित सीआरपीएफ कैंप में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने इमली प्रसंस्करण केंद्र का भी निरीक्षण किया, जहां स्व सहायता समूह की महिलाएं इमली से उच्च गुणवत्ता वाला पल्प तैयार कर रही हैं। उन्होंने महिलाओं से बातचीत की। गुंडाधूर महिला स्व सहायता समूह की सदस्य लंबी नाग ने बताया कि समूह से जुड़ने के बाद वे सालाना करीब एक लाख रुपये तक की आय अर्जित कर सकेंगी।
आदिवासियों के लिए सेतु केंद्र:
गृह मंत्री ने सेवा सेतु केंद्र का भी दौरा किया। यहां ग्रामीणों को एक ही छत के नीचे आधार कार्ड, केवाईसी, मोबाइल नंबर अपडेट, ई-आधार, आय, जाति और जन्म प्रमाण पत्र जैसी ऑनलाइन सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। नेतानार की निवासी सुखदेवी ने बताया कि पहले आधार संबंधी कार्यों के लिए उन्हें 10 किलोमीटर पैदल चलकर नानगुर जाना पड़ता था, लेकिन अब गांव में ही यह सुविधा मिलने लगी है। उन्होंने अपनी पांच माह की बेटी पद्मा का आधार कार्ड भी यहीं बनवाया।
इसी तरह सोनामनी ने बताया कि वे लंबे समय से महतारी वंदन योजना के लिए ई-केवाईसी करवाना चाहती थीं, लेकिन दूरी के कारण ऐसा नहीं कर पा रही थीं। गांव में केंद्र खुलने से अब यह काम आसानी से हो गया है।
बैंक सखी की ट्रेनिंग:
सेवा केंद्र में महिलाओं को बैंक सखी का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इसके माध्यम से ग्रामीण महिलाएं गांव में ही बैंकिंग सेवाएं जैसे पैसा जमा करना, निकासी, खाता खोलना, मोबाइल नंबर अपडेट और स्वयं सहायता समूहों के लिए क्रेडिट लिंकिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा सकेंगी।
अमित शाह (Amit Shah Bastar visit) ने सिलाई प्रशिक्षण केंद्र का भी निरीक्षण किया, जहां महिलाओं को बेसिक और एडवांस सिलाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण प्राप्त कर रही विजय कुमारी ने बताया कि इससे वे भविष्य में आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार का बेहतर पालन-पोषण कर सकेंगी। धान डेकी में ग्रामीण महिलाओं को धान प्रसंस्करण से जुड़े कार्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे महिलाओं की आय बढ़ने के साथ-साथ धान की भूसी का उपयोग पशुओं के पौष्टिक आहार के रूप में भी किया जा सकेगा।
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