17 जुलाई तक चलेगा विधानसभा का मानसून सत्र, 5 बैठकों में निपटेंगे अहम मुद्दे
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र की तारीखों का ऐलान हो गया है। विधानसभा सचिवालय के अनुसार छत्तीसगढ़ की छठवीं विधानसभा का 10वां सत्र 13 जुलाई से शुरू होकर 17 जुलाई तक चलेगा। पांच दिनों तक चलने वाले इस सत्र में कुल पांच बैठकें होंगी। सत्र के दौरान वित्तीय कार्यों के साथ-साथ अन्य शासकीय कार्य भी किए जाएंगे।
सरकार से जवाब मांगने का मौका
कार्यक्रम के अनुसार 13 जुलाई से 17 जुलाई तक प्रतिदिन सदन की बैठक होगी। हर दिन प्रश्नकाल और शासकीय कार्य निर्धारित किए गए हैं। विपक्ष को सरकार को घेरने और विभिन्न मुद्दों पर जवाब मांगने का अवसर मिलेगा। वहीं सरकार भी अपने विधायी और वित्तीय एजेंडे को आगे बढ़ाने की तैयारी में है।
पहले चार दिन प्रश्नकाल..
सत्र के पहले दिन 13 जुलाई से चौथे दिन 16 जुलाई तक प्रश्नोत्तर काल चलेगा। इन चार दिनों में विभागवार सवालों के जरिए विपक्ष सरकार की कार्यप्रणाली, योजनाओं और फैसलों पर जवाबदेही तय करने की कोशिश करेगा। माना जा रहा है कि कई विभागों से जुड़े लंबित मुद्दे सदन में गूंज सकते हैं।
अंतिम दिन गैर-शासकीय कार्यों के लिए दो घंटे
सत्र के अंतिम दिन 17 जुलाई को भी प्रश्नकाल और शासकीय कार्य होंगे, लेकिन इसके साथ ही अंतिम दो घंटे गैर-शासकीय कार्यों के लिए निर्धारित किए गए हैं। इस दौरान निजी संकल्प, निजी विधेयक और सदस्यों द्वारा उठाए जाने वाले अन्य विषयों पर चर्चा की जा सकेगी। यह समय अक्सर जनहित और क्षेत्रीय मुद्दों को उठाने के लिए उपयोग किया जाता है।
गरमाएंगे कई राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दे
सत्र भले ही केवल पांच दिनों का हो, लेकिन राजनीतिक रूप से इसके काफी महत्वपूर्ण रहने के आसार हैं। प्रदेश में चल रहे तबादलों, कानून-व्यवस्था, किसानों के मुद्दे, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े सवालों पर सरकार को विपक्ष के तीखे हमलों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं सरकार अपनी उपलब्धियों और योजनाओं का ब्यौरा पेश कर विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की तैयारी में है।
वित्तीय कार्यों पर भी रहेगी नजर
विधानसभा सचिवालय की प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि सत्र के दौरान वित्तीय कार्य भी संपादित किए जाएंगे। ऐसे में अनुपूरक बजट, विभागीय स्वीकृतियां या अन्य वित्तीय प्रस्ताव सदन के पटल पर रखे जा सकते हैं। सरकार के आर्थिक और विकास संबंधी एजेंडे पर भी विपक्ष की पैनी नजर रहेगी।
कम दिनों का सत्र..
पांच बैठकों वाले इस छोटे सत्र को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है। विपक्ष जहां सत्र की अवधि को लेकर सवाल उठा सकता है, वहीं सरकार इसे आवश्यक विधायी और वित्तीय कार्यों के लिए पर्याप्त बता सकती है। कुल मिलाकर 13 से 17 जुलाई तक चलने वाला यह सत्र प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक दिशा तय करने वाले कई महत्वपूर्ण मुद्दों का मंच बनने जा रहा है।
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