भिलाई निगम में आर-पार : कमिश्नर की कुर्सी पर मंडराया खतरा, महापौर और पार्षद पहुंचे हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़भिलाई नगर निगम में महापौर और आयुक्त के बीच टकराव अब अदालत की चौखट तक पहुंच गया है। निगम आयुक्त आर.के. पांडे को हटाने की मांग को लेकर महापौर नीरज पाल ने कांग्रेस पार्षदों के साथ मिलकर हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर दी है। निगम की राजनीति में लंबे समय से चल रही खींचतान अब कानूनी लड़ाई में बदलती दिख रही है। कांग्रेस के 32 पार्षदों, एमआईसी सदस्यों और महापौर ने संयुक्त रूप से अदालत में दावा किया है कि निगम आयुक्त परिषद की शक्तियों को नजरअंदाज कर मनमानी कर रहे हैं।
सामान्य सभा के प्रस्ताव पर अटका विवाद
विवाद की जड़ 25 मार्च को आयोजित सामान्य सभा की बैठक को माना जा रहा है। बैठक में आयुक्त को हटाने के पक्ष में प्रस्ताव पारित किया गया था। आरोप है कि इस प्रस्ताव को शासन तक भेजने में जानबूझकर देरी की जा रही है। कांग्रेस पार्षदों का कहना है कि सामान्य सभा सर्वोच्च निकाय होती है, लेकिन उसके निर्णयों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। इसी वजह से अब न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
आयुक्त पर वित्तीय अनियमितता के आरोप
याचिका में आयुक्त आर.के. पांडे पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। महापौर और पार्षदों का कहना है कि आयुक्त ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए कई मामलों में बिना अनुमति स्वीकृतियां दीं। सरकारी फंड के दुरुपयोग, वित्तीय अनियमितता और चुनी हुई परिषद के फैसलों की अनदेखी जैसे आरोपों का भी उल्लेख किया गया है। कांग्रेस पार्षदों का दावा है कि निगम प्रशासन में लगातार ऐसी कार्यशैली अपनाई जा रही है जिससे निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की भूमिका कमजोर हो रही है।
कलेक्टर और सचिव को भी भेजी शिकायत
महापौर नीरज पाल और सभापति बंटी गिरवर साहू इससे पहले भी प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की मांग कर चुके हैं। दोनों ने दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह और नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव को पत्र लिखकर आयुक्त की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। शिकायत में कहा गया था कि निगम के भीतर निर्णय प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और परिषद के अधिकार सीमित किए जा रहे हैं। हालांकि शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से कांग्रेस अब न्यायिक हस्तक्षेप की उम्मीद कर रही है।
महापौर परिषद में भी पारित हुआ प्रस्ताव
8 मई को हुई महापौर परिषद की बैठक में भी आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव लाया गया। बैठक में मौजूद एमआईसी सदस्यों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव का समर्थन किया। महापौर नीरज पाल का कहना है कि निगम अधिनियम के तहत कार्रवाई होना जरूरी है और यदि परिषद का निर्णय लागू नहीं होता तो लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होगी। उन्होंने कहा कि अब पूरा मामला न्यायालय के सामने है और उन्हें उम्मीद है कि अदालत चुने हुए प्रतिनिधियों के अधिकारों की रक्षा करेगी।
निगम राजनीति में बढ़ सकती है सियासी गर्मी
भिलाई नगर निगम में महापौर और आयुक्त के बीच बढ़ता विवाद आने वाले दिनों में और सियासी रंग ले सकता है। कांग्रेस इसे जनप्रतिनिधियों के अधिकारों का मुद्दा बता रही है, जबकि प्रशासनिक हलकों में इसे सत्ता और सिस्टम के टकराव के रूप में देखा जा रहा है। अब सबकी नजर हाईकोर्ट की सुनवाई और शासन की अगली कार्रवाई पर टिक गई है।
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