बरगी डैम हादसे से नहीं लिया सबक ; झुमका जलाशय में सुरक्षा राम भरोसे

Aishwarya Dwivedi | May 02, 2026, 17:03 IST
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जबलपुर के बरगी बांध हादसे के बाद भी कोरिया का प्रशासन नहीं जागा। झुमका जलाशय के क्रूज में शराब की बोतलें और सुरक्षा मानकों में भारी कमी मिली है, जो बड़े हादसे को न्योता दे रही है।

NEWS IN SHORT

  • बरगी बांध हादसे के बाद भी प्रशासन ने सबक नहीं लिया।
  • झुमका जलाशय क्रूज में मिलीं शराब और बियर की बोतलें।
  • सुरक्षा मानकों और लाइफ जैकेट की व्यवस्था बेहद लचर मिली।
  • ठेका प्रणाली के तहत नियमों की सरेआम अनदेखी की जा रही।
  • पर्यटकों की जान जोखिम में डालकर चलाया जा रहा क्रूज।

NEWS IN DEATAIL

मध्यप्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी बांध में हुई दर्दनाक क्रूज दुर्घटना, जिसमें 10 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। उससे अभी देश उबरा भी नहीं था कि छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले से लापरवाही की रोंगटे खड़े कर देने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। बैकुंठपुर स्थित झुमका जलाशय में संचालित क्रूज सेवा में सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर मौत का खेल खेला जा रहा है।



नशे की गिरफ्त में जल विहार

झुमका जलाशय के क्रूज में पड़ताल के दौरान सबसे चौंकाने वाला नजारा डस्टबिन में देखने को मिला। क्रूज के भीतर रखे कचरे के डिब्बों में महंगी शराब और बियर की खाली बोतलें भारी मात्रा में मिली हैं। यह इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि क्रूज के भीतर न केवल नियमों की अनदेखी हो रही है, बल्कि खुलेआम नशेबाजी की जा रही है। पानी के बीचों-बीच नशे की हालत में पर्यटकों का होना किसी बड़े हादसे को खुला निमंत्रण है।



सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी

बरगी बांध हादसे को अभी 24 घंटे भी नहीं बीते हैं, लेकिन झुमका जलाशय के ठेका संचालकों ने इससे कोई सबक नहीं लिया है। निरीक्षण में पाया गया कि क्रूज पर पर्याप्त सुरक्षा उपकरण नहीं हैं और जो उपलब्ध हैं, उनकी स्थिति बेहद जर्जर है। ठेका प्रणाली के तहत संचालित इस क्रूज पर सरकारी विभागों का कोई नियंत्रण नजर नहीं आ रहा। बिना किसी कड़े नियमों के पर्यटकों को क्रूज पर चढ़ाया जा रहा है।



ठेका प्रणाली और अधिकारियों की चुप्पी

झुमका जलाशय में पर्यटन को बढ़ावा देने के नाम पर क्रूज का संचालन निजी ठेकेदारों को दिया गया है। आरोप है कि अधिक मुनाफे के लालच में ठेकेदार पर्यटकों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहाँ सुरक्षा नियमों का पालन केवल कागजों तक सीमित है। अधिकारियों की नाक के नीचे चल रहे इस 'मौत के सफर' पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना मिलीभगत की ओर इशारा करता है।



निष्कर्ष

झुमका जलाशय बैकुंठपुर की यह बदहाल तस्वीर यह बताने के लिए काफी है कि हम हादसों से सबक लेने में कितने पीछे हैं। शराब की बोतलें और लचर सुरक्षा व्यवस्था चीख-चीख कर कह रही हैं कि यहाँ कभी भी जबलपुर जैसा मंजर दोहराया जा सकता है। अब देखना यह होगा कि खबर के प्रकाशन के बाद जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग इस पर क्या संज्ञान लेता है, या फिर फाइलों के नीचे एक और बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा।



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