मुझसे इतना विशेष प्रेम क्यों, भाजपा प्रभारी की टिप्पणियों पर सचिन पायलट का आया जवाब

Ashish Bhardwaj | Apr 28, 2026, 13:54 IST
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Photograph: (the sootr)

राजस्थान के भाजपा प्रभारी राधामोहन दास अग्रवाल की टिप्पणियों पर कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने मंगलवार को जवाब दिया। उन्होंने कहा कि राधामोहन का मुझसे इतना विशेष प्रेम क्यों है, जब भी मिलेंगे, उनसे जरूर पूछूंगा।

News In Short

  • भाजपा प्रभारी राधामोहन दास अग्रवाल की टिप्पणियों पर सचिन पायलट का जवाब।
  • पायलट बोले-राधामोहन जब भी मिलेंगे, उनसे पूछूंगा कि मुझसे इतना विशेष प्रेम क्यों।
  • भाजपा नेता राधामोहन ने सोमवार को टोंक पर सचिन को बताया था बाहरी और बहुरूपिया।
  • राधामोहन के बयान पर गहलोत बोले थे कि सचिन अब भाजपा के बहकावे में नहीं आएंगे।
  • केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि मानेसर कांड के रचनाकार गहलोत ही थे।

News In Detail

​Jaipur: राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर जुबानी जंग चरम पर है। भाजपा के प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल द्वारा की गई तीखी टिप्पणियों पर दिग्गज कांग्रेस नेता और टोंक विधायक सचिन पायलट ने सधे हुए अंदाज में प्रतिक्रिया दी है। पायलट ने अग्रवाल के बयानों को सिरे से खारिज करते हुए एक ऐसा सवाल दागा है, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।

​पायलट बोल- मिलेंगे तो पूछूंगा इतना विशेष प्रेम क्यों

​पायलट ने भाजपा प्रभारी की विवादित टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, राधामोहन मुझसे इतना विशेष प्रेम क्यों रखते हैं, यह जब भी हम मिलेंगे, मैं उनसे जरूर पूछूंगा। पायलट ने राजनीति के गिरते स्तर पर चिंता जताते हुए स्पष्ट किया कि सार्वजनिक जीवन में संगठन का काम करना और अपनी बात को मजबूती से रखना सबका अधिकार है, लेकिन टीका-टिप्पणी का एक गरिमापूर्ण स्तर होना चाहिए।

उन्होंने कड़े लहजे में कहा, राजनीति व्यक्तिगत आक्षेपों के बजाय सैद्धांतिक, वैचारिक और जनहित के मुद्दों पर केंद्रित होनी चाहिए। जो नेता केवल मुद्दों और विचारधारा की बात करते हैं, वही लंबे समय तक जनता के दिलों में अपनी जगह बना पाते हैं।"

​विवाद की जड़ में 'बहुरूपिया' वाला बयान

​इस विवाद की शुरुआत टोंक में सोमवार को आयोजित भाजपा के बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन से हुई थी। वहां राधामोहन दास अग्रवाल ने सचिन पायलट के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्हें बाहरी करार दिया था। अग्रवाल ने कहा था कि पायलट न तो टोंक के निवासी हैं और न ही राजस्थान के। टोंक की जनता ने अनजाने में उन्हें चुन लिया है।
​
भाजपा प्रभारी ने पायलट को बहुरूपिया संबोधित करते हुए विवादित बयान भी दिया। उन्होंने कहा कि उनकी एक टांग कांग्रेस में रहती है और दूसरी कहां, किसी को पता नहीं। अग्रवाल ने कहा कि टोंक असल में भाजपा का मजबूत गढ़ है और आने वाले चुनावों में पार्टी जिले की सभी चारों सीटों पर जीत हासिल करेगी।

​गहलोत का बयान, अब सचिन भाजपा के बहकावे में नहीं

दिलचस्प बात यह है कि कभी पायलट के साथ सत्ता संघर्ष में उलझे रहे पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इस बार उनके बचाव में रणनीतिक बयान दिया। गहलोत ने भाजपा प्रभारी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भाजपा ने ही पहले पायलट को बहला-फुसलाकर मानेसर भेज दिया था।

​गहलोत ने कहा, अब सचिन समझ भी गए हैं और संभल भी गए हैं। उन्हें अहसास हो गया है कि एक बार गलती करने का क्या परिणाम होता है।

उन्होंने अग्रवाल के एक टांग वाले बयान पर तंज कसते हुए कहा कि पायलट की दोनों टांगें कांग्रेस में ही हैं और वे पार्टी छोड़कर कहीं नहीं जाने वाले। गहलोत ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव जीतने के लिए ईडी और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है।

​गजेंद्र सिंह शेखावत का पलटवार

​इस सियासी दंगल में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी कूद पड़े हैं। उन्होंने अशोक गहलोत पर पलटवार करते हुए कहा कि गहलोत खुद कांग्रेस को मानेसर की घटना भूलने नहीं देना चाहते। शेखावत ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा, मानेसर की घटना के रचनाकार, उस कहानी के रचयिता और पूरे ड्रामे के डायरेक्टर खुद अशोक गहलोत साहब हैं।

​शेखावत ने आगे कहा कि सचिन पायलट तो उस समय मात्र एक मोहरा थे। उन्होंने दावा किया कि गहलोत आज भी पायलट को एक मोहरे की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि वे अपने स्वयं के राजनीतिक उद्देश्यों को साध सकें और अपनी बयानबाजी जारी रख सकें।

​मानेसर कांड कांग्रेस का पुराना घाव

​इस पूरी बहस के केंद्र में 2020 का 'मानेसर कांड' है। यह राजस्थान की राजनीति का वह दौर था जब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच सत्ता का संघर्ष चरम पर पहुंच गया था। पायलट अपने समर्थक विधायकों के साथ मानेसर चले गए थे, जिससे गहलोत सरकार गिरने की कगार पर आ गई थी।

​भले ही आज कांग्रेस आलाकमान राजस्थान में 'एकजुटता' का दावा कर रहा हो, लेकिन भाजपा बार-बार मानेसर की याद दिलाकर कांग्रेस की आंतरिक कलह को कुरेदने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है।

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