बालको चिमनी कांड…3 करोड़ की बैंक गारंटी पर कोर्ट सख्त, विदेशी आरोपियों को निर्देश
Raipur. कोरबा के विशेष कोर्ट ने बहुचर्चित बालको चिमनी कांड की सुनवाई के दौरान चाइनीज कंपनी के आरोपियों को 3 करोड़ रुपए की नई बैंक गारंटी के निर्देश दिए हैं। 15 साल पहले हुए बालको चिमनी कांड में 41 लोग मारे गए थे।
बैंक गारंटी सबसे बड़ा मुद्दा
इस प्रकरण में शामिल विदेशी आरोपी वू चुनान, लियु गैक्सन और वांग वेगिंग ने पहले अदालत के निर्देश पर भारतीय स्टेट बैंक, बालको टाउनशिप शाखा में 3 करोड़ रुपए की बैंक गारंटी जमा कराई थी। यह गारंटी उनकी जमानत की शर्तों का महत्वपूर्ण हिस्सा थी, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि आरोपी न्यायिक प्रक्रिया से बच न सकें।
लेकिन अब कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल पुरानी गारंटी के भरोसे मामला आगे नहीं बढ़ेगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के परिप्रेक्ष्य में अदालत ने इन आरोपियों को निर्देश दिया है कि वे जल्द से जल्द नई बैंक गारंटी प्रस्तुत करें, ताकि उनकी जवाबदेही और कानूनी उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके।
कोर्ट ने कहा नहीं मिलेगी ढील
सुनवाई के दौरान अदालत का रुख साफ नजर आया। इस हाई प्रोफाइल केस में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैंक गारंटी जैसे वित्तीय सुरक्षा उपायों को कोर्ट अब और मजबूत करना चाहता है, ताकि आरोपी किसी भी स्थिति में कानूनी प्रक्रिया से बच न सकें।
अदालत के इस रुख को इस बात से भी समझा जा सकता है कि मामले की हर छोटी-बड़ी शर्त की बारीकी से समीक्षा की जा रही है और जरूरत पड़ने पर नए निर्देश दिए जा रहे हैं।
विदेशी कनेक्शन ने बढ़ाई गंभीरता
बालको चिमनी कांड में विदेशी आरोपियों की संलिप्तता ने इस मामले को और ज्यादा संवेदनशील और जटिल बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन होने के कारण कोर्ट को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है, और यही वजह है कि बैंक गारंटी जैसे आर्थिक सुरक्षा उपायों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
फरार आरोपी बने चुनौती
मामले की एक और बड़ी चिंता यह है कि शक्तिपाल, संजय देव और विकास भारती जैसे आरोपी अब भी फरार हैं। ऐसे में एक ओर जहां कुछ आरोपी कोर्ट की शर्तों के तहत गारंटी दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर फरार आरोपियों का मामला इस केस को और चुनौतीपूर्ण बना रहा है।
हाईकोर्ट से बढ़ा दबाव
इस पूरे मामले पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की सख्त समयसीमा का भी दबाव है। कोर्ट को 10 मई 2026 से पहले इस केस का निराकरण करना है। इसी के चलते ही सुनवाई अब तेज गति से आगे बढ़ रही है। ऐसे में बैंक गारंटी जैसे मुद्दों पर तत्काल और सख्त फैसले लिए जा रहे हैं।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल 2026 को होगी, जहां यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विदेशी आरोपी नई बैंक गारंटी पेश करते हैं या नहीं और कोर्ट इस पर क्या रुख अपनाता है।
गारंटी ही कानूनी शिकंजा
बालको चिमनी कांड में अब यह साफ हो चुका है कि मामला सिर्फ आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक जवाबदेही यानी बैंक गारंटी ही सबसे बड़ा कानूनी हथियार बन चुकी है। अदालत ने साफ कह दिया है कि नियमों का पालन नहीं करने पर सख्त कार्रवाई तय है। इस तरह आने वाले दिनों में यही गारंटी इस केस की दिशा तय कर सकती है।
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