भिलाई गोशाला केस : मृत बछड़े की खाल में भूसा भरकर गाय के आगे रखने पर बवाल
समझें क्या है परा मामला
Bhilai। भिलाई नगर निगम के अधीन संचालित कोसानाला गो आश्रय केंद्र में मृत बछड़े की खाल से पुतला बनाकर गायों का दूध निकालने का मामला सामने आया है। आरोप है कि बछड़े की खाल के भीतर भूसा भरकर उसे गाय के सामने रखा जाता था, ताकि गाय उसे अपना बच्चा समझे और दूध दे सके।
मां लक्ष्मी गौ रक्षक सेवा समिति ने बुधवार, 1 जुलाई को इस मामले की लिखित शिकायत सुपेला थाने में की है। समिति ने इसे पशुओं के साथ अमानवीय व्यवहार बताते हुए गोशाला संचालकों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ जांच तथा कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
हालांकि, गोशाला का संचालन करने वाली महिला स्व सहायता समिति ने आरोपों को खारिज किया है। समिति का कहना है कि दुधारू गाय के बछड़े की मौत होने के बाद दूध निकालने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से इस तरह के पुतले का उपयोग किया जाता रहा है।
गोशाला पहुंची समिति ने देखा पुतला
मां लक्ष्मी गौ रक्षक सेवा समिति के पदाधिकारियों के अनुसार उन्हें कोसानाला गोशाला में मृत बछड़े की खाल के उपयोग की जानकारी मिली थी। इसके बाद समिति के सदस्य मौके पर पहुंचे। वहां भूसा भरकर तैयार किया गया बछड़े जैसा पुतला मिला।
समिति का आरोप है कि जिन गायों के बछड़ों की मौत हो चुकी थी, उनसे दूध प्राप्त करने के लिए इस पुतले को उनके सामने रखा जाता था। गौ रक्षक समिति ने इस तरीके को पशु क्रूरता से जोड़ते हुए कहा कि मृत बछड़े का नियमानुसार अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए था।
समिति के अध्यक्ष सुनील यादव ने आरोप लगाया कि अधिक दूध उत्पादन और आर्थिक लाभ के उद्देश्य से मृत बछड़े की खाल का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
निगम के अधीन संचालित है गो आश्रय केंद्र
कोसानाला स्थित गो आश्रय केंद्र भिलाई नगर निगम के नियंत्रण में संचालित होता है। इसके संचालन की जिम्मेदारी नई उड़ान शहर स्तरीय समिति नामक महिला स्व सहायता समूह और एक ठेकेदार को दी गई है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार महिला समूह गोबर से खाद तैयार करने और गायों से दूध उत्पादन का काम करता है। वहीं ठेकेदार रामअवतार के जिम्मे पशुओं के लिए चारे, श्रमिकों और गोशाला की अन्य व्यवस्थाओं से जुड़े कार्य बताए गए हैं।
महिला समूह वर्ष 2020 से इस केंद्र में काम कर रहा है। वर्तमान में समूह के पास करीब 10 गाय होने की जानकारी सामने आई है। इन गायों की देखभाल और दूध निकालने का काम समूह से जुड़ी महिलाएं करती हैं।
गंदगी, चारे और पानी की व्यवस्था पर भी सवाल
गौ रक्षक समिति ने केवल मृत बछड़े की खाल से पुतला बनाने का आरोप नहीं लगाया है। समिति ने गोशाला की साफ-सफाई और पशुओं की देखरेख को लेकर भी कई सवाल उठाए हैं।
शिकायत में कहा गया है कि गोशाला के कुछ हिस्सों में गंदगी और कीचड़ फैला हुआ है। कई पशुओं को समय पर पर्याप्त चारा और पानी नहीं मिलने का भी आरोप लगाया गया है। समिति का दावा है कि ऐसी व्यवस्था से गायों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
इन आरोपों की प्रशासनिक या पशु चिकित्सा विभाग की जांच अभी सामने नहीं आई है। इसलिए गोशाला की वास्तविक स्थिति और पशुओं की देखभाल से जुड़े तथ्यों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
महिला समूह ने कहा-गलत काम नहीं किया
नई उड़ान शहर स्तरीय समिति की अध्यक्ष रेखा बघेल ने गौ रक्षक समिति के आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि जिस गाय के बछड़े की मौत हो जाती है, वह कई बार दूध देना बंद कर देती है। ऐसी स्थिति में बछड़े जैसा पुतला सामने रखकर दूध निकालने की पद्धति ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से अपनाई जाती रही है।
रेखा बघेल ने कहा कि समूह ने किसी गलत उद्देश्य से यह काम नहीं किया। उनके अनुसार यह केवल गाय का दूध निकालने की पारंपरिक प्रक्रिया है और इसे पशु क्रूरता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पुलिस जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति
मां लक्ष्मी गौ रक्षक सेवा समिति ने सुपेला पुलिस से मामले में एफआईआर दर्ज करने, गोशाला की जांच कराने और जिम्मेदार लोगों की भूमिका तय करने की मांग की है। फिलहाल पुलिस को लिखित शिकायत दी गई है। एफआईआर दर्ज होने या किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
मामले में भिलाई नगर निगम की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि गो आश्रय केंद्र उसके अधीन संचालित है। जांच में यह देखा जा सकता है कि मृत पशुओं के निस्तारण, गोशाला संचालन, साफ-सफाई और पशुओं की देखभाल से संबंधित नियमों का पालन हुआ या नहीं।
इस विवाद में एक पक्ष ने पशु क्रूरता और गोशाला में लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि संचालन समिति ने इसे परंपरागत तरीका बताया है। अब पुलिस, नगर निगम और पशुपालन विभाग की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि गोशाला में नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।
महत्वपूर्ण तथ्य
मामला भिलाई के कोसानाला गो आश्रय केंद्र का है।
मृत बछड़े की खाल में भूसा भरकर पुतला बनाया गया।
आरोप है कि पुतले से गायों का दूध निकाला जाता था।
गौ रक्षक समिति ने सुपेला थाने में शिकायत की है।
गोशाला भिलाई नगर निगम के अधीन संचालित है।
संचालन समिति ने इसे पुरानी ग्रामीण परंपरा बताया है।
FAQ
- भिलाई की गोशाला में क्या मामला सामने आया है?
कोसानाला गो आश्रय केंद्र में मृत बछड़े की खाल में भूसा भरकर पुतला बनाने का आरोप है। बताया गया कि इसका उपयोग गायों से दूध निकालने के लिए किया जाता था। - मामले की शिकायत किसने की है?
मां लक्ष्मी गौ रक्षक सेवा समिति ने सुपेला थाने में लिखित शिकायत दी है। समिति ने जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। - गोशाला संचालन समिति ने क्या जवाब दिया?
संचालन समिति ने इसे गलत काम मानने से इनकार किया है। समिति का कहना है कि बछड़े की मौत के बाद दूध निकालने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में यह पुरानी परंपरा है।
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