छत्तीसगढ़ में खुलेंगे 5 नए मेडिकल कॉलेज, लेकिन 50% पद अब भी खाली, NMC के निरिक्षण ने बढ़ाई चिंता
छत्तीसगढ़ सरकार ने स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए प्रदेश के पांच शहरों- कवर्धा, मनेंद्रगढ़, जांजगीर-चांपा, गीदम (दंतेवाड़ा) और कुनकुरी (जशपुर) में नए मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की है। इन कॉलेजों के लिए डीन की नियुक्ति भी कर दी गई है और इसी महीने National Medical Commission (NMC) की टीम निरीक्षण के लिए आने वाली है।
हालांकि इस योजना के बीच एक बड़ी समस्या सामने आ रही है- प्रदेश के मौजूदा मेडिकल कॉलेजों में ही फैकल्टी की भारी कमी।
पुराने कॉलेजों में ही 50% से ज्यादा पद खाली
प्रदेश के 10 सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में कुल 2660 डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से लगभग 1290 पद अब भी खाली हैं। यानी करीब आधे पद रिक्त हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब पुराने कॉलेजों में ही डॉक्टरों और विशेषज्ञों की कमी दूर नहीं हो पा रही है, तो नए मेडिकल कॉलेजों के लिए फैकल्टी कहां से आएगी।
NMC निरीक्षण से बढ़ेगी चुनौती
NMC की टीम जल्द ही राज्य के मेडिकल कॉलेजों का निरीक्षण करेगी। इस दौरान वह न केवल नए कॉलेजों का जायजा लेगी, बल्कि पुराने कॉलेजों में फैकल्टी की स्थिति पर भी नजर रखेगी। यदि मानकों के अनुरूप फैकल्टी और इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं मिला, तो नए कॉलेजों की मान्यता पर असर पड़ सकता है।
इन जगहों पर खुलेंगे नए मेडिकल कॉलेज
राज्य सरकार ने जिन स्थानों का चयन किया है, वे हैं:
- कवर्धा
- मनेंद्रगढ़
- जांजगीर-चांपा
- गीदम (दंतेवाड़ा)
- कुनकुरी (जशपुर)
दंतेवाड़ा और जशपुर में जिला अस्पतालों को संबद्ध अस्पताल के रूप में दिखाने की तैयारी है।
लेकिन कुनकुरी-जशपुर के मामले में दूरी (करीब 50-52 किमी) एक बड़ी समस्या बन सकती है, क्योंकि NMC के नियमों के अनुसार मेडिकल कॉलेज और संबद्ध अस्पताल के बीच दूरी 10-15 किमी के भीतर होनी चाहिए।
भर्ती प्रक्रिया जारी, फिर भी कमी बरकरार
फैकल्टी की कमी को दूर करने के लिए Chhattisgarh Public Service Commission (CGPSC) के माध्यम से 125 असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती की जा रही है। इंटरव्यू 28 मार्च तक चलेंगे, इसके बाद रिजल्ट जारी होगा। चयनित उम्मीदवारों को जल्द जॉइनिंग दी जाएगी। लेकिन यह भी पर्याप्त नहीं होगा, क्योंकि वर्तमान में असिस्टेंट प्रोफेसर के 332 पद खाली हैं।
सुपर स्पेशलिटी डॉक्टरों की भी कमी
CGPSC केवल 7 सुपर स्पेशलिटी पदों पर भर्ती कर रहा है, जिनमें शामिल हैं:
- कार्डियोलॉजी (2 पद)
- मेडिकल ऑन्कोलॉजी
- सर्जिकल ऑन्कोलॉजी
- कार्डियो थोरैसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी
- कार्डियक एनेस्थेटिस्ट
इतनी सीमित भर्ती से विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर होना मुश्किल नजर आ रहा है।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ सरकार की नई मेडिकल कॉलेज खोलने की योजना स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए अहम है, लेकिन फैकल्टी की कमी इस योजना की सबसे बड़ी बाधा बन सकती है। अब नजरें NMC के निरीक्षण पर टिकी हैं- क्योंकि उसी के आधार पर तय होगा कि ये नए मेडिकल कॉलेज समय पर शुरू हो पाएंगे या नहीं।
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