विधानसभा में पास हुआ धर्मांतरण के खिलाफ नया कानून, सदन में मौजूद नहीं थे कांग्रेस विधायक
Raipur. छत्तीसगढ़ विधानसभा में गुरुवार को राज्य सरकार ने धर्म स्वतंत्रता से जुड़ा अहम विधेयक पेश किया, जो विधानसभा में पारित हो गया। उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने यह बिल पेश किया। इस विधेयक का मकसद बल, प्रलोभन, धोखाधड़ी या गलत जानकारी के जरिए कराए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना है।
विपक्ष का वॉकआउट :
विधेयक पेश होते ही विपक्ष ने इसका कड़ा विरोध जताया। नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा कि इस तरह के कानून देश के कई राज्यों में पहले से लागू हैं और इससे जुड़े मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। ऐसे में इस विधेयक को जल्दबाजी में पारित करना उचित नहीं होगा। महंत ने मांग की कि बिल को विस्तृत विचार-विमर्श के लिए सिलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए।
उन्होंने सुझाव दिया कि कमेटी में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के साथ-साथ सभी दलों के विधायकों को शामिल किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी कानून ऐसा नहीं होना चाहिए, जिससे समाज में विभाजन की स्थिति उत्पन्न हो। नाराज कांग्रेस विधायकों ने सदन से पूरे दिन के लिए वाकआउट कर दिया।
अजय चंद्राकर ने किया पलटवार :
बीजेपी विधायक अजय चंद्राकर ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इस तरह का कानून (Anti-conversion law) पहले कांग्रेस शासित राज्यों में भी लागू रहा है। इसलिए इसका विरोध करना राजनीतिक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान के तहत राज्य सरकार को इस प्रकार के कानून बनाने का अधिकार है। गृहमंत्री विजय शर्मा ने भी विपक्ष के तर्कों को नकारते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहीं भी राज्यों को ऐसे कानून बनाने से नहीं रोका है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक पूरी तैयारी और कानूनी प्रक्रिया के तहत लाया गया है।
चर्चा से भागा विपक्ष:
सदन की कार्यवाही संचालित कर रहे सभापति धर्मलाल कौशिक ने विपक्ष की आपत्तियों को अस्वीकार करते हुए विधेयक पेश करने की अनुमति दे दी। इसके विरोध में कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया और दिनभर की कार्यवाही का बहिष्कार किया। विपक्ष के इस कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए विजय शर्मा ने कहा कि यह वॉकआउट नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से भागना है।
इस विधेयक को पिछले सप्ताह कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है। सरकार का कहना है कि इसके जरिए मौजूदा कानून को और अधिक सख्त बनाया गया है और धर्मांतरण के नए तरीकों जैसे डिजिटल माध्यम और आर्थिक प्रलोभन को भी इसके दायरे में शामिल किया गया है। फिलहाल राज्य में “छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1968” लागू है, जिसे राज्य गठन के बाद मध्य प्रदेश से अपनाया गया था।
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