4 एसडीएम समेत 11 अफसरों ने किया नहर में भ्रष्टाचार, 24 करोड़ ज्यादा दिया मुआवजा
समझें क्या है पूरा मामला
- बिलासपुर में खोदी भ्रष्टाचार की नहर
- राजस्व और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की करतूत
- कुछ लोगों को कर दिया मालामाल
- मुआवजे से 24 करोड़ रुपए ज्यादा दे दिए
नहर में 24 करोड़ का घोटाला :
बिलासपुर की अरपा भैंसाझार नहर परियोजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। इस नहर से 25 हजार हेक्टेयर में सिंचाई होगी। इस नहर बनाने में जल संसाधन और राजस्व विभाग के अधिकारियों ने लोगों के साथ मिलकर बेखौफ होकर मुआवजा बांटने में खुलेआम भ्रष्टाचार किया।
इसमें कुछ लोगों को मुआवजे से 24 करोड़ रुपए ज्यादा दे दिए। इसमें तीन तरह से भ्रष्टाचार किया गया। जो जमीन नहर के अलाइनमेंट में नहीं आ रही थी उस पर भी मुआवजा दे दिया गया।
कम जमीन को ज्यादा और असिंचित जमीन को सिंचित बताकर ज्यादा मुआवजा बांटा गया। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने माना कि नहर प्रोजेक्ट में इस तरह का भ्रष्टाचार हुआ है। जिन लोगों के पास ज्यादा मुआवजा पहुंचा है उनसे अतिरिक्त राशि की वसूली की जाएगी।
इस तरह नियमों के उलट बांटा गया मुआवजा :
जो जमीन नहर एलाइनमेंट में नहीं आई - 5 करोड़ 46 लाख रुपए
जो जमीन असिंचित थी उसे सिंचित बताया - 6 करोड़ 72 लाख रुपए
कम जमीन को ज्यादा बताया - 11 करोड़ 76 लाख रुपए
कुल राशि जो मुआवजे से ज्यादा दी गई - 23 करोड़ 94 लाख रुपए
इन अधिकारियों पर आरोप :
आनंदरुप तिवारी, तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी, निलंबित
कीर्तिमान सिंह राठौर, तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी, ईओडब्ल्यू में प्रकरण,विभागीय जांच नस्तीबद्ध
राजेंद्र प्रसाद मिश्रा, तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी,ईओडब्ल्यू में कार्यवाही प्रक्रियाधीन
आरपी द्वेदी,तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी,ईओडब्ल्यू में कार्यवाही प्रक्रियाधीन
मोहन साय सिदार, तत्कालीन नायब तहसीलदार,रिटायर
हुलसिंह, तत्कालीन आरआई, कलेक्टर ने निलंबन से बहाल किया
दिलसाद अहमद, तत्कालीन पटवारी, विभागीय जांच में क्लीनचिट
मुकेश साहू, पटवारी, सेवा से बर्खास्त
आरएस नायडू, तत्कालीन ईई, ईओडब्ल्यू में कार्यवाही प्रक्रियाधीन
एके तिवारी,तत्कालीन ईई, ईओडब्ल्यू में कार्यवाही प्रक्रियाधीन
आरके राजपूत, तत्कालीन सब इंजीनियर, ईओडब्ल्यू में कार्यवाही प्रक्रियाधीन
Sootr Knowledge :
बिलासपुर जिले का यह नहर प्रोजेक्ट है। इस नहर से 25 हजार हेक्टेयर जमीन पर सिंचाई होगी। जिससे बड़ी संख्या में किसानों को फायदा होगा। इस भ्रष्टाचार के कारण यह नहर प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो पाया है। अब सरकार इसे तेजी से पूरा करने की कोशिश कर रही है।
अब आगे क्या :
सरकार ने घोटाले में शामिल कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई की है। इसके अलावा इस प्रोजेक्ट में मॉनिटरिंग बढ़ाने का दावा किया गया है। सरकार जांच रिपोर्ट के बाद अन्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई करेगी। इसमें कुल 11 एसडीएम के नाम सामने आ रहे हैं जो इस दौरान वहां पदस्थ रहे हैं।
निष्कर्ष :
सरकार की एक और परियोजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। लोगों के साथ अधिकारियों ने सांठ गांठ कर 24 करोड़ रुपए जेब में भर लिए। यह घोटाला भी भारतमाला प्रोजेक्ट की तरह हुआ।
जो जमीन नहर के आसपास भी नहीं थी उसका मुआवजा बांट दिया। कम जमीन को ज्यादा बताया गया और असिंचित जमीन को दो फसलीय बताकर 24 करोड़ रुपए ज्यादा मुआवजा ले लिया।
FAQ
- अरपा भैंसाझार नहर घोटाला क्या है?
अरपा भैंसाझार नहर घोटाला बिलासपुर की नहर परियोजना में कथित मुआवजा अनियमितताओं से जुड़ा मामला है। आरोप है कि कुछ जमीनों को गलत तरीके से पात्र बताकर, असिंचित जमीन को सिंचित दिखाकर और कम जमीन को ज्यादा दर्शाकर करीब 23 करोड़ 94 लाख रुपए का अतिरिक्त मुआवजा बांटा गया। - अरपा भैंसाझार नहर परियोजना में कितना घोटाला हुआ है?
बिलासपुर की अरपा भैंसाझार नहर परियोजना में करीब 23 करोड़ 94 लाख रुपए का अतिरिक्त मुआवजा बांटे जाने का मामला सामने आया है।
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