छत्तीसगढ़ में इलेक्शन हाईजैक! डाकिए की मिलीभगत से बैलेट गायब का आरोप, गड़बड़ी पर रोकी मतगणना
VINAY VERMA | Oct 05, 2026, 15:11 IST
छत्तीसगढ़ में वोट चोरी के कारण चुनाव स्थगित
छत्तीसगढ़ के एक प्रमुख चुनाव में वोट चोरी का आरोप लगा है। इसके बाद से शासन ने काउंटिंग रोक दी हैं। चुनाव छत्तीसगढ़ आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा परिषद का है, जो अब सवालों के घेरे में है। आरोप बेहद गंभीर हैं। इसमें केवल डॉक्टर ही वोट कर सकते हैं। पूरी प्रक्रिया डाक मतपत्रों के जरिए होती है।
लेकिन आरोप है कि जिन डॉक्टरों तक डाक मतपत्र पहुंचे ही नहीं, उनके नाम से भरे हुए बैलेट रायपुर मुख्यालय पहुंच गए।
यानी डॉक्टर को पता ही नहीं कि उसका वोट कहां गया, लेकिन उसके नाम का वोट चुनाव पेटी तक पहुंच गया। 14 प्रत्याशियों ने इसे चुनावी धांधली बताते हुए शिकायत की है। मामला इतना गंभीर हुआ कि स्वास्थ्य विभाग को मतगणना रोकनी पड़ी।
29 सितंबर को आयुष संचालनालय ने मतगणना स्थगित करने का आदेश जारी किया। विभागीय जांच समिति ने शिकायतों के साथ लगाए गए दस्तावेज और सबूतों की जांच की। समिति ने प्रथम दृष्टया चुनाव प्रक्रिया को नियमों के खिलाफ माना। इसके बाद 30 सितंबर को होने वाली मतगणना रोक दी गई। अब शिकायतों की जांच पूरी होने तक परिणाम घोषित नहीं होगा।
अब शिकायतों की आंच निर्वाचन अधिकारी और रजिस्ट्रार डॉ. संजय शुक्ला तक भी पहुंच गई है। 30 सितंबर को उनके कार्यालय से मतगणना स्थगित करने की सूचना जारी हुई। हालांकि यह कार्रवाई आयुष संचालनालय के आदेश के पालन में हुई। शिकायतकर्ताओं ने अब निर्वाचन अधिकारी की भूमिका और पूरी चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने के लिए सरकार से शिकायत करने की तैयारी की है।
इधर निर्वाचन पदाधिकारी और काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. संजय शुक्ला का कहना है कि बैलेट पेपर चोरी होने के जो आरोप लग रहे हैं वे प्रत्याशियों के तरफ से हैं। मैने व्यवस्था के तहत यह सूचना भी जारी की थी कि अगर किसी मतदाता को बैलेट पेपर नहंी मिलता तो काउंसिल को जानकारी भेजे लेकिन अभी तक ऐसी कोई शिकायत मुझे नहीं मिली है। जांच के दौरान मुझे भी अपना पक्ष रखने बुलाया है। प्रमाण पेश करुंगा।
सबसे बड़ा विवाद सरगुजा संभाग के डॉक्टरों को भेजे गए पोस्टल बैलेट को लेकर है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कई डॉक्टरों को उनके नाम के डाक मतपत्र मिले ही नहीं। इसके बावजूद उन्हीं डॉक्टरों के नाम से भरे हुए मतपत्र यानी अपना चुनाव कर परिषद मुख्यालय तक पहुंच गए। सवाल सीधा है- जब मतपत्र डॉक्टर तक पहुंचा ही नहीं तो उस पर वोट किसने डाला?
इस पूरे मामले में डाक व्यवस्था भी शक के घेरे में आ गई है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि डाक मतपत्रों के वितरण से लेकर उनके वापस पहुंचने तक की प्रक्रिया में मिलीभगत के बिना यह खेल संभव नहीं है। खास तौर पर डाक विभाग से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की मांग उठ रही है। अगर किसी मतदाता को बैलेट मिला ही नहीं और उसके नाम से वोट पड़ गया, तो बीच में मतपत्र किसके हाथ लगा, यह जांच का सबसे अहम सवाल है।
चुनाव में बैलेट पर सीरियल नंबर दर्ज होने को लेकर भी प्रत्याशियों ने गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि अगर बैलेट नंबर और मतदाता की पहचान को जोड़कर देखा जा सकता है तो वोट की गोपनीयता पर ही सवाल खड़ा हो जाता है। चुनाव में किसने किसे वोट दिया, यह सामने आने की आशंका लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए बड़ा खतरा है।
परिषद में चुनाव से पांच सदस्य चुने जाते हैं। इस बार इन पांच सीटों के लिए 19 प्रत्याशी मैदान में हैं। परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं। इनमें पांच निर्वाचित, पांच सरकार द्वारा मनोनीत और पांच पदेन सदस्य होते हैं। प्रदेश में आयुर्वेद और यूनानी पद्धति के 5 हजार से ज्यादा डॉक्टर पंजीकृत बताए गए हैं। ऐसे में परिषद में चुने जाने वाले पांच सदस्यों का महत्व भी कम नहीं है।
डॉक्टरों का आरोप है कि परिषद की पुरानी व्यवस्था में निर्वाचित सदस्यों की तुलना में सरकारी और मनोनीत सदस्यों का दबदबा बना रहता है। इसी वजह से इस चुनाव को लेकर खींचतान और ज्यादा बढ़ गई है। शिकायतकर्ताओं को आशंका है कि अगर विवादित वोटों के आधार पर नतीजा निकला तो परिषद का प्रतिनिधित्व ही सवालों में आ जाएगा।
अब 14 प्रत्याशियों की मांग साफ है, मौजूदा चुनाव को रद्द किया जाए और पूरी प्रक्रिया नए सिरे से कराई जाए। नियम 17 में सरकार को गलत तरीके या ठोस कारण सामने आने पर चुनाव रद्द कर दोबारा चुनाव कराने का अधिकार दिया गया है। इसलिए अब गेंद सरकार के पाले में है। सवाल सिर्फ मतगणना रोकने का नहीं, बल्कि यह पता लगाने का है कि डॉक्टरों के नाम पर वोट डालने का खेल आखिर किसने और कैसे खेला।
यानी डॉक्टर को पता ही नहीं कि उसका वोट कहां गया, लेकिन उसके नाम का वोट चुनाव पेटी तक पहुंच गया। 14 प्रत्याशियों ने इसे चुनावी धांधली बताते हुए शिकायत की है। मामला इतना गंभीर हुआ कि स्वास्थ्य विभाग को मतगणना रोकनी पड़ी।
डायरेक्टोरेट ने लगाया इलेक्शन पर ब्रेक
निर्वाचन अधिकारी घिरे
मतदाता की तरफ से शिकातय नहीं
सरगुजा में बड़ा खेल?
डाक व्यवस्था पर सवाल
गोपनीयता भी कटघरे में
पांच सीटों के लिए 19 प्रत्याशी मैदान में
मनोनीत सदस्यों का दबदबा
चुनाव को रद्द करने की मांग
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