बस्तर की इमली चटनी को मिलेगी राष्ट्रीय पहचान, सुकमा की महिलाएं तैयार कर रहीं चटखारी चटनी

सुकमा में बस्तर की प्रसिद्ध इमली से बनी चटनी को आधिकारिक रूप से लॉन्च किया गया है। वन धन विकास केंद्र और नवा बिहान महिला स्व सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार यह उत्पाद गुणवत्ता मानकों के साथ बनाया जा रहा है।

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Arun Tiwari
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NEWS IN SHORT

  • बस्तर की प्रसिद्ध इमली से बनी चटनी को सुकमा में आधिकारिक रूप से लॉन्च किया गया।
  • वन धन विकास केंद्र के माध्यम से स्थानीय वनोपज का मूल्य संवर्धन किया जा रहा है।
  • नवा बिहान महिला स्व सहायता समूह की महिलाएं चटनी का उत्पादन कर रही हैं।
  • गुणवत्ता, स्वच्छता और आधुनिक पैकेजिंग का विशेष प्रशिक्षण महिलाओं को दिया गया।
  • पहल से महिला सशक्तिकरण, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

NEWS IN DETAIL

Raipur. बस्तर में इमली की चटनी को काफी पसंद किया जाता है । यह चटनी खाने में बहुत स्वादिष्ठ होती है । सुकमा जिले में स्थानीय संसाधनों के उपयोग से मार्केट के लिए यह नया प्रोडक्ट तैयार किया गया है। बस्तर की इमली चटनी के चटखारे अब पूरे देश के लोग ले सकेंगे। महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने यह नई पहल की है। बस्तर की प्रसिद्ध इमली से तैयार “इमली चटनी” को वन धन विकास केंद्र सुकमा के माध्यम से आधिकारिक रूप से लॉन्च किया जा रहा है। यह उत्पाद स्थानीय वनोपज का मूल्य संवर्धन करने के साथ-साथ बस्तर की पारंपरिक पहचान को राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का प्रयास है।

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 गुणवत्ता के मानकों पर तैयार हो रही चटनी : 

छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा किए गए अनुसंधान और गुणवत्ता मानकों के आधार पर यह चटनी तैयार की जा रही है। वन धन विकास केंद्र से जुड़ी नवा बिहान महिला स्व सहायता समूह की महिलाएँ इस चटनी के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। महिलाओं को निर्माण प्रक्रिया, स्वच्छता मानक, वैज्ञानिक विधि और आधुनिक पैकेजिंग संबंधी विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। प्रशिक्षण से उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार हुआ है । 

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महिलाएं बन रहीं आत्म निर्भर : 

समूह की महिलाओं में आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। बस्तर संभाग में इमली की अधिकता को देखते हुए यह पहल स्थानीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है। इमली चटनी के उत्पादन से वनोपज संग्राहकों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सकेगा, जिससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिलेगा।

वन विभाग की यह पहल महिला सशक्तिकरण, रोजगार सृजन और आजीविका संवर्धन की दिशा में एक बड़ा कदम है। आने वाले समय में यह उत्पाद न केवल छत्तीसगढ़ के घरों का स्वाद बढ़ाएगा, बल्कि सुकमा की महिलाओं की मेहनत और सफलता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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