मंत्री के रिश्तेदार को एएसआई ने जड़े थप्पड़, केस की जानकारी मांगने पर बोला सारी नेतागिरी निकाल दूंगा
Bilaspur. बिलासपुर में अपने पुराने केस की जानकारी लेने थाने पहुंचे मंत्री के रिश्तेदार पर एएसआई ने थप्पड़ जड़ दिए। खुद को स्वास्थ्य मंत्री का रिश्तेदार बताने वाले पीड़ित का आरोप है कि संबंधित एएसआई ने न केवल उसे थप्पड़ मारे, बल्कि जेल भेजने की धमकी भी दी। घटना के बाद पुलिस विभाग ने कार्रवाई करते हुए एएसआई को निलंबित कर दिया है और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
क्या है मामला:
जानकारी के अनुसार, रतनपुर थाना क्षेत्र के बनियापारा निवासी विनोद जायसवाल 12 अप्रैल को अपने पुराने केस की जानकारी लेने थाने पहुंचे थे। वे अपने मामले की जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश करवाने का आग्रह करने गए थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात एएसआई दिनेश तिवारी से हुई। आरोप है कि बातचीत के दौरान एएसआई तिवारी अचानक नाराज हो गए और गाली-गलौज करते हुए विनोद के साथ मारपीट शुरू कर दी।
सुन्न हुआ कान:
पीड़ित विनोद जायसवाल का कहना है कि एएसआई ने उन्हें 15 से 20 थप्पड़ मारे, जिससे उनके कान में गंभीर समस्या हो गई और सुनाई देना तक प्रभावित हुआ। इतना ही नहीं, मारपीट के दौरान एएसआई ने उन्हें धमकाते हुए कहा कि “तू कितना बड़ा नेता है, तेरी सारी नेतागिरी निकाल दूंगा और तुझे जेल भिजवा दूंगा।” इस घटना के समय थाने में अन्य पुलिसकर्मी भी मौजूद थे, लेकिन किसी ने हस्तक्षेप नहीं किया।
एएसआई सस्पेंड,एफआईआर:
विनोद ने इस मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से की। शिकायत मिलने के बाद पुलिस अधीक्षक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच के आदेश दिए। प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने पर एएसआई दिनेश तिवारी को निलंबित कर दिया गया। साथ ही, पीड़ित की शिकायत के आधार पर उसी थाने में आरोपी एएसआई के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
पैसे की मांग:
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि एएसआई ने जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने के एवज में पैसे की मांग की थी। जब उन्होंने इस बात का विरोध किया और कानूनी प्रक्रिया का पालन करने की बात कही, तभी एएसआई भड़क गए और उन्होंने मारपीट शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि विनोद जायसवाल खुद को स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का रिश्तेदार बताते हैं। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी इस मामले ने पुलिस विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों में नाराजगी:
घटना के बाद स्थानीय स्तर पर भी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि थाने जैसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह की घटनाएं कानून व्यवस्था और आम नागरिकों के विश्वास को कमजोर करती हैं। फिलहाल पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है और आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी।
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