गृह मंत्री के दौरे से पहले कलेक्टर का आदेश: पेट्रोल पंपों को लॉक करना होगा 5000 लीटर डीजल
Jagdalpur। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे से पहले बस्तर कलेक्टर का एक आदेश चर्चा का विषय बन गया है बस्तर कलेक्टर ने आदेश जारी कर पेट्रोल पंपों पर 5000 लीटर डीजल सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। यह आदेश भले ही प्रशासनिक इंतजाम के तहत जारी किया गया है। जिससे सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था में कोई कसर न रह जाए, लेकिन वर्तमान में तेल संकट की वजह से सभी पेट्रोल पंप संचालकों की धड़कनें बढ़ गई हैं। विपक्ष ने इसका विरोध भी शुरु कर दिया है।
क्या कहा गया है आदेश में
अपर कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बस्तर दौरे के मद्देनजर बस्तर के तमाम पेट्रोल पंप संचालकों को 17 मई 2026 से 20 मई 2026 तक यानी पूरे चार दिनों तक अपने आउटलेट्स पर 5000 लीटर डीजल का यह विशेष कोटा सुरक्षित रखना होगा। साफ है कि इस रिजर्व स्टॉक का इस्तेमाल केवल और केवल VVIP कारकेड, सुरक्षा बलों की गाड़ियों और आपातकालीन प्रशासनिक व्यवस्था के लिए ही किया जा सकेगा।
तेल कंपनियों और खाद्य निरीक्षकों को कड़े निर्देश
प्रशासन सिर्फ कागजी आदेश जारी करके शांत नहीं बैठा है, बल्कि इसकी जमीनी मॉनिटरिंग के लिए चक्रव्यूह भी तैयार कर लिया गया है। बस्तर संभाग में सक्रिय प्रमुख तेल कंपनियों IOCL, BPCL और HPCL के सेल्स ऑफिसर्स को सीधे फॉरवर्ड की गई है। जिससे वे सक्रिय हो जाए।
खाद्य अधिकारियों को निर्देश
इसके साथ ही, जिले के सभी सहायक खाद्य अधिकारियों और खाद्य निरीक्षकोंको फील्ड पर उतरकर औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी पेट्रोल पंप पर तय मात्रा से कम डीजल मिला या वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान ईंधन की कमी के कारण कोई व्यवधान आया, तो संबंधित संचालक के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कड़ी दंडात्मक कार्रवाई होना तय है।
आखिर क्यों पड़ी इतने रिजर्व स्टॉक की जरूरत?
बस्तर की भौगोलिक स्थिति और सुरक्षा समीकरणों को समझने वाले जानते हैं कि यहां केंद्रीय मंत्रियों का दौरा सामान्य नहीं होता। गृह मंत्री के काफिले के साथ सैकड़ों सुरक्षा वाहनों, एंटी-माइन क्रूजर गाड़ियों, जैमर्स और स्थानीय पुलिस बल का एक बड़ा दस्ता चलता है। अंदरूनी इलाकों में गश्त और रूट क्लियरेंस के लिए भी भारी वाहनों को तैनात किया जाता है। ऐन वक्त पर किसी भी तरह के फ्यूल क्राइसिस से बचने के लिए प्रशासन हमेशा बैकअप प्लान तैयार रखता है। 5000 लीटर प्रति पंप का यह रिजर्व कोटा इसी रणनीति का हिस्सा है, ताकि बस्तर के सुदूर अंचलों में भी सुरक्षा काफिले की रफ्तार न थमे।
तेल सप्लाई व्यवस्था दुरुस्त
फिलहाल, इस आदेश के बाद बस्तर के पेट्रोल पंपों पर प्रशासनिक अफसरों की नजरें टिक गई हैं और तेल कंपनियों ने भी सप्लाई चेन को दुरुस्त करना शुरू कर दिया है।
क्यों हो रही है चर्चा?
वैसे तो किसी भी वीआईपी मूवमेंट के दौरान प्रशासन इस तरह की तैयारी करता है। लेकिन, छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में तेल संकट की वजह से लोग परेशान हैं। डीजल पेट्रोल की कमी के कारण से प्रदेश के कई जिलों में मारपीट तक हो रही है। प्रशासन ने लोगों की गाड़ियों में डीजल पेट्रोल भरवाने की लिमिट तय कर रखी है। ऐसे में इस तरह के आदेश से लोग अचरज में है। यही वजह है कि यह लोगों के बीच में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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