अनुज शर्मा केस : हाईकोर्ट सख्त, सोशल मीडिया से विवादित पोस्ट हटाने का आदेश
समझें क्या है पूरा मामला
- अनुज शर्मा सोशल मीडिया केस में हाईकोर्ट सख्त
- मॉर्फ्ड वीडियो और आपत्तिजनक पोस्ट हटाने के आदेश
- विधायक की याचिका पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को नोटिस
- डिजिटल प्रतिष्ठा और निजता पर हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
Raipur। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने विधायक और छत्तीसगढ़ी अभिनेता अनुज शर्मा से जुड़े सोशल मीडिया विवाद मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने सोशल मीडिया पर चल रहे कथित आपत्तिजनक पोस्ट, मॉर्फ्ड वीडियो, एडिटेड तस्वीरों और अश्लील सामग्री को हटाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और कंटेंट पोस्ट करने वालों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
मामले की सुनवाई 24 जुलाई 2026 को बिलासपुर हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने की। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए याचिका पर सुनवाई आगे बढ़ाने का फैसला लिया।
सोशल मीडिया पर बदनाम करने का आरोप
अनुज शर्मा की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया गया था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स और यूट्यूब पर कुछ फर्जी अकाउंट्स के जरिए उनके खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है।
याचिका में कहा गया कि उनकी पुरानी फिल्मों, गीतों और सार्वजनिक छवि से जुड़ी सामग्री को एडिट कर गलत तरीके से पेश किया गया। इसके अलावा मॉर्फ्ड वीडियो, आपत्तिजनक तस्वीरें और अभद्र टिप्पणियों के जरिए उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।
याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ सामग्री में उनके परिवार को भी निशाना बनाया गया और व्यक्तिगत गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणियां की गईं।
व्यक्तित्व अधिकार और निजता का मुद्दा उठा
अनुज शर्मा की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने कोर्ट में तर्क दिया कि किसी व्यक्ति की पहचान, आवाज, फोटो और छवि का बिना अनुमति इस्तेमाल करना उसके व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन है।
याचिकाकर्ता पक्ष ने संविधान के अनुच्छेद-21 का हवाला देते हुए कहा कि हर व्यक्ति को अपनी प्रतिष्ठा और गरिमा की सुरक्षा का अधिकार है। किसी व्यक्ति की पहचान का गलत इस्तेमाल कर सोशल मीडिया पर भ्रामक सामग्री फैलाना गंभीर विषय है।
हाईकोर्ट ने दिए ये निर्देश
अनुज शर्मा और उनके परिवार से जुड़ी कथित आपत्तिजनक सामग्री को हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
मॉर्फ्ड वीडियो, एडिटेड फोटो, कैरिकेचर और मानहानिकारक पोस्ट की पहुंच सीमित करने को कहा गया है।
सोशल मीडिया अकाउंट संचालकों और कंटेंट क्रिएटर्स से जवाब मांगा गया है।
बिना अनुमति किसी व्यक्ति की पहचान या छवि के इस्तेमाल को लेकर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं।
डिजिटल अधिकारों से जुड़ा अहम मामला
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक यह मामला सिर्फ एक विधायक की छवि से जुड़ा नहीं है, बल्कि डिजिटल दौर में व्यक्ति की ऑनलाइन प्रतिष्ठा और निजता की सुरक्षा से भी जुड़ा है।
सोशल मीडिया पर फर्जी सामग्री, डीपफेक और मॉर्फ्ड कंटेंट के बढ़ते मामलों के बीच हाईकोर्ट का यह आदेश महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में ऐसे मामलों में यह आदेश एक उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है।
फिलहाल कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। आगे की सुनवाई में मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर विचार किया जाएगा।
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