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NEWS IN SHORT
- छत्तीसगढ़ में 5 नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना प्रक्रिया तेज की गई।
- जशपुर, मनेंद्रगढ़, कबीरधाम, जांजगीर-चांपा और दंतेवाड़ा में डीन नियुक्त किए गए।
- प्रभारी अधिष्ठाता को शैक्षणिक, चिकित्सकीय और प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपी गई।
- डीन की नियुक्ति से लंबित प्रशासनिक निर्णयों में तेजी आएगी।
- चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा कॉलेजों की नियमित समीक्षा की जाएगी।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ में 5 नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की कार्रवाई सरकार ने तेज कर दी है। पूर्व में सरकार ने जिन मेडिकल कॉलेजों की घोषणा की थी, उनमें डीन की नियुक्ति कर दी गई है। इनमें जशपुर, मनेंद्रगढ़, कबीरधाम, जांजगीर-चांपा और दंतेवाड़ा में मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। माना जा रहा है कि सरकार के इस आदेश के बाद इन कॉलेजों के निर्माण और स्थापना कार्यों में तेजी आएगी।
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इसलिए हुई हैं नियुक्तियां
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रभारी अधिष्ठाता को महाविद्यालय के शैक्षणिक, चिकित्सकीय और प्रशासनिक कार्यों का संचालन नियमानुसार करना होगा। इसके साथ ही अस्पताल से जुड़े मरीजों की सुविधाएं, शिक्षण व्यवस्था, स्टाफ प्रबंधन और विभागीय समन्वय की जिम्मेदारी भी उन्हीं के अधीन रहेगी। विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से निर्णय प्रक्रिया में तेजी आएगी और लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण हो सकेगा।
इन्हें मिला है प्रभार
- डॉ. मनोज कुमार मिंज को रायगढ़ से डीन बनाकर जशपुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया है।
- डॉ. रंजना सिंह आर्या को अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज से मनेंद्रगढ़ मेडिकल कॉलेज भेजा गया है।
- डॉ. अजय कोसम को राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज से कबीरधाम मेडिकल कॉलेज की जिम्मेदारी दी गई है।
- डॉ. राकेश नहरेल को सिम्स बिलासपुर से जांजगीर-चांपा मेडिकल कॉलेज का डीन नियुक्त किया गया है।
- वहीं डॉ. टीकू सिंहा को जगदलपुर से दंतेवाड़ा मेडिकल कॉलेज में डीन का प्रभार दिया गया है।
प्रशासनिक निर्णयों में आएगी तेजी
बताया जा रहा है कि नवीन चिकित्सा महाविद्यालयों में पिछले कुछ समय से स्थायी अधिष्ठाता की नियुक्ति नहीं होने के कारण कई प्रशासनिक निर्णय लंबित थे। ऐसे में प्रभारी अधिष्ठाता की तैनाती को अंतरिम लेकिन आवश्यक कदम के रूप में देखा जा रहा है। कॉलेज प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इससे शैक्षणिक सत्र, परीक्षाओं, इंटर्नशिप और अस्पताल प्रबंधन से जुड़े कार्य प्रभावित नहीं होंगे।
सरकार करेगी समीक्षा
चिकित्सा शिक्षा विभाग ने यह भी निर्देश दिए हैं कि प्रभारी अधिष्ठाता सभी शासकीय नियमों, निर्देशों और समय-सीमा का पालन सुनिश्चित करेंगे। किसी भी प्रकार की अनियमितता की स्थिति में जवाबदेही तय की जाएगी। साथ ही विभागीय स्तर पर समय-समय पर समीक्षा भी की जाएगी, ताकि महाविद्यालय की कार्यप्रणाली पर नजर रखी जा सके। जहां एक ओर कर्मचारियों को उम्मीद है कि प्रशासनिक कामकाज में स्थिरता आएगी, वहीं छात्र यह अपेक्षा कर रहे हैं कि पढ़ाई और अस्पताल सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
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