भाजयुमो की कार्यकारिणी स्थगित ; दागी चेहरों पर मचा बवाल
NEWS IN SHORT
- भाजयुमो कार्यकारिणी में विवाद
- आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं की नियुक्ति
- दो अध्यक्षों की समानांतर सूची
- कार्यकर्ताओं का असंतोष बढ़ा
- प्रदेश नेतृत्व का हस्तक्षेप
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़की राजनीति में अनुशासन के लिए जानी जाने वाली भारतीय जनता पार्टी इन दिनों अपने ही आंतरिक कलह से जूझ रही है। भिलाई भाजपा और भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) की कार्यकारिणी घोषित होते ही एक ऐसा विवाद खड़ा हुआ।
जिसने संगठन की साख पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। स्थिति यहाँ तक पहुँच गई कि कांग्रेस की तर्ज पर अब भाजपा में भी नियुक्तियों को लेकर सड़कों और सोशल मीडिया पर खींचतान देखने को मिल रही है।
आपराधिक छवि के लोगों को जगह मिलने पर आक्रोश
विवाद की मुख्य जड़ भिलाई भाजयुमो की जिला कार्यकारिणी में उन चेहरों को शामिल करना बताया जा रहा है। जिनकी पृष्ठभूमि विवादास्पद रही है। जैसे ही सूची सार्वजनिक हुई, वरिष्ठ कार्यकर्ताओं और पुराने निष्ठावान नेताओं ने मोर्चा खोल दिया। आरोप है कि कार्यकारिणी में कुछ ऐसे लोगों को पदाधिकारी बना दिया गया, जिन पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिस "शुचिता की राजनीति" का दावा भाजपा करती है, उसे इस तरह की नियुक्तियों से ठेस पहुँची है। विरोध का स्वर इतना तेज था कि कार्यकर्ताओं ने सीधे प्रदेश नेतृत्व से हस्तक्षेप की मांग कर डाली।
एक मंडल, दो अध्यक्ष : समानांतर सूचियों का खेल
मामला तब और अधिक पेचीदा हो गया जब भाजयुमो जिलाध्यक्ष सौरभ जायसवाल द्वारा जारी की गई 13 मंडलों की सूची को 10 मंडल अध्यक्षों ने सिरे से खारिज कर दिया। विद्रोह की स्थिति ऐसी बनी कि महज 24 घंटे के भीतर इन मंडल अध्यक्षों ने अपनी एक समानांतर सूची जारी कर दी।
इस घटनाक्रम के कारण कई मंडलों में अब 'दो-दो अध्यक्ष' और 'दो-दो महामंत्री' होने की स्थिति पैदा हो गई है। कार्यकर्ताओं के बीच इस असमंजस ने संगठन के भीतर गुटबाजी को सतह पर ला दिया है। अनुशासन की डोर हाथ से फिसलते देख दुर्ग संभाग प्रभारी और प्रदेश उपाध्यक्ष जगन्नाथ पाणिग्रही ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए पूरी सूची को स्थगित कर दिया है।
सिर्फ भिलाई नहीं, अन्य जिलों में भी सुलग रही आग
संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर उपजा यह असंतोष केवल भिलाई तक सीमित नहीं है। सूत्रों के अनुसार, प्रदेश भाजपा संगठन के पास अन्य कई जिलों से भी नियुक्तियों में धांधली, अपनों को रेवड़ी बांटने और सक्रिय कार्यकर्ताओं की अनदेखी करने की शिकायतें पहुँच रही हैं।
कहीं जिला अध्यक्षों पर एकतरफा निर्णय लेने के आरोप लग रहे हैं, तो कहीं बाहरी लोगों को तरजीह देने की बात कही जा रही है। जब संगठन के भीतर संवाद की कमी होती है और कार्यकर्ताओं की भावनाओं को अनदेखा किया जाता है, तो इस तरह के विस्फोटक हालात बनते हैं। फिलहाल प्राथमिकता गुटबाजी को रोककर संगठन को एकजुट करने की है।
सारंगढ़-बिलईगढ़ में नई जिम्मेदारी
भिलाई के इस हंगामे के बीच प्रदेश संगठन ने अन्य क्षेत्रों में नियुक्तियों का काम जारी रखा है। इसी क्रम में, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव के निर्देशानुसार योगेश्वर पटेल को सारंगढ़-बिलईगढ़ जिला के सालर मालदा मंडल अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया है। पार्टी को उम्मीद है कि इस नई नियुक्ति से क्षेत्र में संगठन को मजबूती मिलेगी।
निष्कर्ष
भिलाई का यह प्रकरण भाजपा के लिए एक चेतावनी की तरह है। चुनावी मोड में रहने वाली पार्टी के लिए कार्यकर्ताओं का यह खुला विद्रोह आने वाले समय में नुकसानदेह साबित हो सकता है। अब सबकी नजरें प्रदेश संगठन के अगले कदम पर टिकी हैं—क्या वे असंतुष्टों को मनाने में कामयाब होंगे, या फिर अनुशासन का चाबुक चलाकर स्थिति को नियंत्रित करेंगे? फिलहाल, भिलाई में भाजपा की राजनीति "वेट एंड वॉच" की स्थिति में है।
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