राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम में जिला पीछे, CMHO-DPM की जगह स्वीपर, आया, चौकीदार की रोकी सैलरी

VINAY VERMA | Apr 03, 2026, 19:14 IST
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बेमेतरा जिले में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की सैलरी रोकने का मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय प्रशासन और कर्मचारियों के बीच विवाद खड़ा कर दिया है। कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगई के आदेश पर लगभग 200 कर्मचारियों की मार्च महीने की वेतन राशि रोकी गई है।

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा में एक अजीब सा मामला सामने आया है, जहां राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम की डेटा एंट्री नहीं होने की दोषी स्वीपर, आया, वार्ड बॉय को बना दिया गया है। जबकि सीएमएचओ और जिला कार्यक्रम अधिकारी को क्लीन चिट मिल गई है। कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगई के आदेश पर CMHO डॉ. अमृत रोहडेलकर ने इनके सहित अन्य के मार्च महीने की सैलरी रोकने का आदेश जारी किया है।



क्या है पूरा मामला

दरअसल छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के साजा और नवागढ़ के करीब 200 अधिकारी और कर्मचारियों का मार्च का वेतन रोक दिया गया है। वेतन रोकने की कार्रवाई बेमेतरा कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगई के आदेश से हुई है। सीएमएचओ ने आदेश में कहा है कि स्वास्थ्य विभाग में उपलब्धियाँ निराशाजनक रही हैं। कलेक्टर महोदया की नाराजगी के कारण सभी की सैलरी रोकी जा रही है।



कौन सा काम रहा प्रभावित

दरअसल सभी जिलों की तरह बेमेतरा में भी प्रसव, अधत्व निरावरण, टीबी, टीकाकरण जैसे कई राष्ट्रीय कार्यक्रम चलाए जाते हैं। केंद्र को इसकी रिपोर्टिंग भेजनी होती है। कलेक्टर की बैठक में यह सामने आया कि साजा और नवागढ़ में काम हुआ, लेकिन उसकी एंट्री नहीं हुई। जिसके बाद कलेक्टर बैठक में नाराज हो गईं।



क्या बता रहे हैं कर्मचारी

कर्मचारियों का कहना है कि ये काम डेटा एंट्री ऑपरेटर का है। इन दो जगहों पर इस पद पर कर्मचारियों की कमी है। नवागढ़ में जहां 4 में से 2 पद खाली हैं, वहीं साजा में 2 की जगह 1 ही पद भरा है। साथ में इस कर्मचारी को ब्लॉक अकाउंट मैनेजर की जिम्मेदारी दे दी गई है, जिसके कारण एंट्री नहीं हो सकी है।



कौन से पद हुए प्रभावित

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर बीएमओ से लेकर डॉक्टर, सीएचओ, स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट, वार्ड बॉय, स्वीपर, आया-बाई, चौकीदार जैसे 15 से अधिक पद होते हैं। कलेक्टर के आदेश पर इन पदों पर लगभग 200 कर्मचारियों की सैलरी रोक दी गई है। जबकि जिला स्तर पर सीएमएचओ, जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला स्वास्थ्य अधिकारी को क्लीन चिट दे दी गई है। जिले में राष्ट्रीय कामों की मॉनिटरिंग इनके जिम्मे है।



कर्मचारियों में आक्रोश

कलेक्टर के इस आदेश के बाद स्थानीय अधिकारी-कर्मचारी नाराज हैं। उनका कहना है कि जिला प्रमुख होने के नाते कलेक्टर को NHM से चर्चा करनी थी। वहां से डेटा एंट्री ऑपरेटर के खाली पदों को भरवाना था। यह करवा न सकीं तो कर्मचारियों की सैलरी रोक दी जा रही है। स्वास्थ्य कर्मचारी मामले में आंदोलन करने वाले हैं।



खिलाफ मोर्चा खोलने को तैयार

छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग (CG News) के इस आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले चतुर्थ वर्ग कर्मचारी और सुरक्षाकर्मी कैसे सीधे तौर पर दोषी पाए गए। खास तौर से महिला कर्मचारियों ने असुरक्षा और विषम परिस्थितियों के बीच कार्य करने के कारण अब विभिन्न स्वास्थ्य संगठन इस आदेश के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में हैं।



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