गिरफ्तार ननों को मिली जमानत... दुर्ग से दिल्ली तक मचा था बवाल

Kanak Durga Jha | Aug 02, 2025, 13:29 IST
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Arrested nuns got bail uproar from Durg to Delhi
Arrested nuns got bail uproar from Durg to Delhi

बिलासपुर स्थित NIA कोर्ट ने दुर्ग से गिरफ्तार ननों को आज यानी 2 अगस्त को फैसला सुनाते हुए जमानत दे दी। ननों पर धर्मांतरण और मानव तस्करी जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।

ननों की गिरफ्तारी के खिलाफ लोकसभा-राज्यसभा संसद में मामला उठा, कई राज्यों में प्रदर्शन हुए। केरल से सांसदों का प्रतिनिधिमंडल भी ननों से मिलने दुर्ग जेल पहुंचा। सांसदों ने कहा कि सरकार ने फर्जी केस में फंसाकर जेल में डाला। वहीं मेघायल CM कॉनराड संगमा ने फर्जी केस रद्द करने की अपील की। आज भी 5 सांसद जॉन ब्रिटास, जोस के मणि, पी संतोष, चंडी ओमेन, सनी जोसेफ पहुंचे थे।

प्रीति मैरी, वंदना फ्रांसिस को जमानत

दोनों ननों की गिरफ्तारी का मामला दुर्ग कोर्ट से खारिज होने के बाद बिलासपुर NIA कोर्ट पहुंच था। कैथोलिक नन प्रीति मैरी और वंदना फ्रांसिस की जमानत याचिका पर आज यानी 2 अगस्त को फैसला आया। ननों के वकील ने बताया कि पुलिस के पास सबूत नहीं हैं।

छत्तीसगढ़ समेत कई जगहों पर बवाल के बीच 3 युवतियों में से एक युवती ने मीडिया के सामने आकर बयान दिया कि, ननों ने उसके साथ कोई गलत व्यवहार नहीं किया। दुर्ग में उनसे मारपीट की गई। जबरन बयान बदलवाया गया।

NIA कोर्ट में सुनवाई

ह्यूमन ट्रैफिकिंग केस में गिरफ्तार ननों के मामले में शुक्रवार को बिलासपुर NIA कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान पीड़ित पक्ष ने अपनी दलीलें दर्ज कराईं। NIA कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया था। NIA कोर्ट के जज सिराजुद्दीन कुरैशी आज ननों की जमानत पर फैसला सुनाया।

क्या है मानव तस्करी ? मानव तस्करी एक संगठित अपराध है, जिसमें धोखे, लालच, जबरदस्ती या बलपूर्वक लोगों को उनके घर या देश से दूर ले जाकर उनका शोषण किया जाता है। इसमें जबरन मजदूरी कराना, यौन शोषण/वेश्यावृत्ति, अंग व्यापार और शादी के लिए तस्करी होती है। इस केस में जमानत "नॉन-बेलेबल" होती है। खासकर बच्चों या महिलाओं से जुड़े मामलों में FIR होते ही गिरफ्तारी अनिवार्य होती है। वहीं सजा की बात करें तो कोर्ट 10 साल की सजा, आजीवन कारावास और जुर्माना लग सकता है।
  • ननों की गिरफ्तारी का मामला संसद तक पहुंचा – केरल के सांसदों ने दुर्ग जेल में ननों से मुलाकात की
  • NIA कोर्ट से मिली जमानत – कोर्ट ने कहा, पुलिस के पास पर्याप्त सबूत नहीं
  • मेघालय के मुख्यमंत्री ने की फर्जी केस रद्द करने की अपील
  • तीनों लड़कियों में से एक ने बयान बदला – कहा, “ननों ने कुछ गलत नहीं किया, पुलिस ने दबाव बनाया”
  • रेलवे स्टेशन पर बजरंग दल के हंगामे से शुरू हुआ था विवाद – 3 लड़कियों के साथ देखे जाने पर हुआ शक


बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने एक लड़की को रोते हुए देखा था

दरअसल, 25 जुलाई को मिशनरी सिस्टर्स और एक युवक 3 लड़कियों के साथ रेलवे स्टेशन पर घूम रहे थे। इस दौरान बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने एक लड़की को रोते हुए देखा। इस दौरान उसके साथ आया युवक लड़की से कह रहा था कि तुम इतनी दूर आ गई हो, इसलिए तुम्हें जाना होगा।

इस दौरान बजरंग दल के कार्यकर्ता युवक की बातचीत सुन रहे थे। ऐसे में उन्हें मिशनरी सिस्टर और युवक पर शक हुआ। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने तीनों से पूछताछ की। पता चला कि मिशनरी सिस्टर और युवक तीनों लड़कियों को आगरा ले जा रहे थे।

बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने स्टेशन पर किया हंगामा

मिशनरी सिस्टर और युवक के बीच बातचीत पर शक होने पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने स्टेशन पर हंगामा खड़ा कर दिया। हंगामे के बीच तीनों लड़कियों, 2 ननों और उनके साथ एक युवक को जीआरपी ने पकड़ लिया और थाने ले आई।

FAQ

  1. ननों पर क्या आरोप लगाया गया था?
    उन पर मानव तस्करी का आरोप था — कहा गया कि वे तीन लड़कियों को आगरा ले जा रही थीं।
  2. पुलिस ने उन्हें कैसे पकड़ा?
    बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने रेलवे स्टेशन पर तीन लड़कियों के साथ एक युवक और ननों को देखा और शक के आधार पर हंगामा कर दिया। इसके बाद जीआरपी ने हिरासत में लिया।
  3. NIA कोर्ट में ननों के पक्ष में क्या दलीलें दी गईं?
    वकीलों ने कहा कि पुलिस के पास ठोस सबूत नहीं हैं और एक लड़की ने बयान दिया कि ननों ने उसके साथ कोई गलत व्यवहार नहीं किया।
  4. क्या यह मामला केवल कानूनी है या राजनीतिक भी बन गया है?
    मामला संसद में उठ चुका है, केरल के सांसदों और मेघालय के मुख्यमंत्री की सक्रियता से यह मामला अब राजनीतिक रंग भी ले चुका है।
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