बारनवापारा में 3 चीतलों की मौत से हड़कंप: वनमंत्री ने दिए जांच के आदेश
छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध बारनवापारा अभयारण्य में तीन चीतलों (हिरणों) की मौत का मामला सामने आने के बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया है।
वन विभाग की प्रारंभिक जांच में दो नर चीतलों की मौत आपसी संघर्ष के कारण होने की बात सामने आई है, जबकि तीसरे चीतल की मौत संदिग्ध बताई जा रही है।
विभाग को आशंका है कि उसकी मौत शिकार या किसी अन्य हमले के कारण हो सकती है।
वन विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। घटनास्थल की निगरानी बढ़ा दी गई है और वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं।
गश्त के दौरान मिले तीन चीतलों के शव
वन विभाग के अनुसार, 7 जुलाई को बारनवापारा वन परिक्षेत्र के पकरीद बीट अंतर्गत रामपुर चारागाह क्षेत्र में नियमित गश्त के दौरान दो नर चीतल मृत अवस्था में मिले थे।
इसके अगले दिन यानी 8 जुलाई को उसी क्षेत्र में एक और चीतल का शव मिला। तीनों चीतलों के शवों की जांच और पोस्टमार्टम कराया गया।
प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सभी के गले और आसपास चोट के निशान मिले हैं। घटनास्थल पर चीतलों के अंग, सींग और खाल सुरक्षित मिले हैं।
दो नर चीतलों की आपसी लड़ाई में मौत
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, दो नर चीतलों की मौत आपसी संघर्ष के कारण हुई है। दोनों चीतल आपस में लड़ाई के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए।
जांच में सामने आया कि एक चीतल का सींग दूसरे चीतल की गर्दन में फंसा हुआ था। ऐसा माना जा रहा है कि दोनों के सींग आपस में फंस गए और संघर्ष के दौरान उनकी गर्दन में गंभीर चोट आई।
वन अधिकारियों के अनुसार, दोनों चीतलों की गर्दन की हड्डी टूट गई थी और काफी मात्रा में खून बहने के कारण उनकी मौत हुई।
तीसरे चीतल की मौत पर जांच जारी
तीसरे चीतल की मौत को लेकर वन विभाग अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा है। अधिकारियों को आशंका है कि उसकी मौत शिकार के कारण हुई हो सकती है।
हालांकि, यह भी जांच की जा रही है कि कहीं वह आवारा कुत्तों के हमले का शिकार तो नहीं हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा।
वन मंत्री ने दिए जांच के आदेश
चीतलों की मौत की जानकारी सामने आने के बाद वन मंत्री केदार कश्यप ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
उन्होंने कहा है कि वन्यजीवों की सुरक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विभाग को पूरे मामले की गंभीरता से जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
रामपुर क्षेत्र में बड़ी संख्या में हैं चीतल
बारनवापारा अभयारण्य के अधीक्षक कृष्णानु चंद्राकर के अनुसार, रामपुर क्षेत्र में चीतलों की संख्या काफी अधिक है। इस इलाके में करीब तीन हजार चीतल अक्सर दिखाई देते हैं।
उन्होंने बताया कि यहां वन्यजीवों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है।
काले हिरणों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता
चीतलों की मौत के बाद आसपास रहने वाले काले हिरणों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। घटनास्थल के पास खुले चरागाह क्षेत्र में काले हिरणों का रहवास है।
यदि तीसरे चीतल की मौत आवारा कुत्तों के हमले से हुई है, तो यह वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है, क्योंकि भविष्य में काले हिरण भी ऐसे हमलों का शिकार बन सकते हैं।
वन विभाग ने किया अंतिम संस्कार
तीनों मृत चीतलों का पंचनामा और पोस्टमार्टम पूरा करने के बाद वन विभाग ने उनका विधिवत दाह संस्कार कर दिया है। फिलहाल विभाग पूरे मामले की जांच कर रहा है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।
बारनवापारा अभयारण्य में हुई यह घटना वन्यजीव सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि तीसरे चीतल की मौत का वास्तविक कारण क्या था।
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